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सफर भविष्य की रेलगाड़ी का

नए रेल मंत्री ने रेलवे स्टाफ और यूनियनों के बीच झंझट-झमेलों को सुलझाया और पटरी पर सुरक्षित तेज रफ्तार ट्रेनों का सफर आसान बनाया.

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अश्विनी वैष्णव, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, रेल मंत्री

3 साल मोदी सरकार 2.0
अश्विनी वैष्णव, रेल मंत्री

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल जुलाई में जब अश्विनी वैष्णव को रेलवे, दूरसंचार और आइटी मंत्री के लिए चुना तो कइयों को हैरानी हुई. प्रधानमंत्री की टीम में हमेशा पर्दे के पीछे रहकर काम करने वाले वैष्णव को इन अहम मंत्रालयों में सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए लाया गया. बातचीत में विनम्र रहने वाले वैष्णव ओडिशा काडर के पूर्व नौकरशाह हैं.

उन्होंने व्हार्टन में मैनेजमेंट का कोर्स पूरा करने के लिए नौकरी छोड़ दी. बाद में जीई और सीमेंस में काम किया और फिर 2014 में अपना वेंचर शुरू किया. रेल मंत्रालय में वैष्णव अपने कौशल के जरिए विभिन्न यूनियनों और रेल प्रशासन के बीच रिश्ते सुधारने, इंजन, कोच और दूसरे जरूरी सामान वगैरह की मैन्युफैक्चरिंग की क्षमता बढ़ाने, स्वदेशी सिग्नल नेटवर्क और इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास की कोशिश में जुटे हैं, ताकि रेलवे को देश के नए कोनों तक ले जाया जा सके.

रेल मंत्रालय में उन्होंने यात्री ट्रेनों को चलाने के लिए निजी निवेश लाने और रेलवे मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों के कॉर्पोरेटीकरण के पहले नाकाम हुए प्रयासों के सूत्र को पकड़ा है. इस मामले में अफसरों और यूनियनों के बीच आपसी भरोसे की भी कमी थी. अफसरों को रेलवे बोर्ड पर बंदिशों और रेलवे काडर के विलय को लेकर चिंताएं थीं, जिससे उनकी वरिष्ठता पर असर पड़ता. यूनियनों को आशंका थी कि रेलवे निजीकरण की ओर बढ़ रही है और इससे नौकरी की सुरक्षा पर असर पड़ेगा. 

वैष्णव ने पहला काम निजीकरण की अफवाहों को खत्म करने का काम किया. उनका कोई पूर्ववर्ती रेलवे में नियामकों को लाने में कामयाब नहीं हो पाए थे, जो खासकर ट्रेनों के संचालन में निजी निवेश के लिए बड़ी अड़चन बनी हुई थी. वे भी इस सुधार को फौरन शुरू करने की हालत में नहीं थे.

उन्होंने किया यह कि स्वदेश में विकसित कवच नामक ऑटोमेटिक ट्रेन सुरक्षा (एटीपी) व्यवस्था का काम तेज कर दिया. उन्होंने ऐसी व्यवस्था यूरोपीय कंपनियों से आयात करने की योजनाएं खत्म कर दी. पिछले छह महीने में कवच नई दिल्ली-हावड़ा और नई दिल्ली-मुंबई क्षेत्र में इसे शुरू किया और मार्च 2024 तक काम पूरा करने का लक्ष्य रखा.

तीसरे, उन्होंने यह वादा करके यूनियनों का भरोसा जीता कि निजी पूंजी सिर्फ क्षमता विकास में आएगा और इकाइयों का निजीकरण नहीं किया जाएगा. इसके अलावा नए पीपीपी मॉडल तैयार करने में उनकी टेक्नोलॉजी की समझ और कॉर्पोरेट नौकरियों के दौरान हासिल कौशल उनके काम 

आया, जिसके तहत मैन्युफैक्चरिंग की मौजूदा इकाइयों को अपग्रेड करने के लिए निवेशकों को आमंत्रित किया गया और उन्हें इन इकाइयों में काम करने के लिए रेलवे के मौजूदा स्टाफ को प्रतिनियुक्ति में लेने की इजाजत दी गई.

मकसद भविष्य की टेक्नोलॉजी के लिए उनके हुनर में इजाफा करना है. इस मॉडल से कॉर्पोरेट का पूंजी खर्च भी कम हो गया है. रेलवे माल ढुलाई के खातिर 800 हाइएंड इलेक्ट्रिक 12,000 हॉर्सपावर के इंजन और मौजूदा फैक्ट्रियों में आधुनिक एलएचबी (लिंक हॉफमैन बुश) कोच बनाने के लिए साझेदारों के चयन की प्रक्रिया पहले ही शुरू कर चुकी है.

वैष्णव की सबसे बड़ी परीक्षा अगले तीन साल में मौजूदा पटरियों पर ही 400 स्वदेशी डिजाइन की सेमी-हाइस्पीड वंदे भारत ट्रेनें चलाने के सपने को साकार करने के रूप में होगी. वे कहते हैं कि प्रोटोटाइप अगस्त तक तैयार हो जाएंगे और उनके ट्रायल के आधार पर अगले 45 दिनों में व्यावसायिक उत्पादन शुरू होगा. उनका मध्यम अवधि का लक्ष्य अगले साल स्वतंत्रता दिवस तक इन ट्रेनों को 75 रूटों पर चलाने का है.

ट्रेन कोचों के साथ जुड़ा सेल्फ-प्रोपेल्ड इंजन के साथ एक इकाई है और यह राजधानी और शताब्दी जैसी प्रीमियम ट्रेनों की तरह आरामदेह सफर तय कराएगी. इस दिवाली तक रेलवे को उम्मीद है कि हर महीन 4-5 ट्रेनें मिलने लगेंगी. ये अहमदाबाद, दिल्ली, लखनऊ, भोपाल, गुवाहाटी, कोलकाता, तिरुपति, पुणे, चेन्नै जैसे रूटों पर चलाई जाएंगी. फिलहाल वंदे भारत ट्रेनें दिल्ली-कटरा और दिल्ली-लखनऊ जैसे रूट पर चलती हैं. ठ्ठ

क्या-क्या किया

दूसरी जेनेरेशन की ट्रेनें पटरी पर उतरने वाली हैं, ये ट्रेनें 220 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दोड़ेंगी, जबकि मोजूदा ट्रेनों की रफ्तार 160 किमी प्रति घंटा है
12,000 हॉर्सपावर के इंजन और आधुनिक कोच की मैन्युफैक्चरिंग के लिए पीपीपी साझेदारों के चयन की प्रक्रिया शुरू हो गई है
स्वदेश में विकसित और डिजाइन की गई ऑटोमेटिक ट्रेन सुरक्षा (एटीपी) व्यवस्था कवच को नई दिल्ली-हावड़ा और नई दिल्ली-मुंबई रूटों पर स्थापित कर दिया गया है

आगे की चुनौतियां

400 वंदे भारत ट्रेनें की मैन्युफैक्चरिंग, अगले साल 15 अगस्त तक नई ट्रेनें 75 रूटों पर चलाना चाहते हैं
आधुनिक इंजन, कोच और दूसरे सामान की मैन्युफैक्चरिंग की खातिर रेलवे के साथ निजी पूंजी के लिए रास्ता खोलने का पीपीपी का नया मॉडल बनाया गया है
रेलवे बोर्ड में निर्णय की प्रक्रिया में ढांचागत सुधारों को जारी रखने के लिए वैष्णव को यूनियनों का भरोसा हासिल है 
 यह भरोसा बनाए रखना सभी सुधारों के लिए अहम होगा.

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