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‘‘बंदूकों की बजाए हमारी आवाज हमारी तर्जुमानी करती है. संगीत ही हमारी पहचान है, और कुछ नहीं’’

हाल ही में लॉन्च किए उनके दो गाने घाटी में धूम मचा रहे हैं. वे मानते हैं कि घाटी में उथल-पुथल के कारण उन्हें पढ़ाई और संगीत के प्रचार में कई परेशानियों का सामना करना पड़ा.

शौकीन नबी, शाह जफर शौकीन नबी, शाह जफर

‘‘बंदूकों की बजाए हमारी आवाज हमारी तर्जुमानी करती है. संगीत ही हमारी पहचान है, और कुछ नहीं’’

शौकीन नबी 22 वर्ष, शाह जफर 22 वर्ष
संगीतकार बडगाम और टंगमर्ग

बारामूला के एक हॉल में दो 22 वर्षीय कश्मीरी युवा, बडगाम के शौकीन नबी और टंगमर्ग के शाह जफर एक पुराना लोकप्रिय फिल्मी गीत गा रहे हैं: जो वादा किया वो निभाना पड़ेगा; रोके जमाना चाहे रोके खुदाई... गीत के बोल में न केवल कश्मीर बल्कि पूरे भारत के लिए मायने तलाशे जा सकते हैं. दोनों का सियासत से कभी कोई सरोकार नहीं रहा. दोनों ही संगीत में भविष्य तलाश रहे हैं. इन्हें अपना गिटार एके-47 से ज्यादा ताकतवर लगता है.

पिछले पांच वर्षों में घाटी में अशांति का उन पर असर हुआ है. नबी राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर हैं लेकिन कॉलेज के पूरे कोर्स के दौरान उनका ज्यादा ध्यान संगीत पर ही रहा. जब सरकार ने 2016 में बुरहान वानी के मारे जाने के बाद या फिर 2019 में अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के बाद इंटरनेट पर प्रतिबंध लगाया, तो नबी यूट्यूब और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया चैनलों के माध्यम से अपने संगीत को लोकप्रिय बनाने से चूक गए.

नबी की महत्वाकांक्षा अपने संगीत और गीतों को कश्मीर से आगे ले जाने, कश्मीर के लोक संगीत को लोकप्रिय बनाने के अलावा राष्ट्रीय स्तर की पहचान वाले गायक बनने की है. नबी के शब्दों में, ''मैं चाहता हूं कि मुझे उस शौकीन नबी के रूप में जाना जाए जो कश्मीर में रहता है और जिसे संगीत के अलावा किसी दूसरी चीज का कोई शौक या जुनून नहीं है. यही मेरी एकमात्र पहचान है.’’ 

जफर भी अपने इरादों को लेकर स्पष्ट हैं: ‘‘सियासत का ख्याल भी कभी मेरे दिमाग में नहीं आया.’’ उनका पूरा ध्यान गायकी और संगीत कौशल को सुधारने पर है. वे बॉलीवुड का पार्श्व गायक बनना चाहते हैं. जफर बचपन से ही विलक्षण रहे हैं और स्कूली दिनों से ही उनके गीत-संगीत के हुनर की तारीफ होती रही है.

हाल ही में लॉन्च किए उनके दो गाने घाटी में धूम मचा रहे हैं. वे मानते हैं कि घाटी में उथल-पुथल के कारण उन्हें पढ़ाई और संगीत के प्रचार में कई परेशानियों का सामना करना पड़ा. लेकिन मुश्किलें जफर को उनके इरादों से डिगा नहीं सकतीं. जफर अपने हमवतन लोगों को एक संदेश देना चाहते हैं, ''हमारी जिंदगी ऊपरवाले की दी हुई नियामत है और हमें इसका पूरा उपयोग करना चाहिए. आपके पास जिस भी तरह का हुनर हो, उसे तलाशें. उन लोगों की बातें मत सुनें जिनका काम सिर्फ बातें बनाना या परेशान करना है.’’

जम्मू-कश्मीर की आबादी भारत की सबसे युवा आबादी है. यहां के 40 फीसद से ज्यादा लोगों की उम्र 23 वर्ष से कम है. 18-29 आयु वर्ग में बेरोजगारी की दर भी देश में सबसे अधिक है. 2017 में यहां प्रति 1,000 पर 238 बेरोजगार थे जो अखिल भारतीय औसत (1,000 पर 102) से दोगुना है.

प्रसिद्ध कश्मीरी कवि पीरजादा गुलाम अहमद ‘महजूर’ के एक शेर में यहां के युवाओं और भारत सरकार के लिए संदेश का सार दिखता है. उसका मोटा अनुवाद है कि ''ओ माली! उठो. एक नए वसंत ने दस्तक दी है, उसका स्वागत करो.’’

238
बेरोजगार थे 18 से 29 आयु वर्ग के प्रति 1,000 लोगों में, 2017 में.

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