scorecardresearch
 

सवारी नहीं

उबर ने कहा कि वह कोविड-19 की पुष्टि वाले ड्राइवरों और सवारियों का अकाउंट कुछ वक्त के लिए निलंबित कर देगी. उबर और ओला की सेवाओं की मांग में 40-50 फीसद की कमी आ गई है.

बड़ा लंबा इंतजार सवारियां मिलने से पहले कैब ड्राइवर साहनी आराम करते हुए बड़ा लंबा इंतजार सवारियां मिलने से पहले कैब ड्राइवर साहनी आराम करते हुए

मोहन कुमार साहनी 29 वर्ष

कैब ड्राइवर, नई दिल्ली

एक कैब सेवा प्रदाता कंपनी के लिए काम कर रहे ड्राइवर मोहन कुमार साहनी प्रति माह 50,000 रु. कमा लेते थे. सुबह अपने मोबाइल फोन पर 'ऑन ड्यूटी' का विकल्प चालू करने के कुछ सेकंड बाद ही सवारी मिल जाती थी, पर अब कोविड के असर के बाद उन्हें आधे घंटे से ज्यादा इंतजार करना पड़ता है. वे कहते हैं, ''सवारी काफी आशंकित हैं. क्या यह ड्राइवर स्वस्थ है? इसके कैब में कौन बैठा रहा होगा?'' सवारी पूछती है, क्या वह मास्क पहनता है?

साहनी का जवाब होता है, कभी-कभी. क्या उसने कार को सैनिटाइज किया है. वे कहते हैं, नहीं. कैब कंपनियों ने भरोसा दिलाने के लिए तुरंत बयान जारी कर दिए. ओला ने कहा कि ड्राइवरों को हैंड सैनिटाइजर और मास्क दे दिए गए थे—सफाई का प्रशिक्षण भी दिया गया. उबर ने कहा कि वह कोविड-19 की पुष्टि वाले ड्राइवरों और सवारियों का अकाउंट कुछ वक्त के लिए निलंबित कर देगी. उबर और ओला की सेवाओं की मांग में 40-50 फीसद की कमी आ गई है.

सवारी कम,

धंधा मंदा

-बाहर आने-जाने में संयम और सामाजिक मेल-जोल में दूरी का मतलब है सवारियों में कमी

-टेली-कम्युटिंग और 'घर से काम' करने के निर्देशों के कारण हजारों कर्मचारियों का आना-जाना बंद

-इसके अलावा कमजोर होती अर्थव्यवस्था का भी असर पड़ रहा है

10

अरब डॉलर

का अनुमानित बाजार है भारत की कैब प्रदाता कंपनियों का (भारत का कुल टैक्सी बाजार)

125

भारतीय शहरों में ओला सेवाएं हैं

36

भारतीय शहरों में उबर की सेवाएं हैं.

***

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें