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आवरण कथाः देश का मिजाजः अर्थव्यवस्था बड़ी दुखती रग

रोजगार-नौकरियों की भारी किल्लत और आसमान छूती कीमतों से लोगों के माथे पर गहरी लकीरें उभरीं, मगर देश को आर्थिक तंगहाली से बाहर निकालने के लिए अभी भी मोदी पर भरोसा

पीएम नरेंद्र मोदी संसद के मानसून सत्र के पहले दिन 19 जुलाई को मीडिया को संबोधित करते हैं पीएम नरेंद्र मोदी संसद के मानसून सत्र के पहले दिन 19 जुलाई को मीडिया को संबोधित करते हैं

इस मुश्किल समय में ओलंपिक में भारत को एथलेटिक्स में पहला स्वर्ण पदक दिलाने वाले नीरज चोपड़ा इस बात की मिसाल हैं कि कैसे कठिनाइयों पर विजय हासिल करके चैंपियन बना जा सकता है. चाहे वह उनकी कोहनी की चोट हो या फिर तोक्यो खेलों का स्थगित होना, जितनी मुश्किलें आती गईं, भाला फेंकने वाले इस एथलीट में जीत की जिद उतनी ही बढ़ती गई. उन्होंने कठिन परिश्रम किया, प्रशिक्षण लिया और इतिहास रचा. ऐसा करते हुए, चोपड़ा ने कड़ी मेहनत, आत्म-विश्वास, उत्कृष्टता की भूख, इसे प्राप्त करने की योजना, फौलादी दृढ़ संकल्प और गंभीर विफलताओं से निबटने का आत्मविश्वास जैसे उत्कृष्ट नेतृत्व गुणों का परिचय दिया. कोविड महामारी के प्रकोप, विशेष रूप से दूसरी लहर जिसने लोगों के जीवन और आजीविका दोनों को तबाह कर दिया, के बीच हमें सामूहिक रूप से जिस चीज की जरूरत है वह है लोगों का खोया आत्मविश्वास वापस लौटाना. जैसा कि थियोडोर रूजवेल्ट ने कहा था, ''आप अगर यह मान लें कि इसे आप ही कर सकते हैं तो समझिए आपने आधा काम कर लिया है.''

यह एक बड़ा संदेश है जो इंडिया टुडे-कार्वी के ताजातरीन देश का मिजाज (एमओटीएन) सर्वेक्षण के निष्कर्षों से झलकता है. सर्वे ऐसे समय में किया गया है जब भारत, दूसरे तमाम देशों की तरह खुद को एक द्वंद्व भरे दोराहे पर खड़ा पाता है. साल में दो बार होने वाला यह सर्वेक्षण विभिन्न राजनीतिक धाराओं से आने वाले नेताओं के लिए एक कड़ी चेतावनी के रूप में काम कर सकता है कि वे अपने आपसी मतभेदों को दूर करें और देश को उस दलदल से बाहर निकालने की दिशा में साथ मिलकर कड़ी मेहनत करें. देश जिन बड़े संकटों का सामना कर रहा है और उनसे उबरने के लिए जो काम करने चाहिए, उसको लेकर लोग क्या सोच रहे हैं, इसकी थाह सर्वे के परिणामों से मिल सकती है. यहां सभी के लिए कुछ न कुछ सबक है.

आज लोकसभा चुनाव हुए तो संभावित नतीजे
आज लोकसभा चुनाव हुए तो संभावित नतीजे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके कैबिनेट सहयोगियों के लिए, देश का मिजाज सर्वेक्षण में एक स्पष्ट संकेत है—भले वे अब भी मोदी सरकार को देश के सामने आने वाली परेशानियों को हल करने में सबसे सक्षम व्यक्ति के रूप में देखते हों, लेकिन उत्तरदाता पिछले छह महीनों में केंद्र के प्रदर्शन से नाखुश हैं. यदि अभी चुनाव होता है तो सर्वे के अनुमान के मुताबिक, एनडीए स्पष्ट बहुमत के साथ वापसी करेगा, लेकिन उसकी सीटों की संख्या कम हो जाएगी. 2019 के आम चुनाव में जीती गई 353 सीटों से घटकर वे अब 298 रह सकती हैं यानी 55 सीटों का नुकसान संभावित है. भाजपा के लिए व्यक्तिगत रूप से भी चिंता की कुछ बातें नजर आती हैं. सर्वे का अनुमान है कि 2019 में भाजपा की जीती गई 303 सीटें घटकर 269 रह सकती हैं जो साधारण बहुमत से तीन कम है. यानी उसे अपने गठबंधन सहयोगियों पर अधिक आश्रित होना पड़ सकता है.

लोगों का मूड कैसा
लोगों का मूड कैसा

प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता रेटिंग में भी भारी गिरावट आई है. जनवरी 2021 में प्रधानमंत्री के रूप में उनके प्रदर्शन को 'अच्छा' और 'उत्कृष्ट' बताते हुए 74 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने उनके पक्ष में जोरदार समर्थन जताया था. यह संख्या अब घटकर 54 प्रतिशत हो गई है. फिर भी कहा जा सकता है कि बहुमत अभी भी देश को सही दिशा में ले जाने के लिए प्रधानमंत्री की क्षमता में विश्वास रखता है. टीम मोदी के लिए यह भी खुशी की बात होनी चाहिए कि सीटों में गिरावट उतनी तेज नहीं है, जितनी गिरावट का अनुमान कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के दूसरे कार्यकाल के तीसरे वर्ष की शुरुआत यानी 2011 में लगाया गया था. इंडिया टुडे के अगस्त 2011 के देश का मिजाज सर्वे ने यूपीए के लिए 72 सीटों का नुकसान दिखाया था और इसकी सीटें 259 से घटकर 187 होने का अनुमान था. इस आधार पर यह निष्कर्ष लगाया गया था कि उस वर्ष अगर आम चुनाव होते तो यूपीए के हाथ से सत्ता फिसल सकती थी.

लोगों का मूड कैसा
लोगों का मूड कैसा

मोदी और एनडीए को मौजूदा सर्वे से उभरती चेतावनियों पर ध्यान देने की जरूरत है, अगर वे उसी तरह की हार से बचना चाहते हैं जो 2014 में यूपीए को अपने दूसरे कार्यकाल के अंत में मिली थी. कथित घोटालों की बाढ़ और भ्रष्टाचार के आरोपों के अलावा आर्थिक मंदी ने मनमोहन सिंह सरकार को सातवें साल में बहुत परेशान कर दिया था. मोदी सरकार के मामले में, कोविड की दूसरी लहर ने राष्ट्र और अर्थव्यवस्था की सेहत को एक विनाशकारी झटका दिया है और इसका असर सर्वे के निष्कर्ष में दिखता है. जहां जनवरी 2021 में 73 प्रतिशत की उच्च अनुमोदन रेटिंग के साथ पहली लहर को संभालने के लिए मोदी की सराहना की गई, वहीं दूसरी लहर के दौरान भोगी दुश्वारियों ने यह आंकड़ा 49 प्रतिशत तक गिरा दिया.

मोदी के कामकाज पर लोगों की राय
मोदी के कामकाज पर लोगों की राय

हालांकि दूसरी लहर से निबटने के लिए एनडीए सरकार के प्रयासों को लेकर उत्तरदाताओं में अस्वीकृति दिखती है, फिर भी राजनीतिक प्रभाव 2011 में यूपीए के लिए देश का मिजाज सर्वे के अनुमानों से कम गंभीर हैं. यह आंशिक रूप से इसलिए है क्योंकि महामारी केवल भारत की नहीं बल्कि एक ऐसी समस्या है जिसने पूरी दुनिया को प्रभावित किया है. इतना ही नहीं, उत्तरदाताओं ने केंद्र और राज्यों दोनों को कोविड की दूसरी लहर के खराब प्रबंधन के लिए समान रूप से जिम्मेदार ठहराया. जबकि जिन लोगों का मानना था कि केंद्र ने महामारी का अच्छा प्रबंधन किया उनकी संख्या में भी गिरावट आई है.

मोदी का कामकाज साल दर साल
मोदी का कामकाज साल दर साल

जनवरी 2021 में 67 प्रतिशत उत्तरदाता केंद्र के प्रयासों से संतुष्ट नजर आते थे लेकिन ताजा सर्वे में उनकी संख्या 51 प्रतिशत रह गई है. उसी तरह राज्यों की अपनी रेटिंग में भी भारी गिरावट दिखी है और जनवरी के 70 प्रतिशत से गिरकर अब 55 प्रतिशत तक पहुंच गई है. इसके अलावा, जब लोगो से यह पूछा गया कि दूसरी लहर के दौरान लोगों को हुई परेशानियों के लिए कौन जिम्मेदार था, तो 44 प्रतिशत ने केंद्र के साथ-साथ राज्य सरकारों को भी दोषी ठहराया. केवल 13 प्रतिशत का कहना था कि इसके लिए सिर्फ केंद्र सरकार दोषी है.

एनडीए सरकार के कुल कामकाज से आप कितने संतुष्ट हैं
एनडीए सरकार के कुल कामकाज से आप कितने संतुष्ट हैं

मोदी सरकार के लिए असल चिंता यह होनी चाहिए कि सर्वे में देश में व्यापक आर्थिक संकट को लेकर नाराजगी दिखती है. अर्थव्यवस्था को दुरुस्त करना उतनी ही बड़ी चुनौती होगी, जितना आज कोविड पर काबू पाना.

मोदी सरकार की बड़ी उपलब्धियों में अयोध्या में राम मंदिर निर्माण और अनुच्छेद 370 निरस्त किए जाने को क्रमश: 29 फीसदी और 22 फीसदी की रेटिंग मिली है. इससे पता चलता है कि भाजपा का हिंदूवादी मूल वैचारिक वोट बैंक उसके साथ डटा हुआ है. यही कारण है कि देश भर में व्यापक असंतोष (कोविड और उसके बाद के आर्थिक तनाव पर) के बावजूद भाजपा के वोट शेयर में पिछले सर्वेक्षण की तुलना में केवल तीन प्रतिशत आंकड़ा—37 से 34 प्रतिशत—घटने का अनुमान है. भाजपा और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के बीच वोट शेयर का अंतर 14 प्रतिशत के उच्च स्तर पर बना हुआ है.

अगले प्रधानमंत्री के लिए उपयुक्त नेता कौन
अगले प्रधानमंत्री के लिए उपयुक्त नेता कौन

भाजपा के मूल मतदाता अभी भी उसके साथ हैं यह उसके लिए खुशी की बात हो सकती है, पर अगस्त 2021 के देश का मिजाज सर्वे में उत्तरदाताओं ने मोदी सरकार की कई विफलताएं भी गिनाईं जो उसके लिए खतरे की घंटी बजाते हैं. 52 प्रतिशत लोगों का कहना है कि बढ़ती कीमतें और बेरोजगारी सबसे बड़ी विफलताएं हैं. इसके साथ किसानों के विरोध जैसी दूसरी आर्थिक चिंताओं को जोड़ दिया जाए तो यह संख्या 76 प्रतिशत तक पहुंच जाती है जो कि आर्थिक मोर्चे पर केंद्र के प्रदर्शन को लेकर भारी असहमति दर्शाता है. सरकार के लिए चिंता इसलिए भी बढ़ जानी चाहिए क्योंकि यह धारणा देश के सभी चार क्षेत्रों में दिखती है. इन मुद्दों में से हरेक के बारे में साफ-साफ प्रश्न पूछे जाने पर भी उत्तरदाताओं ने यही राय दोहराई. 60 फीसदी का मानना है कि केंद्र ने महंगाई पर काबू पाने को पर्याप्त काम नहीं किया. वहीं 59 फीसदी लोग देश में बेरोजगारी की स्थिति को भयावह मानते हैं.

मोदी बनाम इंदिरा बनाम राहुल
मोदी बनाम इंदिरा बनाम राहुल

तो कथित व्यापक असंतोष के बावजूद, मोदी और उनकी सरकार को अभी भी जनता का समर्थन क्यों मिल रहा है? प्रधानमंत्री के खिलाफ मजबूत विपक्ष की कमी की ओर इशारा कर देना, इसका आसान जवाब होगा. इस सर्वे में कांग्रेस के लिए पिछले सर्वे के मुकाबले एक प्रतिशत अधिक स्वीकार्यता दिखी है और इसका वोट शेयर 19 प्रतिशत हो गया है. भाजपा के वोट प्रतिशत में आई गिरावट अन्य विपक्षी दलों के खाते में गई है, जो खंडित हैं. संयुक्त विपक्ष मोदी का मुकाबला कर सकता है? उत्तरदाता इस बात को लेकर बंटे हुए हैं. 49 फीसदी इसका उत्तर 'हां' में और 43 फीसदी 'ना' में देते हैं. सो, सियासी मंच पर मोदी का दबदबा कायम है. हालांकि इसमें पहले के मुकाबले कमी आई है. टीना (कोई विकल्प नहीं) कारक मोदी के लिए काम कर रहा है.

एनडीए सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि क्या है
एनडीए सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि क्या है

ऐसा इसलिए है, क्योंकि अभी तक विपक्षी दल कोई ऐसा ठोस वैकल्पिक नैरेटिव लेकर नहीं आए हैं जो प्रधानमंत्री और उनकी पार्टी को पछाड़ सके. यह विपक्ष की सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है. इस सर्वे में विपक्षी गठबंधन का नेतृत्व करने के लिए सबसे उपयुक्त गैर-कांग्रेसी नेताओं के रूप में उत्तरादाताओं ने अरविंद केजरीवाल को पहले स्थान पर रखा है, उसके बाद ममता बनर्जी और फिर अखिलेश यादव का नंबर आता है. लेकिन केजरीवाल और उनकी पार्टी ने अभी तक दिल्ली से बाहर अपनी छाप नहीं छोड़ी है. इस साल की शुरुआत में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में निर्णायक जीत के बाद ममता का कद बढ़ गया है, लेकिन उन्हें पूरे देश की नेता की छवि बनानी होगी. राहुल गांधी शायद कांग्रेस के लिए सबसे अच्छे विकल्प हैं, लेकिन उनकी खुद की रेटिंग में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई है.

देश की सबसे बड़ी समस्या क्या है
देश की सबसे बड़ी समस्या क्या है

मौजूदा रैंकिंग में मोदी के शीर्ष पर बने रहने के और भी कई कारण हैं. हालांकि दूसरी लहर की तीव्रता ने जनहानि ज्यादा की है, लेकिन आर्थिक क्षति को पहले जितना बुरा नहीं माना गया है. लगता है मोदी सरकार ने सबक लिया है और बढ़ते दबाव के बावजूद दूसरी लहर के दौरान राष्ट्रीय लॉकडाउन का विरोध किया है. इसने अर्थव्यवस्था के पहिये को चालू रखा, भले ही गति धीमी रही.

अनुमानित जीडीपी में अभी भी गिरावट होगी लेकिन बुनियादी ढांचे पर पूंजीगत व्यय, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआइ) और राजस्व संग्रह (जुलाई में एक अस्थाई कमी को छोड़कर) जैसे सभी प्रमुख संकेतक तेजी से आगे बढ़े हैं. 2020-21 में लगातार अच्छी खरीफ और रबी फसल के साथ ग्रामीण संकट उतना नहीं है. वास्तव में, कोविड ने मृत्यु और अस्पताल में भर्ती होने के मामले में ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में महानगरों को ज्यादा नुकसान पहुंचाया. जहां तक विदेशी मामलों का सवाल है, सीमा पर चीनी घुसपैठ के बावजूद जनता की नजर में मोदी सरकार ने इसे अच्छे से संभाला है और सर्वे के उत्तरदाताओं ने इस दिशा में सरकार के प्रयासों का समर्थन किया है.

देश का मिजाज सर्वेक्षण
देश का मिजाज सर्वेक्षण

नि:संदेह, एनडीए सरकार में निरंतर विश्वास का सबसे महत्वपूर्ण कारण केवल मोदी हैं. उनके प्रदान किए गए मजबूत नेतृत्व और 2014 में सत्ता में आने के बाद से ही विकास के प्रमुख मुद्दों पर निरंतर ध्यान, इन दोनों ही वजहों से यह विश्वास बना है. मोदी को इस बात का श्रेय दिया जाता है कि अधिकांश राजनेताओं के विपरीत उन्होंने यह दिखाया है कि विकास के संदर्भ में उनकी दृष्टि लघु या मध्यम अवधि के उपायों तक सीमित नहीं है. इसके बजाय वे दीर्घकालिक लक्ष्य निर्धारित करते हैं, जिनकी देश को आकांक्षा है. हर घर के लिए शौचालय, सभी के लिए बैंकिंग सुविधाएं, किसानों और युवा उद्यमियों को वित्तीय सहायता, गांवों का विद्युतीकरण, जरूरतमंदों के लिए घर और अब हर घर में नल से पीने का पानी पहुंचाना, गरीबों के लिए शुरू की गई उनकी प्रमुख विकास योजनाओं ने गहरा और स्थायी प्रभाव छोड़ा है.

भाजपा में मोदी का उपयुक्त उत्तराधिकारी कौन
भाजपा में मोदी का उपयुक्त उत्तराधिकारी कौन

महामारी के दौरान भी कारोबारी तबके के केंद्र की ओर से मिलने वाली वित्तीय सहायता को लगातार नाकाफी बताने के बावजूद, मोदी इस बात को लेकर स्पष्ट थे कि वे किसी भी व्यवसाय के हाथ में सीधे पैसे नहीं रखेंगे बल्कि उन क्षेत्रों में पैसा निवेश करेंगे जिससे कुछ ठोस परिणाम निकल सकें. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट 2021 में कई साहसिक सुधारों के प्रस्ताव थे जिनमें प्रमुख क्षेत्रों में निजीकरण को तेजी से बढ़ाने और एफडीआइ मानदंडों में छूट शामिल हैं. सार्वजनिक क्षेत्र के विनिवेश और सरकारी संपत्तियों के मोनेटाइजेशनन के लिए भी भारी प्रतिबद्धता जताई गई थी.

देश का मिजाज सर्वेक्षण से पता चलता है कि रोजगार की समस्या और महंगाई दो ऐसे मुद्दे हैं जिसने लोगों को सबसे ज्यादा चिंतित किया है और मोदी सरकार को फौरन इनका समाधान करने की जरूरत है. चाहे सड़क निर्माण हो या पानी उपलब्ध कराना, बुनियादी ढांचे और विकास परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर निवेश से बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा हो सकता है. बीमार सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के लिए सरकार ने न केवल ऋण तक पहुंच को आसान बनाया है बल्कि उद्यमिता और स्व-रोजगार को प्रोत्साहित करने को युवाओं के लिए स्टार्ट-अप और उद्यमों को भी समर्थन दिया है.

फिर भी यह धारणा है कि मोदी सरकार पर्याप्त प्रयास नहीं कर रही. उसे अब वे सभी वादे पूरे करने होंगे जो उसने बजट के दौरान जरूरी आर्थिक विकास तुरंत शुरू करने को किए थे.

जो लोग मोदी को जानते हैं, उनका कहना है कि प्रधानमंत्री हर चीज पर अपनी पूरी नजर बनाए रखते हैं, अपने निर्णय के साथ डटे रहते हैं (पुरानी कर प्रथा समाप्त करना इसकी एक मिसाल है), हर चीज की पूरी और विस्तृत जानकारी चाहते हैं और काम को समय से पूरा कराने के लिए अधीरता रहती है (मंत्रिमंडल में हालिया साहसी फेरबदल इसका उदाहरण है जिसमें कुछ लोगों की छुट्टी हुई और कुछ नए लोगों को जोड़ा गया). लेकिन वे जिस संकट का सामना कर रहे हैं वह बहुत बड़ा है और स्वास्थ्य और आर्थिक सुनामी से राष्ट्र को सफलतापूर्वक और सुरक्षित बाहर निकाल लाने और विकास की पटरी पर दौड़ाने के लिए उन्हें अपने सारे हुनर का इस्तेमाल करना होगा. वे विज्ञान-कथा उपन्यासकार ब्रैंडन सैंडरसन के शब्दों पर ध्यान दे सकते हैं: ''एक महान व्यक्ति की निशानी है कि उसे पता होता है कि सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण काम को पूरा करने के लिए कब और किस कम महत्वपूर्ण काम को छोड़ना है.''

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