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आवरण कथाः ऑटो सेक्टर का चक्का जाम

बिक्री के कुछ आंकड़े बढ़ते दिख रहे हैं, इंडस्ट्री को इस साल कारोबार 25-40 प्रतिशत सिकुड़ने का अनुमान है

बढ़ती मांग विंकेश गुलाटी फरीदाबाद में अपनी डीलरशिप शॉप पर बढ़ती मांग विंकेश गुलाटी फरीदाबाद में अपनी डीलरशिप शॉप पर

ऑटो क्षेत्र ने तो हाल के सालों में अभूतपूर्व संकट देखा है. वर्ष 2019-20 में बदहाल अर्थव्यवस्था की वजह से और नए बीएस-VI उत्सर्जन मानक अपनाए जाने का इंतजार करते ग्राहकों के कारण क्षेत्र में 18 फीसद की गिरावट देखी गई. लेकिन लॉकडाउन ने अभूतपूर्व दिन दिखाए—अप्रैल में, देशभर में व्यावसायिक गतिविधियां बंद होने के कारण क्षेत्र में शून्य बिक्री दर्ज की गई.


लॉकडाउन से बाहर आकर भी करीब सभी ऑटो निर्माताओं ने मई में घरेलू बिक्री में 80-90 फीसद कि गिरावट दर्ज की. जून में गिरने की गति पर थोड़ा ब्रेक लगा—मारुति सुजुकी ने मई की तुलना में जून में बिक्री में 3.8 फीसद की बढ़ोतरी देखी. हुंडई ने भी उसी दौरान बिक्री में थोड़ा इजाफा देखा. (इन दोनों कंपनियों की मिलाकर बाजार में 70 फीसद से ज्यादा की हिस्सेदारी है.) सुधार की गति दोपहिया वाहनों में ज्यादा तेज रही है, खास तौर पर ग्रामीण व कस्बाई भारत में शुरुआती मोटरसाइकिलों के मामले में.

कुल मिलाकर, अगस्त 2020 में दोपहिया व यात्री वाहनों की श्रेणी में क्रमश: 3 व 14 फीसद की वृद्धि देखी गई. (हालांकि इस अच्छी खबर की तकलीफदेह हकीकत यही है कि इस वृद्धि के आंकड़े का अगस्त 2019 का आधार भी अपने आप में बहुत कम था.) विश्लेषकों का कहना है कि अभी यह कहना जल्दबाजी है कि यह वाकई किसी सुधार का संकेत है या फिर यह महज अटकी पड़ी मांग और त्योहारी मांग का मिलाजुला संकेत है. ऑटो निर्माता तो ऊंची बिक्री की उम्मीद लगाए बैठे हैं लेकिन उद्योग क्षेत्र की एसोसिएशन सिआम (सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैनुफैक्चरर्स) ने इस साल 25-40 फीसद नकारात्मक वृद्धि का अनुमान जाहिर किया है.

केस स्टडी
विंकेश गुलाटी, 49 वर्ष
निदेशक, यूनाइटेड ऑटोमोबाइल्स, इलाहाबाद/फरीदाबाद

विंकेश गुलाटी फाडा (द फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशंस) के प्रेसिडेंट हैं. उनके पास दो डीलरशिप हैं—एक इलाहाबाद में और दूसरी फरीदाबाद में. वे कहते हैं कि उन्होंने जून, जुलाई व अगस्त में मांग में सुधार देखा. बिक्री पिछले साल की ही तरह बढिय़ा रही. यह मुख्य रूप से ग्रामीण मांग की वजह से थी. इसकी एक वजह यह भी थी कि महामारी के दौर में सार्वजनिक परिवहन बंद होने से निजी तर पर आने-जाने के साधनों की मांग में थोड़ी तेजी आई.


लेकिन कोविड-19 के गांवों में फैलने से गुलाटी ज्यादा आशावान नहीं हैं. उन्हें इस साल 200 वाहन बिकने की उम्मीद थी पर अब उन्हें लगता है कि यह संख्या 100 के आसपास रहेगी. आने वाले महीनों में उन्हें मांग सुधरने की उम्मीद है. वे कहते हैं, ''गांवों में त्योहारी सीजन खरीदारी के बड़े उत्प्रेरक हैं. हम बेहतर डिस्काउंट व बढ़ी हुई वारंटी की पेशकश करेंगे—इसी से मांग में जान आ सकती है.'' वे यह भी बताते हैं कि इस समय वह सामान्य की तुलना में 25 फीसदी कम लोगों से काम चला रहे हैं.

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