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पंजाब की जेल में मिली थीं वीवीआइपी सुविधाएं 

रोपड़ जेल में मुख्तार अंसारी की पत्नी नियम-कायदों को धता बताते हुए उससे मिलने जातीं और घंटों साथ रहतीं

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कसता शिकंजा: माफिया मुख्तार को मोहाली कोर्ट में पेश करने के लिए ले जाते पुलिसकर्मी
कसता शिकंजा: माफिया मुख्तार को मोहाली कोर्ट में पेश करने के लिए ले जाते पुलिसकर्मी

जून, 2022. पंजाब के जेल मंत्री  हरजोत सिंह बैंस विधानसभा में बजट सत्र के दौरान बोल रहे थे. बीच बहस में उन्होंने मुख्तार अंसारी का मुद्दा छेड़ दिया. बैंस ने कहा, ''गैंगस्टर मुख्तार अंसारी पर मोहाली में एक जाली एफआइआर दर्ज करके पंजाब की जेल में रखा गया. उत्तर प्रदेश में उस गैंगस्टर पर 10 मुकदमे थे. उत्तर प्रदेश सरकार ने पंजाब सरकार से 26 बार प्रोडक्शन वारंट पर उसे उत्तर प्रदेश ले जाने की इजाजत मांगी लेकिन पंजाब सरकार ने इजाजत नहीं दी. उसे जेल में वीवीआइपी सुविधाएं दी गई थीं. रोपड़ जेल की जिस बैरक में 25 कैदियों के रहने की जगह थी, वो बैरक अकेले मुख्तार के हवाले कर दी गई.''

हरजोत सिंह इस बयान के जरिए विपक्षी कांग्रेस को भी निशाने पर ले रहे थे, क्योंकि तब राज्य में उसी की सरकार थी. बैंस ने बताया कि  उनके निर्देश के बाद इस मामले में एफआइआर दर्ज की गई है.   

राजनैतिक खींचतान से इतर पुलिस की अब तक की जांच भी मुख्तार को लेकर रोपड़ जेल प्रशासन की भूमिका पर सवालिया निशान खड़ा करती है. पंजाब सरकार की इस जांच से पता चला है कि रोपड़ जेल की बैरक नंबर-1 मुख्तार के आपराधिक साम्राज्य का अस्थाई हेडक्वार्टर था. इस बैरक में मुख्तार को तमाम सुविधाएं उपलब्ध थीं. उसे मोहाली में फिरौती के एक मामले में 24 जनवरी, 2019 को पेशी के लिए पंजाब लाया गया था. पेशी के बाद मुख्तार को रोपड़ जेल में शिफ्ट कर दिया गया. यहां वह दो साल तीन महीने तक रहा. इस दौरान उसका पूरा परिवार रोपड़ में ही एक किराए के मकान में रह रहा था. 

जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक मुख्तार की बैरक में सिर्फ उसके परिवार के लोग जा सकते थे. जेल के स्टाफ को भी बैरक में जाने की इजाजत नहीं थी. हर दिन उससे मिलने के लिए बुरका पहने एक महिला जेल में जाती थी और घंटों बैरक के भीतर रहा करती थी. जांच से जुड़े सूत्र बताते हैं कि यह महिला और कोई नहीं मुख्तार की बेगम थीं. जेल में उनके आने-जाने के दौरान सीसीटीवी कैमरा बंद रहा करते थे. ऐसा नहीं था कि उस समय हो रही अनियमितताओं पर किसी की नजर नहीं गई थी.

18 दिसंबर, 2019 को रोपड़ की सेशन जज हरप्रीत कौर ने जेल का औचक निरीक्षण किया. वे जब बैरक नंबर-1 के सामने पहुंचीं तो उन्होंने बैरक को अंदर से बंद पाया. उन्होंने मौके पर मौजूद जेल उप-अधीक्षक जगजीत सिंह से इसका सबब पूछा. जवाब मिला कि बैरक में कुछ निर्माण कार्य चल रहा है इसलिए दरवाजा नहीं खोला जा सकता. हरप्रीत कौर ने पूरे वाकये को अपनी रिपोर्ट में दर्ज किया. जांच से जुड़े सूत्र बताते हैं कि उस समय मुख्तार अंसारी की पत्नी जेल में मौजूद थीं और इसके चलते बैरक का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया गया था. सेशन जज हरप्रीत कौर ने बाद में इस मामले में एक विभागीय जांच के भी आदेश दिए थे. हालांकि जांच के बाद जेल विभाग ने सभी आरोपी जेल अधिकारियों को क्लीन चिट दे दी थी.

मुख्तार जिस तरह जेल को अपनी आरामगाह बनाए हुए था, वह सरकारी तंत्र की मिलीभगत के बिना संभव नहीं था. पंजाब सरकार की इस जांच में यह बात भी सामने आई है कि मुख्तार अंसारी की तरफ से जेल में सुविधाएं अदा कराने के लिए पूरे जेल और उससे जुड़े प्रशासन और पुलिस तंत्र को सुविधा शुल्क पहुंचाया जाता था.  

जांच से जुड़े सूत्र बताते हैं कि मुख्तार दिल्ली में बैठे एक राजनेता के जरिए सूबे के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह से संपर्क साधने में कामयाब रहा था.  

रोपड़ जेल में सवा दो साल रहने के दौरान मुख्तार को महज एक बार पेशी के लिए मोहाली ले जाया गया. पेशी पर ले जाने के लिए एक खास एम्बुलेंस का इस्तेमाल किया गया जिसे मुख्तार के परिवार की तरफ से मुहैया करवाया गया था. बाद की जांच में पाया गया कि यह एम्बुलेंस फर्जी नाम पर रजिस्टर करवाई गई थी. इस एम्बुलेंस को उत्तर प्रदेश में रजिस्टर करवाया गया था लिहाजा पंजाब पुलिस ने इसके खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया. फिलहाल मामले की जांच जारी है. पंजाब पुलिस के एक आला अधिकारी के अलावा स्पेशल डीजी जेल भी इस मामले की जांच कर रहे हैं. पंजाब सरकार के जेल मंत्री हरजोत सिंह का दावा है कि जांच में आगे और भी चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं.

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