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परिजनों और दोस्तों से कट-सा जाना दुखदायी था

मैंने दोस्तों समेत किसी को भी अपनी वापसी के बारे में नहीं बताया. मैं अपना ज्यादातर वक्त टीवी देखने, फोन को चेक करने और सोने में बिताता था. मैं किसी के मेसेज का भी जवाब नहीं देता था.

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दक्षिण कोरिया की एक कंपनी में काम करने वाले मुंबई के मेकैनिकल इंजीनियर पंकज घटाटे को छह महीने के लिए डेपुटेशन पर सिओल भेज दिया गया है. दक्षिण-पूर्व के एशियाई देशों में कोविड-19 के फैलने के बाद वे बीच में ही 25 फरवरी को भारत लौट आए थे. मुंबई के छत्रपति शिवाजी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग के समय वे नेगेटिव पाए गए थे, लेकिन 15 दिन के लिए उन्होंने खुद को अलग कैद कर लिया.

घटाटे ने तीन बेडरूम के अपने मकान के एक कमरे में खुद को बंद कर लिया. उन्होंने शहर में अपनी मौजूदगी को छिपाने के लिए अपनी व्हाट्सऐप की सेटिंग को भी बदल दिया. सबसे दूर रहना बहुत कठिन था और उन्हें डर था कि उनके ऊपर पूरी तरह निर्भर उनकी पत्नी और उनके दो बेटों को वायरस का संक्रमण न हो जाए.

उनकी पत्नी दिन में तीन बार उनके कमरे में खाना भेज देती थीं. वे हर रोज अपने बर्तन और कपड़ों के साथ ही कमरे की सफाई करते थे. वे व्हाट्सऐप के जरिए परिवार से बात करते थे. वे कहते हैं, ''मैंने दोस्तों समेत किसी को भी अपनी वापसी के बारे में नहीं बताया. मैं अपना ज्यादातर वक्त टीवी देखने, फोन को चेक करने और सोने में बिताता था. मैं किसी के मेसेज का भी जवाब नहीं देता था.'' 10 मार्च को वे कमरे से बाहर निकले और अपने एक करीबी मित्र के घर गए जहां सब लोग होली मनाने के लिए जमा हुए थे. वे कहते हैं, ''यही वह पल था जब मैंने वायरस को हरा दिया.''

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