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दौड़ते-दौड़ते अपराध में घुस गया लॉरेंस

बिश्नोई ने रंजीत की बातचीत संपत नेहरा और काला जठेड़ी से कराई, जिससे इन लोगों को अत्याधुनिक हथियार मिले.

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शातिर शैतान : पुलिस के शिकंजे में गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई शातिर शैतान : पुलिस के शिकंजे में गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई

लॉरेंस बिश्नोई ने अपराध की दुनिया में कदम रखा साल 2007 में. यह लॉ ग्रेजुएट है. संपत नेहरा और काला जठेड़ी इसके नेटवर्क के खास गैंगस्टर हैं. बिश्नोई ने साल 2007 में कानून की पढ़ाई के लिए पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ में दाखिला ले लिया. यहां वह 1,500 मीटर की दौड़ की प्रैक्टिस करने जब ग्राउंड पर जाता था तो वहां उसके कई दोस्त बने.

इसने एक साल बाद कॉलेज में छात्रसंघ चुनाव के दौरान दूसरे पक्ष के प्रत्याशी उदय पर गोली चला दी और पहली बार डेढ़-दो महीने जेल में रहा. जेल में उसकी दोस्ती रंजीत दूपला नामक शख्स से हुई जो हथियारों का तस्कर था और अभी अमेरिका में है. बिश्नोई ने रंजीत की बातचीत संपत नेहरा और काला जठेड़ी से कराई, जिससे इन लोगों को अत्याधुनिक हथियार मिले. वह 2010 में छात्रसंघ अध्यक्ष पद के लिए खड़ा हुआ लेकिन हार गया और इस खुन्नस में उसने जीतने वाले उम्मीदवार के पैर तोड़ दिए.

इसके बाद बिश्नोई के लिए जेल और अपराध नई बात नहीं रह गए. उसने कॉलेजों के चुनाव में अपने प्रत्याशी उतारने शुरू कर दिए. 2011 में वह अध्यक्ष पद का चुनाव जीत भी गया. इस बीच वह अपराध करता रहा और जेल जाता-आता रहा. उसने जयपुर में 3-4 महीने फरारी भी काटी. साल 2014 में सालासर बालाजी जाने के दौरान उसने पुलिस नाकाबंदी तोड़ दी और अपने साथियों समेत पकड़ा गया तथा सीकर जेल में रहा तथा फिर रोपड़ जेल भेजा गया.

उसके पैसों से शराब का काम करने वाले उसकी बुआ के लड़के की इस बीच हत्या हो गई. इसका बदला लेने के लिए वह जेल से भागा और हत्यारों की तलाश में हरियाणा में कई जगह घूमता रहा. 2015 के अंत में वह गुड़गांव में पकड़ा गया और पंजाब की नाभा जेल भेजा गया. 2016 में जेल के भीतर तलाशी लेने के दौरान बहस होने पर उसने जेल सुपरिंटेंडेंट पर गोली चलवा दी जो उनके पैर में लगी.

फिर उसे पटियाला जेल भेजा गया जहां उसके साथ अन्य बदमाश जुड़ गए. 32 वर्षीय बिश्नोई की जेलें बदलती रहीं और अब वह जेल से ही फिरौती और हत्या का कारोबार चलाने लगा. उसने राजस्थान और हरियाणा में वसूली की वारदातों को जेल में बैठकर ही अंजाम दे डाला. जोधपुर में उसने एक हीरा व्यापारी समेत तीन व्यापारियों पर गोली चलवाई और फिरौती मांगी. इस तरह उसने जेल से अपराध में महारत हासिल कर ली.

एक बार जोधपुर कोर्ट में अभिनेता सलमान खान को भी उसने धमकी दे डाली थी. दोनों ही पेशी पर कोर्ट पहुंचे थे. सलमान पर हमले के इरादे से संपत नेहरा मुंबई गया भी था लेकिन हथियार की रेंज से सलमान का घर काफी दूर था. उसने श्रीगंगानगर में भी हत्या की वारदात करवाई. इस दौरान उसने शराब और अफीम का अवैध धंधा करने वालों से वसूली शुरू की और गैंग का आर्थिक आधार मजबूत किया.

गैंग चलाने के लिए उसने राजू बसोडी और वीरेंद्र उर्फ काला राणा को फर्जी पासपोर्ट पर थाईलैंड भिजवा दिया. जेल में ही बिश्नोई, संपत नेहरा, राजू बसोडी और संदीप काला की दोस्ती पक्की हुई और इन लोगों ने दिल्ली में ही करोड़ों रुपए की फिरौती वसूलने के लिए कई जगह गोलियां चलवाईं, इनमें नजफगढ़ के जूलरी शोरूम भी शामिल थे.   

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