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पर्दा गिर रहा है

उद्योग राहत की आस में सरकार के सामने रखने के लिए एक प्रजेंटेशन तैयार कर रहा है, जिसमें वेतन का भुगतान करने के लिए कोलैटेरल-फ्री ऋण और कर छूट शामिल हैं.

नवनीत मोहन नवनीत मोहन

नवनीत मोहन 42 वर्ष

डायरेक्टर और चीफ एग्जीक्यूटिव,

लक्ष्य लाइव एक्सपीरिएंसेज, गुरुग्राम

नवनीत मोहन के अनुसार, अक्तूबर से अप्रैल तक का वक्त इवेंट उद्योग के लिए साल का सबसे व्यस्त समय रहता है. पर इस मार्च में उनके 17 इवेंट कैंसल हुए हैं, वहीं अप्रैल के सभी इंवेट टाल दिए गए हैं. दो दशकों से इस उद्योग के दिग्गज मोहन कहते हैं, ''यह कहना कि मुश्किल वक्त है, गंभीरता को कमतर करके दिखाना होगा. यह अभूतपूर्व है. अगर भारत कोविड-19 के स्टेज 3 में पहुंच जाता है, तो पूरे इवेंट उद्योग का सफाया हो सकता है.''

इवेंट ऐंड ऐंटरटेनमेंट मैनेजमेंट एसोसिएशन के अनुसार, अकेले कॉर्पोरेट्स ने करीब 3,000 करोड़ रुपए के इवेंट्स रद्द कर दिए हैं. एक अनुमान के अनुसार, डेस्टिनेशन वेडिंग के कारोबार को 2020 तक 45,000 करोड़ रुपए तक पहुंचने की उम्मीद थी, जिस पर बड़ी मार पड़ी है. उद्योग राहत की आस में सरकार के सामने रखने के लिए एक प्रजेंटेशन तैयार कर रहा है, जिसमें वेतन का भुगतान करने के लिए कोलैटेरल-फ्री ऋण और कर छूट शामिल हैं.

उद्योग उधार के लिए बैंकों और एनबीएफसी के साथ भी काम कर रहा है. मोहन कहते हैं, ''एक राज्य सरकार पर मेरी कंपनी का एक करोड़ रुपए से अधिक का बकाया है. ज्यादातर कॉर्पोरेट्स जिनके साथ हम काम करते हैं, वे भुगतान के समय को को लेकर चिंतित हैं. उम्मीद है, भारतीय कंपनियां डिफॉल्ट की स्थिति में नहीं जाएंगी.'' ठ्ठ

खतरनाक दस्तक

-भारत के इवेंट उद्योग में एक करोड़ लोग नौकरी करते हैं

-कोरोना वायरस के खतरे की वजह से विभिन्न बड़े आयोजनों को रद्द या फिर टाल दिया गया है. इनमें आइपीएल, आइआइएफए 2020, आइजीएक्स 2020, एफडीसीआइ इंडिया फैशन वीक, गोवाफेस्ट 2020 शामिल हैं

-यह उद्योग सरकार से राहत की उम्मीद कर रहा है, इनमें जीएसटी छूट, कोलैटेरल-फ्री ऋण, सभी कर रिफंड को जारी करना और सरकारों पर इवेंट कंपनियों का बकाया भुगतान शामिल है

3,000

करोड़ रु.

का अनुमानित नुक्सान इवेंट उद्योग को, पिछले दो महीनों में कैंसलेशन की वजह से.

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