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चीता आएगा, काम-धंधा लाएगा 

गैर-आदिवासी भूमि की कमी को पूरा करने के लिए, सरकार ने सेसैपुरा के आसपास लंबी अवधि के निजी पट्टे पर आवंटन के लिए 14-14 हेक्टेयर के दो और 6 हेक्टेयर के एक क्षेत्र की पहचान की है.

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श्योपुर जिला और विशेष रूप से कराहल ब्लॉक जहां कूनो राष्ट्रीय उद्यान स्थित है, न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि देश के आर्थिक और सामाजिक रूप से सबसे पिछड़े क्षेत्रों में से एक है. इसकी लगभग एक चौथाई आबादी सहरिया समुदाय की है, जिसे 'विशेष रूप से कमजोर आदिवासी समूह’ के रूप में वर्गीकृत किया गया है. जिले की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार कृषि है; उत्पादन और तृतीयक क्षेत्रों का योगदान नगण्य है. 

राष्ट्रीय उद्यान के निकटतम गांव सेसैपुरा के निवासी 50 वर्षीय हजरत यादव कहते हैं, ''इस क्षेत्र में कोई उद्योग नहीं है और भूमि जोत बहुत छोटे हैं. जो लोग काम की तलाश में पलायन करते हैं उन्हें केवल छोटी-मोटी मजदूरी मिलती हैं क्योंकि उनके पास कोई कौशल नहीं होता.’’ उनका मानना है कि चीतों के आने से कम से कम आतिथ्य क्षेत्र में बदलाव आ सकता है. 

और एक बदलाव दिखाई दे रहा है: जमीन के लिए अचानक होड़ शुरू हो गई है. अधिकांश इलाकों के मालिक आदिवासी हैं, और कानून उनकी जमीनों को गैर-आदिवासियों को बेचे जाने को प्रतिबंधित करता है. इसलिए जिन जमीनों की बिक्री में किसी प्रकार की बाधा नहीं हैं उनके लिए बड़ी ऊंची कीमतें मांगी जा रही हैं और जमीनों दाम के देखते ही देखते तीन से चार गुना बढ़ गए हैं.

अधिक रुचि दिखाने वालों में राजस्थान के रणथंभौर के होटल व्यवसायी हैं जो महसूस करते हैं कि दोनों रिजर्व भविष्य में तेजी से बढ़ते पर्यटन सर्किट में विकसित हो सकते हैं. रणथंभौर से कूनो तकरीबन 180 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. गांव के एक छोटे किसान धर्मेंद्र विश्वकर्मा कहते हैं, ''ऐसा कोई दिन नहीं जाता जब जमीन की तलाश में राजस्थान से कोई सेसैपुरा न आए. लोग अपने खेतों के लिए 15 लाख रुपए प्रति बीघा की बोली लगा रहे हैं, जिसकी कीमत 4 लाख रुपए होती थी.’’ 

गैर-आदिवासी भूमि की कमी को पूरा करने के लिए, सरकार ने सेसैपुरा के आसपास लंबी अवधि के निजी पट्टे पर आवंटन के लिए 14-14 हेक्टेयर के दो और 6 हेक्टेयर के एक क्षेत्र की पहचान की है. मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड पहले से ही इच्छुक समूहों के लिए दौरे का आयोजन कर रहा है.

पगडंडी सफारी के मानव खंडूजा, जिन्होंने राष्ट्रीय उद्यान के पास एक होटल बनाने में भी रुचि दिखाई है, कहते हैं, ''एक नई बड़ी बिल्ली की प्रजाति ने बहुत उत्सुकता पैदा की है. चीतों की शुरुआत सफल साबित होती है, तो कूनो कुछ ही साल में एक प्रमुख पर्यटन स्थल बन जाएगा.’’ 

52 वर्षीय जिनेश जैन, जिन्होंने 16 कमरों का रिजॉर्ट बनाया है, कहते हैं, ''हालांकि रिजॉर्ट को चलाने में चुनौतियां हैं लेकिन चीते को लेकर जो उत्सुकता है उससे व्यवसाय में इजाफा होगा.’’ रिजॉर्ट में 28 लोग काम करते हैं, जिनमें से अधिकांश सहरिया समुदाय से हैं जो हाउसकीपिंग में लगे हुए हैं. 

स्थानीय लोगों को पर्याप्त रोजगार के अवसर मुहैया करने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हाल ही में पालपुर की अपनी यात्रा में ''युवाओं को पर्यटन के लिए प्रशिक्षण’’ देने के खातिर श्योपुर में एक कौशल विकास केंद्र स्थापित करने की घोषणा की.

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