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समझदारी के साथ कर्ज कैसे लें

ऋण वरदान या अभिशाप हो सकता है. यह आपको कई वित्तीय लक्ष्य हासिल करने में मदद कर सकता है और आपको वित्तीय संकट में भी डाल सकता है. जानिए कि कर्ज के मामले में होशियारी कैसे बरतें

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स्मार्ट मनीः वित्तीय लक्ष्य
स्मार्ट मनीः वित्तीय लक्ष्य

नारायण कृष्णमूर्ति

बढ़ती महंगाई, आय पर दबाव, आसमान छूते खर्चों ने घर के बजट को तहस-नहस कर दिया है. मुंबई में रहने वाले रमेश त्रिपाठी ने 2021 में अपना 50वां जन्मदिन समारोह बहुत सीधे-सादे ढंग से मनाया क्योंकि उनकी पत्नी, दो किशोर बच्चों और 78 वर्षीया मां सहित पांच लोगों का परिवार अपने जीवन पर कोविड के प्रभाव से जूझ रहा था. अनिश्चितता के दौर ने उनके वित्तीय भंडार को काफी कम कर दिया था. वे याद करते हुए बताते हैं, ''मैं होम लोन चुका रहा था और दूसरा लैपटॉप खरीदने के लिए पर्सनल लोन भी ले रखा था, क्योंकि मेरी बेटी को अपनी ऑनलाइन क्लास चलाने के लिए लैपटॉप की जरूरत थी.'' उन्होंने कोई पहली बार कर्ज नहीं लिया था, लिहाजा वे इसके फायदों को समझते हैं.

एक समय ऐसा था जब त्रिपाठी परिवार अपनी आय का लगभग 60 फीसद हिस्सा कर्ज अदायगी पर खर्च करता था. उन्होंने घर, कार, और कुछ गैजेट्स के लिए कर्ज लिया था और अपना खर्च चलाने के लिए थोड़े समय के लिए पर्सनल लोन भी लिया था. उनके बड़े बेटे ने ग्रेजुएशन करने के लिए एजुकेशन लोन लिया था, लेकिन महामारी के घर जमाने के साथ ही उन्हें रोजगार पाने में उम्मीद से ज्यादा देरी हो गई. दूसरे परिवारों की ही तरह उनका परिवार भी अक्सर आर्थिक बोझ से जूझता रहता है, खर्च चलाने के लिए बचत पूरी नहीं पड़ती.

इस बीच, बेंगलूरू में रहने वाले 24 वर्षीय आदित्य शेट्टी को पे-डे लोन से तो राहत मिली है, जो एक उधार देने वाले ऐप पर उपलब्ध है. वे उस ऐप के कसीदे पढ़ते रहते हैं. उन्होंने 2022 की शुरुआत से हर महीने कर्ज लिया. वे पे-डे लोन पर अपनी निर्भरता को सही ठहराते हुए कहते हैं, ''पिछले दो साल में कोई वेतन-वृद्धि नहीं होने और बढ़ते खर्चों की वजह से मुझे लगता है कि मेरी बचत महीने के अंत से पहले चुक गई है. मैं अपने मां-बाप से पैसे नहीं मांगना चाहता.'' पे-डे लोन उस कामकाजी वर्ग के लोगों के लिए होते हैं, जिन्हें अपना गुजारा पूरा करने में परेशानी होती है और महीने के आखिर में अक्सर उनके हाथ खाली रहते हैं.

शेट्टी जैसे कई युवाओं के लिए अपने वित्त का प्रबंधन करना मुश्किल हो गया है, जिससे उन्हें जरूरी चीजों के लिए उधार लेना पड़ता है. लगभग हर चीज के लिए कर्ज की आसान उपलब्धता की वजह से उनमें से कई बचत और बजट की अवधारणा को भूल गए हैं. वे महीने दर महीने ईएमआइ (इक्वेटेड मंथली इंस्टालमेंट्स या समान मासिक किस्त) भरते रहते हैं. कई नौजवान आसान कर्ज को वरदान मानते हैं जो उन्हें कम समय में अपने वित्तीय लक्ष्यों और आकांक्षाओं को साकार करने में मदद करता है. एमआरपी के बजाए ईएमआइ के साथ उत्पादों की कीमतों को चिन्हित करने वाले मोबाइल ऐप और स्टोर पर द ग्रेट इंडियन फेस्टिव सीजन इस रुझान को और बढ़ा रहा है.

कर्ज के कई रंग

कर्ज को होशियारी से इस्तेमाल करके आप अपने लघु और दीर्घकालिक वित्तीय लक्ष्यों को हासिल कर सकते हैं. अपने लक्ष्यों को कभी-कभी वक्त से पहले हासिल करने के लिए उधार लेना स्मार्ट कदम है. वैसे, उसे हासिल करने में वक्त लग सकता था. लेटेस्ट स्मार्टफोन खरीदने के लिए साल भर तक 3,000 रुपए हर महीने बचाने से ज्यादा इंतजार करना पड़ सकता है जबकि आप कंज्यूमर लोन के जरिए वह तुरंत खरीद सकते हैं. लेकिन हर किसी के लिए यह जानना और उसका पालन करना कि कौन सा ऋण अच्छा है और कौन सा नहीं है, आसान नहीं है.

कर्ज का अच्छा या बुरा होना कई कारकों पर निर्भर करता है और यह जानना मुश्किल हो सकता है कि आपको कैसे और कितना उधार लेना चाहिए. इसके अलावा, आपके लिए सही ऋण का प्रकार आपकी स्थिति पर निर्भर करता है. इसका मतलब यह है कि आपको अपनी वित्तीय योजना में स्मार्ट लोन शामिल करने का सबसे अच्छा तरीका खोजने की जरूरत है. उधार लेने के मामले में कुछ निश्चित कारक होते हैं—आपका मौजूदा क्रेडिट स्कोर, आपके कर्ज पर ब्याज दर, वह अवधि जिसमें आप इस कर्ज को वापस करेंगे और वह राशि जो आप खुद उधार लेते हैं. आपको कर्ज के मामले में अनूठी सहनशीलता को भी ध्यान में रखना होगा यानी आप कितना लेकर चुका सकते हैं.

अच्छे और बुरे कर्ज के बीच मामूली फर्क इस तथ्य पर आधारित होता है कि अच्छा कर्ज ऐसा उधार है जो आपको दीर्घकालिक संपत्ति बनाने में मदद करता है और खराब कर्ज आपके क्रेडिट स्कोर को नुक्सान पहुंचा सकता है और आपके पैसे-कौड़ी को खत्म कर सकता है. उधार लेने से जुड़े जोखिम और लागतें भी होती हैं, जिन्हें उधार लेने वाले कभी-कभी कर्ज लेने के वक्त नजरअंदाज कर देते हैं. मिसाल के तौर पर, अक्सर घर खरीदने के लिए हासिल किए जाने वाले दीर्घकालिक कर्ज की तुलना में हमें अल्पकालिक असुरक्षित

ऋण बहुत ज्यादा ब्याज दर पर मिलता है.

अक्सर लोग कमाई शुरू करने के साथ ही अपना क्रेडिट कार्ड हासिल कर लेते हैं और तब ही पहली बार ऋण लेते हैं. किसी कार्ड पर क्रेडिट सीमा को अक्सर बचत माना जाता है. इस रकम का इस्तेमाल किसी तरह तरह के खराब असर को महसूस किए बिना आसानी से किया जा सकता है. शेट्टी कहते हैं, ''बकाया चुकाने में बार-बार देरी और मेरी ओर से अनियमित भुगतान के कारण मेरा क्रेडिट कार्ड ब्लॉक कर दिया गया.'' वे शुरू में देय तिथि पर बकाया क्रेडिट कार्ड का भुगतान करने में सावधानी बरतते थे. लेकिन उन्होंने हर खर्च के लिए कार्ड का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया जिसकी वजह से खर्च बढ़ गया. वे कहते हैं, ''मेरा खर्च नियंत्रण से बाहर हो गया और जल्द ही मैं कार्ड पर लोन लेने की सीमा को पार कर गया.''

क्रेडिट कार्ड ऋण शायद खराब कर्ज की सबसे आम मिसाल है. ज्यादा ब्याज दरों की वजह से यह कर्ज का बुरा रूप है. इस मामले में फ्रिज-वाशिंग मशीन और उपभोक्ता वस्तुओं के लिए कर्ज अगला अपराधी है. मुंबई की रहने वाली 46 वर्षीया विद्या शाह ने 2021 में एक बड़े रिटेलर से 14,000 रुपए का माइक्रोवेव खरीदा. वे माइक्रोवेव के लिए भुगतान करने ही वाली थीं कि एक स्मार्ट लोन सेल्समैन ने उन्हें बिक्री पर शून्य प्रतिशत ब्याज के साथ छह महीने की आसान ईएमआइ का लालच दिया. उन्हें यह प्रस्ताव रिझा रहा था क्योंकि उन्हें केवल 200 रुपए का अतिरिक्त भुगतान करना था और उनके मौजूदा ऋण कार्ड की वजह से वह मिलना आसान था.

वे बताती हैं, ''मैंने ऐसा अपनी आंखों के सामने होते हुए देखा. मेरे पास पैसे थे, मैं पूरा पैसा चुकाना चाहती थी और फिर उस लड़के ने मुझसे बात की और कुछ ही मिनटों में मुझे लगा कि मैंने जो कुछ भी बचाया था, उसे खर्च करने के बजाए मैंने पैसे बचा लिए हैं.'' घर पहुंचने के बाद शाह ने अपने लेन-देन की जांच की तो उन्हें एहसास हुआ कि बीसेक साल के सेल्समैन ने बरगला दिया है. उन्होंने माइक्रोवेव लेने के लिए दो ईएमआइ का भुगतान किया था, जिसका मतलब था कि छह महीने के बजाए उनकी ईएमआइ पांच महीने के लिए थी और उन्होंने प्रोसेसिंग फीस का भुगतान किया था. यानी उन्हें माइक्रोवेव के लिए 14,000 रुपए के बजाय 14,200 रुपए खर्च करने पड़े.

वाशिंग मशीन-फ्रिज, मोबाइल फोन, लैपटॉप और यहां तक कि कपड़ों के बड़े खुदरा विक्रेताओं ने उपभोक्ताओं को आकर्षित करने का एक स्मार्ट तरीका निकाला है—ऑफर के जरिए साल भर बिक्री करते रहें. उन्होंने बैंकों और मैन्यूफैक्चरर के साथ जीरो परसेंट ईएमआइ योजनाएं तैयार की हैं. इस तरह के ऑफर दो तरह के होते हैं—एक, जिनमें प्रोसेसिंग फीस होती है जो ब्याज शुल्क के बराबर होती है. दूसरी सबवेंशन प्रकार की योजना है जिनमें वे प्रोसेसिंग फीस नहीं लेते हैं, लेकिन उसके ब्याज का हिस्सा कार्ड जारीकर्ता या खुदरा व्यापारी वहन करता या चुकाता है.

विद्या शाह कहती हैं, ''मुझे समझ में नहीं आया कि खुदरा विक्रेता भला ब्याज या प्रोसे‌सिंग फीस क्यों माफ करेंगे. मुझे लगा कि मुझे अच्छा सौदा मिल रहा है और अंतत: मैंने जीरो फीसद ईएमआइ पर दो और सामान खरीद लिए.'' वैसे, वे कोई अपवाद नहीं हैं. कई पुरुष और महिलाएं, उच्च शिक्षित और काबिल लोग इस हकीकत को भूल जाते हैं कि अक्सर ऐसी योजनाओं की वजह से आप ऐसी चीजें खरीद लेते हैं जिनकी आपको जरूरत नहीं होती या आप उन्हें अपने बजट से ज्यादा कीमत पर खरीदते हैं. आसान पैसे का लालच ऐसी सभी खरीदारी को उधार का बहुत ही खराब रूप बना देता है. ये सभी योजनाएं आम उपभोक्ताओं की समझ के लिहाज से बहुत पेचीदा हैं.

अक्सर, उत्पाद निर्माता खुदरा विक्रेताओं के माध्यम से बेचे जाने वाले मॉडल को धीरे-धीरे बनाना बंद कर देते हैं. अगर आप पूरा पैसा चुकाकर ऐसी वस्तुओं पर छूट मांगते हैं, तो खुदरा विक्रेता ऐसे सौदों पर विचार नहीं करते. कई उत्पाद नकद पर बिल्कुल भी उपलब्ध नहीं हैं; वे केवल ईएमआइ पर ही उपलब्ध हैं. और आप इसे एकमुश्त भगतान करने पर जोर देते हैं, तो वे इसे स्वीकार करने के साथ ही उसमें अतिरिक्त प्रोसे‌सिंग फीस भी जोड़ देंगे, जिसकी कतई जरूरत नहीं होती. आखिरकार, आपको खरीदने के लिए पहले से तय चीज के मुकाबले ज्यादा महंगा कुछ खरीदने का लालच दिया जा सकता है.

नियामक—इस मामले में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ)—समय-समय पर हस्तक्षेप करता है और मूल्य निर्धारण तथा लगाए गए शुल्कों में अधिक पारदर्शिता के लिए कहता है. अलबत्ता, इस तरह का हस्तक्षेप तब होता है जब ऐसी योजनाओं ने अति मचा रखी हो. प्रोसे‌सिंग फीस के रूप में ब्याज घटक को छिपाना और इसे उपभोक्ताओं तक पहुंचाना आम चाल है. बिक्री एजेंट अक्सर अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रोसेसिंग फीस को हद दर्जे तक कम कर देते हैं. इस पूरी योजना में खुदरा विक्रेता, फाइनेंसर और उत्पाद निर्माता को फायदा होता है; ऐसे सभी सौदों की पेचीदगी भोले-भाले उपभोक्ताओं को कभी दिखाई नहीं देती.

कर्ज का एक और रूप जो ज्यादा महंगा लगता है, वह है ऑटो लोन. आसान लफ्जों में कहें तो ये ऐसे ऋण हैं जिनका इस्तेमाल वक्त के साथ कीमत घटने वाली संपत्ति खरीदने के लिए किया जाता है. यह आर्थिक दृष्टि से रोजमर्रा के खर्चे पूरे करने के लिए उधार लेने जैसा है, जिसमें जाहिर है, कोई समझदारी नहीं है. जब त्रिपाठी कार खरीद रहे थे, तो उन्हें अपनी जरूरतों और पुनर्भुगतान क्षमता के आधार पर मॉडल और सीमा के बारे में पता था. डीलर ने उन्हें ज्यादा कीमत वाले मॉडल को चुनने के लिए समझाने की कोशिश की, लेकिन वे अपनी बात पर अड़े रहे. वे बताते हैं, ''मैं ज्यादा ईएमआइ का भुगतान नहीं करना चाहता था क्योंकि मुझे पता था कि यह मेरे बजट से बाहर होगा.''

ऋण का अच्छा रूप वह है जो आपके उद्देश्यों को पूरा करने में आपकी सहायता करता है. होम लोन के बाद एजुकेशन लोन शायद अच्छे ऋण की सबसे आम मिसाल है. आपके पूरे करियर में कॉलेज की डिग्री और ज्यादा कमाई के बीच संबंध को देखते हुए, शिक्षा के लिए उधार लेना समझ में आता है. होम लोन लेना अच्छे कर्ज का एक और आम उदाहरण है क्योंकि ज्यादातर लोगों के लिए घर के लिए एकमुश्त भुगतान करना मुमकिन नहीं है. होम लोन की ईएमआइ का भुगतान करने से घर का मालिकाना हक और संभावित कर लाभ मिलते हैं, जिससे उधार लेने की लागत कम हो सकती है.

जब उधार लेने की बात आती है तो व्यापक नियम होते हैं (देखें: उधार लेने के पक्के नियम). ये आपको यह जानने में मदद कर सकते हैं कि आप आदर्श रूप से कितना उधार ले सकते हैं और उधार के मामले में कब अति नहीं करनी है. वास्तविक सीमा अलग-अलग व्यक्ति और उनकी कमाई, वित्तीय स्थिति, जोखिम लेने की क्षमता और क्रेडिट स्कोर में ये संकेतक अलग हो सकते हैं. लेकिन, यह जानने के लिए एक अच्छा प्रारंभिक बिंदु है कि आप कितना उधार ले सकते हैं.

होम लोन और कर लाभ

सरकार ने लोगों को अपना घर खरीदने के लिए प्रोत्साहित करने की खातिर होम लोन के पुनर्भुगतान पर कर रियायत की अनुमति दी है. सीमा के भीतर प्रत्येक वित्तीय वर्ष में ब्याज और मूलधन पुनर्भुगतान दोनों पर कर लाभ का दावा किया जा सकता है. कर्ज लेने वाला व्यक्ति इन दोनों को मिलाकर एक वित्तीय वर्ष में कर बचत में 3.5 लाख रुपए तक का क्लेम कर सकता है. होम लोन पर टैक्स बेनिफिट का इस्तेमाल बचत को अधिकतम करने के लिए चतुराई से किया जा सकता है, खासकर अगर लोन संयुक्त रूप से लिया गया हो (देखें: ज्वाइंट लोन के ज्यादा फायदे). यह एक ऐसा कदम है जो आपके होम लोन को एक बहुत ही शक्तिशाली एसेट क्रिएशन टूल के साथ-साथ टैक्स सेविंग एवेन्यू बना सकता है.

एजुकेशन लोन प्राथमिक क्षेत्र का ऋण है और यह व्यापक रूप से केवल एजुकेशन लोन देने में विशेषज्ञता वाले बैंकरों और अन्य उधारदाताओं के लिए उपलब्ध है. आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 80ई के तहत कर योग्य आय से हायर एजुकेशन हासिल करने के लिए लिए गए कर्ज पर भुगतान किए गए ब्याज की कटौती का क्लेम कर सकते हैं. धारा 80ई के अनुसार, वित्त वर्ष के दौरान भुगतान की गई ईएमआइ की कुल ब्याज राशि पर कटौती की अनुमति है.

कर कटौती का क्लेम करने के लिए  उधार लेने वाले को बैंक से एक प्रमाण पत्र लेना होगा जिसमें वित्तीय वर्ष के दौरान भुगतान किए गए एजुकेशन लोन के मूलधन और ब्याज राशि का अलग से उल्लेख करना होगा. ऐसा इसलिए है क्योंकि मूल पुनर्भुगतान राशि पर कोई कटौती की अनुमति नहीं है. कटौती राशि की कोई सीमा नहीं है. कटौती का लाभ अधिकतम आठ वर्षों के लिए या ब्याज का भुगतान होने तक, जो भी पहले हो, उपलब्ध है और यह तब भी लागू होता है जब आपने अपने जीवनसाथी, बच्चों या किसी ऐसे छात्र के लिए एजुकेशन लोन लिया हो जिसके आप कानूनी अभिभावक हैं.

हालांकि, कर लाभ को देखते हुए उधार नहीं लेना चाहिए. अगर आप बिना उधार लिए चीजों के लिए भुगतान कर सकते हैं, तो आपको ऐसा ही करना चाहिए. बचत पर लाभ हासिल करने के लिए बहुत ज्यादा होशियारी की जरूरत होती है. इससे आप कर्ज चुकाकर भी फायदे में रहते हैं. मिसाल के तौर पर, मान लीजिए कि आपके पास एकमुश्त कुछ खरीदने के लिए पैसा है, लेकिन सोचें कि आप इसका आधा भुगतान करेंगे और बाकी उधार लेंगे क्योंकि ऐसा करने से आपकी बचत और निवेश से अधिक कमाई होगी. अब यह मान लें कि कर्ज पर ब्याज की लागत 10 फीसद है, ऐसे में अगर आपकी बचत या शेष राशि पर निवेश से आपको 10 फीसद से कम की आय होती है, तो आपने गलत फैसला किया है.

परिस्थितियों और जोखिम सहनशीलता के आधार पर कोई कर्ज लेना अच्छी वित्तीय रणनीति हो सकती है. आप उधार लेकर अपने वित्त का लाभ उठा सकते हैं, लेकिन आपके पास इसके लिए सलाहियत और उधार से जुड़े जोखिम उठाने की क्षमता होनी चाहिए. कई निवेशक उधार लेकर आगे निवेश करने के लिए अपनी होल्डिंग का लाभ उठाते हैं.

हालांकि यह जोखिम भरा कदम है, लेकिन निवेश के बदले उधार लेने का अनुशासन ओवरड्राफ्ट सुविधा का उपयोग करने जैसा है जिसका भुगतान समय पर किया जाता है. शेयरों के एवज कर्ज, संपत्ति के एवज कर्ज और बीमा के बदले कर्ज जैसी सुविधाएं ज्यादातर कठिन परिस्थितियों या कठिन वित्तीय परिस्थितियों में उधार लेने की रणनीति का हिस्सा हैं. वैसे, अनुभवी निवेशक उधार लेने के इन तरीकों को न केवल सस्ता पाते हैं, बल्कि इनसे बहुत फायदा भी उठाते हैं.

क्रेडिट का लाभ लेना

क्रेडिट आपको उन चीजों को खरीदने में मदद कर सकता है जिन्हें आप सामान्य परिस्थितियों में नहीं खरीद सकते. क्रेडिट स्कोर आने के साथ ही पहली बार और नियमित ऋण चाहने वालों के लिए उधार लेना मुश्किल हो गया है. यह तीन अंकों की संख्या आपकी साख को दर्शाती है, जिसका बुनियादी तौर पर यह मतलब है कि ऋणदाता आपकी कर्ज अदायगी की क्षमता से वाकिफ है. यह संख्या पिछले भुगतान इतिहास, क्रेडिट उपयोग, वर्षों में क्रेडिट उपयोग के मिश्रण और अन्य कारकों के अलावा हालिया क्रेडिट इतिहास जैसे कई कारकों को ध्यान में रखते हुए हासिल की जाती है.

जिनकी कोई क्रेडिट हिस्ट्री नहीं होती उनके लिए उधार लेना प्राय: मुश्किल हो सकता है. कुछ ऋणदाता पहली बार उधार लेने वालों को उनके उधार व्यवहार का आकलन करने की पेशकश करते हैं. कभी-कभी, उधार की दरें आधार दरों से अधिक हो सकती हैं क्योंकि ऋणदाता ऐसे लोगों को कर्ज देकर जोखिम उठा रहा है. शेट्टी कहते हैं, ''क्रेडिट कार्ड के अनियमित भुगतान की वजह से मेरे क्रेडिट स्कोर में गिरावट आई है और इस वजह से मैं अब बड़े बैंकों से आसानी से उधार नहीं ले पा रहा हूं.'' उसके ज्यादा ब्याज वाले पे-डे लोन की वजह उनका खराब क्रेडिट स्कोर भी है.

उधार लेने वाले व्यक्ति के रूप में आपको वक्त पर कर्ज अदायगी करनी चाहिए और साथ ही यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आपको अपने बकाया ऋण की राशि मालूम है. याद रखें, क्रेडिट में पैसा खर्च होता है और जब आप उधार लेते हैं तो आपको एक ऐसी ब्याज दर की तलाश करनी चाहिए जो यथासंभव कम हो और रिपेमेंट का स्ट्रक्चर लचीला हो. एक ओर जहां होम लोन, एजुकेशन लोन और क्रेडिट कार्ड पर ब्याज, सभी आरबीआइ की ओर से तय बिंदुओं पर आधारित हैं, बाकी सभी दूसरे कर्जों में समान कारकों के आधार पर भिन्नता हो सकती है. जो पहले दिख जाए उसे चुनने के  बजाए अच्छी ऋण दर को चुनने में ही भलाई है.

आसान क्रेडिट से सावधान रहें

कई कारक आसान क्रेडिट में मदद करते हैं. ऐसे में किसी भी व्यक्ति के लिए शेट्टी की तरह एक वेतन के बाद दूसरे वेतन के बीच कर्ज लेने के जाल में फंसने की संभावना रहती है. कई वजह से अच्छे क्रेडिट बुरी आदत में बदल जाते हैं. वक्त पर होम लोन की ईएमआइ भरने वाला व्यक्ति अक्सर एक टॉप-अप ऋण लेता है क्योंकि उसने ऋण की उचित राशि चुका दी है और अपने घर में कुछ नए काम करना चाहता है. यह खराब भुगतान करने वाले व्यवहार के निर्माण की दिशा में पहला कदम हो सकता है. मिसाल के तौर पर किसी के आर्थिक हालात उसके उधार लेने के समय से बदल सकते हैं और ऐसे में ऋण की अवधि बढ़ाकर वे अधिक जोखिम ले रहे हैं.

उधार लेने वाले फिर ऋण के बारे में समझ की कमी या चीजों को गलत तरीके से मानने की वजह से गलतियां करते हैं (देखें: कर्ज लेने में ये छह गलतियां न करें). शेट्टी याद करते हैं, ''मुझे लगा कि मेरे क्रेडिट कार्ड पर क्रेडिट सीमा वह पैसा था जिसे मैं खर्च करने का हकदार था.'' वे अपनी क्रेडिट सीमा को अधिकतम पर पहुंचाकर ईएमआइ चूकने की हद तक पहुंच गए. त्रिपाठी को लगता है कि ऐसे मौकों पर जब उनके पास खर्च से ज्यादा पैसा था तब उन्होंने अपने होम लोन का एकमुश्त भुगतान नहीं किया, जिससे उनके ब्याज का बोझ कम हो सकता था.

त्रिपाठी बताते हैं, ''मुझे प्रिंसिपल या मूलधन को एक लाख रुपए भी कम करने के महत्व का एहसास नहीं हुआ. जब मैं अधिक भुगतान कर सकता था तब भी मैंने ईएमआइ नहीं बढ़ाई.'' ये बड़ी गलतियां नहीं हैं, बल्कि खराब निर्णय हैं जो किसी के वित्तीय जीवन को प्रभावित करते हैं. कर्ज मुक्त होने का सबसे अच्छा तरीका है कि पुनर्भुगतान को स्वचालित किया जाए और अन्य ऋणों को निपटाने से पहले उच्च लागत वाले ऋणों से छुटकारा पाया जाए. अक्सर यह कहा जाता है कि अपने क्रेडिट कार्ड के बकाया का जल्द से जल्द भुगतान करें.

उच्च लागत वाले ऋण को लटकाकर आप न केवल अधिक भुगतान करने जा रहे हैं, बल्कि अपने क्रेडिट स्कोर को भी प्रभावित करने जा रहे हैं, जो वास्तव में आपको दीर्घकालिक ऋण की आवश्यकता होने पर परेशान कर सकता है. केवल उतना ही उधार लें जितनी आपको जरूरत हो और जब आपको इसकी जरूरत हो. अगर आप पुनर्भुगतान के कठिन दौर से गुजर रहे हैं तो अपने ऋणदाता से बात करें और कोई हल निकालें. आप परिवार और दोस्तों से भी उधार ले सकते हैं, बशर्ते यह आदत न बन जाए. ऐसी उधारी केवल आपात स्थिति के समय और स्पष्ट पुनर्भुगतान योजना के साथ होनी चाहिए. अपने वित्तीय लक्ष्यों को हासिल करने और उनका मजा लेने के लिए क्रेडिट के लाभों का आनंद लें.

ज्वाइंट लोन के ज्यादा फायदे

अगर आप और आपकी पत्नी, दोनों कमा रहे हैं तो घर खरीदते वक्त आप संयुक्त ऋण (ज्वाइंट होम लोन) लेने पर विचार कर सकते हैं. संयुक्त स्वामित्व पिता-पुत्र, पिता-पुत्री और अन्य संयोजनों के बीच भी हो सकता है जिन्हें स्वीकार किया जाता है. ऐसा करने से होम लोन के लिए आपकी योग्यता बढ़ जाती है और घर खरीदने के लिए आपका बजट भी बढ़ जाता है. याद रखें, सामूहिक रूप से लोन लेने के लिए, आपको उस घर का सह-स्वामी या को-ऑनर होना चाहिए जिसके लिए आप ऋण ले रहे हैं. आपके पास एक घर और ऋण में समान मालिक या आनुपातिक मालिक होने का विकल्प है.

खासकर जब होम लोन पर कर लाभ का क्लेम किया जाता है तब घर के आनुपातिक मालिकाना हक और उधार लेने की रणनीति के अपने फायदे हैं. आमतौर पर, होम लोन इस तरह से होते हैं कि शुरुआती वर्षों के दौरान आपकी ईएमआइ का एक बड़ा हिस्सा द्ब्रयाज भुगतान में चला जाता है और इसलिए, उन वर्षों के दौरान होम लोन का भुगतान धीरे-धीरे होता है. लिहाजा, यह मुमकिन है कि आपके भुगतान वाले होम लोन का ब्याज घटक धारा 24बी के तहत कर लाभ के लिए 2 लाख रुपए की सीमा से बहुत ज्यादा हो.

मिसाल के लिए 76 लाख रुपए का होम लोन 20 साल के लिए 7 फीसद द्ब्रयाज पर लें. अगर आपने यह घर संयुक्त रूप से खरीदा है और संयुक्त रूप से उधार भी लिया है, तो आप ईएमआइ को आनुपातिक रूप से विभाजित करके लाभ उठा सकते हैं, और प्रत्येक सह-उधारकर्ता का लाभ उठा सकते हैं जो आनुपातिक रूप से ब्याज भुगतान के लिए कर लाभ का क्लेम करते हैं. मिसाल के तौर पर, इस मामले में रिपेमेंट के पहले साल में, कुल ईएमआइ 7.07 लाख रुपए है, जिसमें ब्याज 5.26 लाख रुपए और मूलधन 1.8 लाख रुपए है.

अगर कर्ज सिर्फ एक ही व्यक्ति ने लिया है तो ब्याज चुकौती घटक के तहत अधिकतम कर कटौती का क्लेम किया जा सकता है जो 2 लाख रुपए होगा. लेकिन अगर ऋण संयुक्त रूप से लिया गया था, तो समान स्वामित्व वाले सह-मालिकों के बीच ब्याज घटक कर लाभ 4 लाख रुपए तक हो सकता है. ऊपर की मिसाल में ब्याज घटक जो प्रत्येक के लिए 2.63 लाख रुपए का भुगतान करता है और वे इस ऋण ईएमआइ पर व्यक्तिगत रूप से 2 लाख रुपए का दावा कर सकते हैं.

अगर स्वामित्व किसी अन्य अनुपात में है, तो भुगतान किया गया ब्याज संपत्ति में उनके हिस्से के अनुसार वितरित किया जाता है. अक्सर उधार लेने वाले जिस आयकर स्लैब में वे आते हैं, वे उसी के मुताबिक आनुपातिक स्वामित्व का निर्णय लेते हैं ताकि अधिकतम टैक्स ब्रैकेट में से एक अधिकतम कर बचत का क्लेम कर सकें. होम लोन के लिए सह-स्वामित्व और एक साथ उधार लेते समय, उन कर लाभों का पता लगाने की कोशिश करें जिनका आप सामूहिक रूप से क्लेम कर सकते हैं और इसका अधिकतम लाभ उठा सकते हैं.

कर्ज लेने में ये छह गलतियां न करें

भूल करने में कुछ भी गलत नहीं है. लेकिन अगर आप एक ही गलती बार-बार करते रहते हैं तो यह समस्या बन जाती है. कर्ज लेने की इन सामान्य गलतियों से सीखकर मुसीबत को रोका जा सकता है और उधार लेने का बेहतर तरीका दिखाया जा सकता है

1 सभी ऋण समान हैं सभी ऋणों के साथ एकमात्र सामान्य बात पुनर्भुगतान है यानी ईएमआइ. आपके लिए गए ऋण के आधार पर ऋण के नियम अलग-अलग होते हैं. आप सामान्यत: होम लोन, कार लोन, स्टूडेंट लोन, पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड बकाया के रूप में ऋण लेते हैं. लोन संपत्ति निर्माण के लिए हो सकते हैं जैसे कि जब आप रहने के लिए घर के लिए उधार लेते हैं या उस शिक्षा के लिए कर्ज लेते हैं जिससे आपको नौकरी मिल जाएगी. कर्ज पर ब्याज दर उसके प्रकार—सुरक्षित या असुरक्षित—के आधार पर अलग-अलग होती है. यह तय कर लें कि आप समझ-बूझकर कर्ज ले रहे हैं और यह कैसे काम करता है तथा आपकी कर्ज अदायगी को कैसे प्रभावित करता है.

2 उधार उतना ही लें जितना आप चुका सकते हैं जब बहुत सारी परस्पर विरोधी जरूरतें—कार, घर, छुट्टियां, फोन अपग्रेड इत्यादि—हों तो आसानी से उपलब्ध कर्ज की वजह से जरूरी से लेकर गैर-जरूरी तक, हर चीज के लिए पैसे उधार लेने के जाल में फंसना आसान है. घर का बजट बनाइए; जानिए पैसा कहां से आ रहा है और कहां जा रहा है. अपने खर्चों पर नियंत्रण रखें; गैर-जरूरी चीजों में कटौती करें और अपने साधनों के भीतर रहना सीखें और इस पर नियंत्रण रखें कि आप अपनी आय से ऋण चुकाने के लिए कितना पैसा देते हैं.

3 छिपी लागत व शुल्क की अनदेखी लोग सबसे बड़ी वित्तीय गलती यह करते हैं कि वे छोटी-छोटी बातों को अहमियत नहीं देते. अंत में हजारों रुपए की ऐसी फीस या पेनल्टी का भुगतान करते हैं जिसे आसानी से टाला जा सकता था. सबसे आम गलतियों में से एक है अपने क्रेडिट कार्ड पर भुगतान में देरी करना. आप एक और ऋण चुकाने के लिए एक संपत्ति के एवज उधार लेते हैं. जब भी उधार लें तो बारीक बातें ध्यान से पढ़ लें. विशेष रूप से लेट फीस, फीस और पेनल्टी से जुड़े नियमों और शर्तों को जानें. यह सुनिश्चित करने के लिए एक रिमाइंडर सेट करें कि आप ऋण ईएमआइ या क्रेडिट कार्ड भुगतान में देरी करने की गलती नहीं करते हैं. ऋणों पर पूर्व-दंड क्लॉज की जांच करें ताकि आप ऋण को जल्दी बंद करने के लिए अधिक भुगतान न करें.

4 हड़बड़ी में खरीदारी नहीं करना कभी भी पर्याप्त शोध किए बिना किसी भी वित्तीय संस्थान से पैसे उधार लेने में जल्दबाजी न करें. ऋणों की तुलना करने और सर्वोत्तम दरों और शर्तों की जांच करने के लिए डिजिटल ऐप्स और संसाधनों की अधिकता को देखते हुए, आपको कर्ज लेने से पहले सोचना चाहिए. सुविधा के कारण उधार न लें; आपको मिलने वाली बेस्ट डील के आधार पर ही उधार लें. अपने क्रेडिट कार्ड बकाया को ईएमआइ में बदलना आसान है, लेकिन बकाया को नए कार्ड में ट्रांसफर करना सस्ता हो सकता है.

5 अपने क्रेडिट स्कोर को नजरअंदाज करना अच्छा क्रेडिट स्कोर आपको ब्याज दरों में बहुत सारा पैसा बचाने में मदद कर सकता है. आपका क्रेडिट स्कोर जितना बेहतर होगा, घर खरीदने जैसी चीजों के लिए ज्यादा लोन राशि और यहां तक कि बेहतर ब्याज दर हासिल करना उतना ही सरल होगा. साल में एक बार क्रेडिट स्कोर को जांच लें और रिपोर्ट में पाई गई खामी को सुधार लें. पुराने अनसुलझे ऋणों को नजरअंदाज न करें, भले ही वे छोटी रकम लगें.

6 कम भुगतान करना न्यूनतम क्रेडिट कार्ड बकाया या वास्तविक ईएमआइ से कम भुगतान स्मार्ट कदम लग सकता है. लेकिन इस तरह के काम न केवल आपके क्रेडिट स्कोर को प्रभावित करते हैं, बल्कि लंबे समय में आप ज्यादा खर्च भी करते हैं. अपने क्रेडिट कार्ड पर देय न्यूनतम राशि का भुगतान करके, आप अपने ऋण पर ब्याज घटक को नाटकीय रूप से बढ़ाते हैं. देय राशि से कम का भुगतान करके, आप चुकाने में असमर्थता के संकेतों को इंगित करते हैं, जिसका उपयोग उधारकर्ता आपके खिलाफ उस कोलैटरल का दावा करने के लिए कर सकता है जिसके एवज आपने उधार लिया था. अपने ऋणों को चुकाने के लिए स्पष्ट समयरेखा की योजना बनाएं और इसे पहले भुगतान करने की दिशा में काम करें

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