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फर्जी खबरें राष्ट्रीय प्लेग की तरह

फर्जी खबरें राष्ट्रीय प्लेग की तरह होती हैं. यह मुझे जल्दी ही समझ में आ गया, इसके लिए जल्दी ही कुछ करना होगा नहीं तो स्थिति बेहद खराब हो जाएगी.

फर्जी खबरें राष्ट्रीय प्लेग की तरह होती हैं. यह मुझे जल्दी ही समझ में आ गया, इसके लिए जल्दी ही कुछ क फर्जी खबरें राष्ट्रीय प्लेग की तरह होती हैं. यह मुझे जल्दी ही समझ में आ गया, इसके लिए जल्दी ही कुछ क

पंकज जैन, 40 वर्ष

कंप्यूटर इंजीनियर से उद्यमी 

वेबसाइट चलाते हैंः SMHoaxSlayer.com

शुरुआतः 2015

दफ्तरः मुंबई में 

मैं फर्जी खबरों का भंडाफोड़ करने वाले क्यों बने

यह 2015 की बात है. मैं देखता था कि मेरे दोस्त या रिश्तेदार व्हाट्सऐप ग्रुप पर काफी फर्जी सूचनाएं भेज रहे हैं. ऐसी जानकारियों को लोग फॉरवर्ड करते रहते हैं कि नासा ने दीवाली की रात की भारत की आसमान से ली गई तस्वीरें जारी की हैं, या यूनेस्को ने जन गण मन को दुनिया का सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रगान घोषित किया है. ग्रुप में लोग ऐसी सूचनाओं पर भरोसा भी कर लेते हैं. मुझे समझ में आ गया कि यह तो राष्ट्रीय प्लेग जैसा है और इसके लिए कुछ तो करना होगा. इसलिए मैंने एक फेसबुक पेज शुरू किया, जो बाद में SMHoaxSlayer.com नाम से वेबसाइट में बदल गया.

अभी तक मैंने जिन सबसे बड़ी फर्जी खबरों का भंडाफोड़ किया 

वह एक वायरल मैसेज था जिसमें यह दावा किया गया था कि बाहुबली 2 के प्रोड्यूसर और लीड ऐक्टर ने अपनी एक दिन की कमाई-115 करोड़ रुपए-शहीदों के परिजनों को दान करने का निर्णय किया है. सितंबर 2016 में जब उड़ी में सेना के ठिकाने पर सीमा पार से आए आतंकियों ने हमला किया, तो दो बंधकों के सिर काटते एक आदमी का वीडियो वायरल हुआ, इसमें दावा किया गया कि जिन दो लोगों का सिर काटा गया है, वे पाकिस्तानी सेना द्वारा पकड़े गए भारतीय सैनिक हैं. मैंने काफी खोजबीन की और आखिर पता लगा लिया कि वीडियो स्पेन से जारी हुआ है.

सच जानने के मेरे साधन

सबसे बुनियादी चीज होती है कॉमन सेंस. हमें खुले दिमाग से सूचना के हर हिस्से पर सवाल उठाना चाहिए. मैं जिन साधनों का इस्तेमाल करता हूं, उनमें गूगल रिवर्स इमेज सर्च भी शामिल है, जो कि यह बताता है कि कोई फोटोग्राफ  पहले कहां और कब पोस्ट किया गया है, हम अपने कीवर्ड बनाते हैं और उन्हें गूगल, फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सर्च करते हैं. इसमें समय लगता है और नतीजों के पहले सेट से आगे तक जाना होता है. मैं अकेले काम करता हूं, पर रिसर्च में तमाम लोग मदद करते हैं. मैं इसे सच की तलाश के लिए करता हूं, कारोबार के लिए नहीं. मुझे पिछले साल कई धमकियां मिलीं, हालांकि वे गंभीर नहीं थीं. एक ने तो वेबसाइट को हैक करने की भी कोशिश की.

कैसे पकड़ें फर्जी खबरें 

कॉमन सेंस का इस्तेमाल करें, जैसे नेशनल मीडिया हाउस मुंबई-पुणे हाइवे पर ओलावृष्टि होने के झांसे में आ गया, जबकि घटना इस्तांबुल की थी. वीडियो में काफी प्रमाण थे. भारत के उलट इसमें गाडिय़ों की स्टीयरिंग व्हील बाएं और उनकी नंबर प्लेट भी अलग अंदाज में थी. हमेशा जानकारी भेजने वाले से समाचार के विश्वसनीय स्रोत के बारे में पूछें. 

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