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''मैं पारदर्शिता, जवाबदेही पर जोर दे रहा हूं, पर अलगाववादी नेताओं में इनमें से कोई गुण नहीं''

हमें एक ऐसा नेतृत्व चाहिए जिसके पास विजन हो और जो पाखंडी न हो. हमारे नौजवानों को हिंसक अतीत भूल जाना चाहिए और ऐसा माहौल तैयार करना चाहिए जहां आज की और भविष्य की पीढ़ियां फल-फूल सकें

तौसीफ रैना 29 वर्ष, अध्यक्ष, नगर परिषद, बारामूला तौसीफ रैना 29 वर्ष, अध्यक्ष, नगर परिषद, बारामूला

तौसीफ रैना दो सशस्त्र गार्डों के साथ बारामूला के जीर्ण-शीर्ण नगर निगम कार्यालय में बैठते हैं. 29 वर्षीय रैना जम्मू-कश्मीर के चौथे सर्वाधिक आबादी वाले शहर की नगर परिषद के अध्यक्ष हैं, जिसकी आबादी लगभग 70,000 है. घाटी में आतंकवादी उनके जैसे आसान शिकार पर निशाना साध रहे हैं, ताकि स्थानीय निकाय के चुने हुए प्रतिनिधियों के दिलों में डर पैदा कर सकें. इस साल तीन पार्षदों की पहले ही हत्या हो चुकी है—दो की 30 मार्च को सोपोर में और एक की 2 जून को त्राल में. पर रैना डरे नहीं हैं. वे कहते हैं, ''अगर लोग समझ जाएं कि हर कोई बिना किसी डर के सच बोल सकता है, तो बदलाव हो सकता है. जब तक मेरे पास खुदा की दी हुई जिंदगी है, मैं किसी से नहीं डरता. मुझे लगता है, हकीकत ही इकलौता हल है.''

और सचाई क्या है? घाटी में, जहां कट्टरपंथियों, खास कर हुर्रियत की आलोचना, उग्रवादियों से प्रतिशोध को न्यौता दे सकती है, रैना निडर हैं. ''मैं पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर दे रहा हूं, लेकिन हुर्रियत नेताओं और अलगाववादियों में इनमें से कोई भी गुण नहीं हैं. हमें उनके झूठे वादों पर सवाल उठाना चाहिए. क्या किसी ने उनसे नहीं पूछा कि उन्होंने हमारे युवाओं को बंदूक उठाकर हिंसा के लिए भड़का कर क्या हासिल किया है? क्या उनके पास कोई ठोस योजना थी? वे केंद्र सरकार से बात करने से भी कतराते हैं.''

रैना कश्मीर की स्थिति के लिए हुर्रियत को सीधे तौर पर दोषी ठहराते हैं. वे कहते हैं, ''उनकी झूठी छवि का पर्दाफाश किया जाना चाहिए. हमारे पास ऐसा नेतृत्व होना चाहिए, जिसमें स्पष्टता और विजनन हो, पाखंड नहीं. हमारे युवाओं को हिंसक अतीत को भूल जाना चाहिए और एक ऐसा माहौल बनाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, जहां हमारी मौजूदा और आने वाली पीढिय़ां फल-फूल सकें.''

राजनीति रैना का पहला प्यार नहीं था. उन्होंने जनसंचार की डिग्री हासिल करने के बाद एक पत्रकार के रूप में करियर शुरू किया, लेकिन जल्द ही एक सामाजिक कार्यकर्ता बन गए. स्थानीय निकायों में विकास और भ्रष्टाचार की रफ्तार से परेशान होकर, उन्होंने महसूस किया कि उन्हें एक आमूलचूल सुधार की आवश्यकता है. और उस बदलाव को लाने का इससे बेहतर तरीका और क्या हो सकता है कि हम व्यवस्था का हिस्सा बनें?

रोजगार के लिए सरकारी नौकरियों पर युवाओं की अत्यधिक निर्भरता रैना के लिए गहरी चिंता का विषय है. उनका मानना है कि उन्हें पर्यटन और अन्य उद्योगों को बढ़ावा देने पर ध्यान देना शुरू करने की जरूरत है, ताकि निजी क्षेत्र में रोजगार के अधिक अवसर हों. उनका यह भी मानना है कि केंद्र सरकार को जम्मू-कश्मीर में विकास और परिवर्तन लाने के वादे को पूरा करना चाहिए.

''हमारा राज्य का दर्जा छीनकर एक केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया है. कश्मीर के लोग जल्द से जल्द अपना राज्य का दर्जा वापस चाहते हैं, और केंद्र सरकार को जल्द से जल्द अपना वादा पूरा करना चाहिए.'' रैना फिर अपनी एसयूवी में चढ़ते हैं और बारामूला के मुख्य बाजार में जाते हैं. बहुत सारे व्यवसायी उन्हें तुरंत घेर लेते हैं और उन्हें अपनी-अपनी समस्याएं सुनाते हैं. युवा नगर अध्यक्ष उन्हें धैर्य से सुनते हैं.

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