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‘‘हमारे लिए सब कुछ अनजाना जैसा है, हमें साफगोई चाहिए’’

सना अपने उपक्रम को चला रही हैं, वहीं उन्हें इस समूह के फार्म2यू की सीईओ नियुक्त कर दिया गया है.

सना मसूद सना मसूद

‘‘हमारे लिए सब कुछ अनजाना जैसा है, हमें साफगोई चाहिए’’
सना मसूद, 38 वर्ष 
सीईओ, फार्म 2यू, श्रीनगर

जब कश्मीरी लोग किसी को शाप देते हैं तो कहते हैं ‘‘पाए त्राएत’’ (तुम पर बिजली गिरे). श्रीनगर में रहने वाली 38 वर्षीय उद्यमी सना मसूद को लगता है कि खुदा उनसे नाराज है क्योंकि पिछले एक दशक के दौरान उन्होंने जिस काम में हाथ लगाया, वह सब फंस गया. वादी में 2014 में आई भीषण बाढ़ में उनका घर बह गया और उन्हें वे कपड़े पहनने पड़े, जिन्हें किसी ने चेन्नै में दान दिया था.

यह बताते हुए उनका गला रुंध जाता है कि कैसे वे दूसरों को दिया करती थीं और उन्हें मदद लेने के लिए अपने फख्र को कैसे गले के नीचे उतारना पड़ा, लेकिन वे इसके लिए शुक्रगुजार हैं. उस बाढ़ ने उनके पहले बड़े कृषि उद्यम को भी धो डाला, जिसकी वजह से वे भारी कर्ज में दब गईं.

उनका अगला उद्यम भी दुर्घटना की भेंट चढ़ गया. उन्होंने श्रीनगर के निवेशक खुर्रम मीर के साथ मिलकर कश्मीर में अधिक घनत्व वाले सेब के बाग की शुरुआत की थी. उन्होंने इस तरह के दो बाग लगाए थे, लेकिन जब काम शुरू ही हुआ था कि जुलाई 2016 में बुरहान वानी की हत्या पर हिंसा भड़क उठी. एक बाग शोपियां के बाग में था, जहां हिज्बुल मुजाहिदीन का कमांडर मारा गया था. वहां भीड़ ने हमला बोल दिया और सेब के 7,000 पौधों को जला डाला. सना मायूस हो गईं लेकिन अपने इरादे से नहीं डिगीं.

मीर के साथ मिलकर उन्होंने अपना कारोबार दोबारा खड़ा किया और आज अधिक घनत्व वाले बागों के सबसे बड़े ठेकेदार एचएन एग्रीसर्विस की सहयोगी कंपनी रूट2फ्रूट में 2,000 से ज्यादा किसान जुड़े हुए हैं. सना अपने उपक्रम को चला रही हैं, वहीं उन्हें इस समूह के फार्म2यू की सीईओ नियुक्त कर दिया गया है. फार्म2यू के पास कश्मीर कोल्ड स्टोरेज का सबसे बड़ा नेटवर्क है, जिसकी कुल क्षमता 25,000 टन है.

इसका कंपनी का मकसद दुनिया के छठे सबसे बड़े सेब उत्पादक कश्मीर को इस फल का सबसे बड़ा निर्यातक बनाना है, साथ ही देश की मांग को भी पूरा करना है. पर्यटन के बाद सेब के बाग कश्मीर की अर्थव्यवस्था का रीढ़ बन गए हैं. यह हर साल करीब 9,000 करोड़ रुपए के 20 लाख टन से ज्यादा सेब पैदा करता है, जो देश के कुल उत्पादन का 80 फीसद है.

सना को भरोसा है कि अधिक घनत्व वाले बागों के तेजी से बढ़ने और उनमें पारंपरिक पेड़ों के मुकाबले पांच गुना ज्यादा फल लगने की वजह से कश्मीर में सेब की पैदावार अगले एक दशक में 60 लाख टन से ज्यादा हो जाएगी.

फिलहाल भारत 30 करोड़ डॉलर (2,200 करोड़ रुपए) के 3 लाख टन सेब मुख्त: अमेरिका और चीन से आयात किया जाता है और महज 75 करोड़ रुपए का 20,000 टन सेब निर्यात किया जाता है. सना का कहना है, ‘‘सेबों की बेहतर क्वालिटी और पैदावार भारत न केवल अपनी घरेलू मांग को पूरा कर सकता है बल्कि बड़ा निर्यातक भी बन सकता है.’’ 

सना मानती हैं कि पिछले कुछ साल के दौरान राजनैतिक उथल-पुथल और कोविड महामारी से उनके कारोबार पर काफी असर पड़ा है और हालात मुश्किल हुए हैं. उन्होंने दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया से बॉयोटेक्नोलॉजी और एमबीए की डिग्री ले रखी है. सना को इस बात का मलाल है कि उनके कश्मीरी मुसलमान कर्मचारियों के साथ दिल्ली में भेदभाव बरता जाता है, उन्हें कमरा नहीं दिया जाता.

वे पूछती हैं, ‘‘हम इस मुल्क के लोग नहीं हैं? यहां तक कि होटल का कमरा लेने के लिए कभी-कभी मुझे भी कहना पड़ता है कि मैं दिल्ली की रहने वाली हूं, कश्मीर की नहीं.’’ वे कहती हैं कि वादी में अस्थिर हालात ने खौफ और असुरक्षा का गहरा भाव पैदा कर दिया है. 
सना के वालिद मशहूर पेंटर हैं लेकिन वे उन्हें अक्सर सतर्क करती हैं कि इतना खुलकर नहीं बोलें.

वे कहती हैं, ''हम सब में यह भावना घर कर गई है कि आगे पता नहीं क्या होने वाला है और हम हमेशा चौकन्ना रहते हैं. लोगों में अमूमन एक अनजाना डर बसा हुआ है. हमारे लिए सब कुछ अनजाना है. हमें साफगोई चाहिए और सबसे बढ़कर, हमारे प्रति सक्वमान दिखाने की जरूरत है.’’ यकीनन, उनकी इस गुजारिश पर हर भारतीय और सरकार को गौर करना चाहिए और वैसा ही व्यवहार करना चाहिए. तभी वादी का माहौल बदलने में मदद मिलेगी.

20 लाख टन
सेब की सालाना पैदावार फिलहाल कश्मीर में है.

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