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मंदिर की ओर

इस भव्य इमारत ने वक्त के कई थपेड़ों को झेला है. लेकिन, 1960 के दशक के उत्तरार्ध से इसकी दक्षिण-पूर्वी मीनार के नीचे एक मंडप तले एक धार्मिक संरचना आकार ले रही है.

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हैदराबादः चारमीनार  हैदराबादः चारमीनार 

दरअसल, मोहम्मद कुली कुतुब शाह ने हैदराबाद की स्थापना को चिन्हित करने के लिए 1591 में ऐतिहासक चार मीनार का निर्माण कराया था. इस भव्य इमारत ने वक्त के कई थपेड़ों को झेला है. लेकिन, 1960 के दशक के उत्तरार्ध से इसकी दक्षिण-पूर्वी मीनार के नीचे एक मंडप तले एक धार्मिक संरचना आकार ले रही है. यह धार्मिक संरचना एक मंदिर है और शायद शांति बनाए रखने के लिए पुलिस तथा एएसआइ ने उसको लेकर ज्यादातर चुप्पी साधे रखी.

साल 2012 में एक आरटीआइ के सवाल का जवाब देते हुए एएसआइ ने बताया, ''एएमएएसआर (प्राचीन स्मारक और पुरातत्व स्थल एवं अवशेष) अधिनियम 1958, नियम 1959, एएमएसआर अधिनियम, 2010 (संशोधन और सत्यापन) के मुताबिक, एएसआइ का मानना है कि चारमीनार के दक्षिण-पूर्वी मीनार के पास निर्मित मंदिर अनधिकृत संरचना है.’’ 

उसे अब भाग्यलक्ष्मी मंदिर कहा जाता है और यह दशकों में धीरे-धीरे विकसित हुआ है. कोई विवाद नहीं रहा है जबकि प्रतिष्ठित इमारत, जिससे प्रेरित होकर सिगरेट से लेकर सीमेंट तक, कई ब्रान्डों ने अपना नाम चारमीनार रखा है, से बिल्कुल सटा हुआ यह मंदिर 20वीं सदी के उत्तरार्ध में निर्मित संरचना है. तो किसी तरह के विवाद का न उठना क्या इस शहर में अंतर्निहित धार्मिक और सांस्कृतिक समन्वय का नतीजा है?

विरासत एक्टिविस्ट मोहम्मद सफीउल्लाह कहते हैं, ''शायद.’’ सफीउल्लाह इस तथ्य पर अफसोस जताते हैं कि इस स्मारक को अभी भी विश्व धरोहर का टैग नहीं मिला है. वे कहते हैं, ''चारमीनार के चारों बाहरी भागों के डिजाइन भिन्न हैं, केवल दक्षिणी भाग में छेड़छाड़ और बदलाव किए जाते रहे हैं.’’

बिहार के रोहतास जिले के सासाराम में शेर शाह सूरी के मकबरे में हुए अतिक्रमण से भी देखभाल का अभाव साफ नजर आता है. यहां मानव निर्मित झील के बीच में धनुषाकार द्वारों के साथ अष्टकोणीय मकबरा इतिहास का एक असाधारण प्रतीक है. इसके पूर्व में सर्वेश्वर महादेव मंदिर है.

यह मंदिर 1970 के दशक में एक अस्थायी संरचना के रूप में शुरू हुआ जो अब संरक्षित स्मारक के परिसर में 9,500 वर्ग फुट में फैले पूजा स्थल के रूप में विकसित हो चुका है. एक अन्य अतिक्रमण, एक मस्जिद, मकबरे के 100 मीटर दक्षिण में है. एएमएएसआर अधिनियम का 2017 का संशोधन जो प्रतिबंधित क्षेत्रों में (संरक्षित स्मारक के 100 मीटर के दायरे में) किसी भी निर्माण पर प्रतिबंध लगाता है, पर सासाराम में उसका पालन होता नहीं दिखता.

1977 से एएसआइ ने 16 अवैध कब्जे पाए और उनमें से कुछ हटाए भी. पटना सर्किल के एएसआइ अधीक्षक को 28 मई को भेजे ई-मेल में कब्जों की स्थिति जानने का प्रश्न पूछा गया पर जवाब नहीं मिला.
—साथ में जितेंद्र कुमार सिंह

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