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आवरण कथाः गुलाबी उम्मीदें

रिपोर्टें तो देश के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के मजबूत आधार और स्थायी वृद्धि की गवाही देती हैं मगर कुछ फौरी अड़चनों पर ध्यान देने की जरूरत.

डॉ. अरोकिस्वामी वेलुमनी, संस्थापक और प्रबंध निदेशक थायरोकेयर टेक्नोलॉजीज डॉ. अरोकिस्वामी वेलुमनी, संस्थापक और प्रबंध निदेशक थायरोकेयर टेक्नोलॉजीज

सोनाली आचार्जी

महामारी कोविड फैलने के पहले ही देश का स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र सफलता की राह पर था और 2020 के बारे में आई रिपोर्टें सकारात्मक थीं. इस वर्ष इस क्षेत्र में चार करोड़ रोजगार सृजित होने की उम्मीद थी. उम्मीद थी कि दवा क्षेत्र दुनिया की कुल मांग के 50 प्रतिशत से अधिक टीकों की आपूर्ति करेगा, टेलीमेडिसिन और चिकित्सा बीमा के भी फलने-फूलने की भविष्यवाणी की गई थी.

कोविड से चिकित्सा पर्यटन और गैर-कोविड स्वास्थ्य सेवाओं पर नकारात्मक असर पडऩे के बावजूद, इंडिया ब्रांड इक्विटी फाउंडेशन ने पिछले सप्ताह जारी रिपोर्ट में इस क्षेत्र के लिए ऐसी ही गुलाबी तस्वीर खींची है. इस रिपोर्ट के मुताबिक, 2022 तक स्वास्थ्य सेवा बाजार के तीन गुना बढ़कर 8.6 लाख करोड़ रु. होने की उम्मीद है.

देश में स्वास्थ्य पर होने वाले खर्च का 74 प्रतिशत अभी भी निजी क्षेत्र में ही खर्च होता है और रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि इस क्षेत्र में होने वाला निवेश अस्पतालों और अनुसंधान में बढ़ेगा. अस्पताल उद्योग के बारे में अनुमान है कि उसका कारोबार 2017 में 11.8 लाख करोड़ रु. से 2022 में 27.4 लाख करोड़ रु. तक पहुंच जाएगा.

स्वास्थ्य बीमा क्षेत्र में बीमा राशियों पर प्रत्यक्ष प्रीमियम आय 17.16 प्रतिशत बढ़कर वित्त वर्ष 2020 में 51,637.84 रु. करोड़ तक पहुंच गई है जबकि चिकित्सीय उपकरण बाजार के बारे में उम्मीद है कि यह 2022 तक 81,331.2 करोड़ रु. का हो जाएगा. हालांकि रिपोर्ट में डॉक्टरों वगैरह की कमी की चिंताएं हैं. इसके मुताबिक, विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रति एक हजार व्यक्तियों पर एक चिकित्सक के मानक पर पहुंचने के लिए भारत में 2030 तक 20.7 लाख और डॉक्टरों की जरूरत होगी.  

देश में स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र की मजबूती पर जोर बढऩे के बावजूद, इसके रास्ते में अभी कई अल्पकालिक बाधाएं हैं. मेदांता अस्पताल, गुरुग्राम के निदेशक और संस्थापक, डॉ. नरेश त्रेहन, कहते हैं, ''अस्पतालों, प्रयोगशालाओं, चिकित्सा उत्पादों के निर्माताओं और बीमा कंपनियों के लिए कोविड एक अवसर और चुनौती, दोनों रहा है.’’

इस वायरस ने न केवल स्वास्थ्य कर्मियों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को खतरे में डाला, बल्कि क्षेत्र की सीमाओं को भी परखा है. डॉ. त्रेहन ने यह भी जोड़ा कि आगे के वर्षों में, चिकित्सा उपकरणों, अनुसंधान, निदान सुविधाओं, सुरक्षात्मक उपकरणों के संदर्भ में आत्मनिर्भरता बढऩे की भरपूर उम्मीद है. ''जिन लोगों ने महामारी के अवसरों के मुताबिक काम किया है, उन्हें आगे के वर्षों में इसका लाभ मिलेगा.’’ 


केस स्टडी
डॉ. अरोकिस्वामी वेलुमनी, 62 वर्ष
संस्थापक और प्रबंध निदेशक थायरोकेयर टेक्नोलॉजीज,
नवी मुंबई

नवी मुंबई में स्थित थायरोकेयर टेक्नोलॉजीज की स्थापना 1996 में हुई थी. फिलहाल कंपनी के देश और विदेश में कुल 1,122 केंद्र और कलेक्शन सेंटर हैं. जब कोविड फैला तो कंपनी ने अपने पास पहले से मौजूद पीसीआर मशीनों और प्रशिक्षित लोगों का उपयोग कोविड परीक्षण क्षमता बढ़ाने में किया. अप्रैल में एक दिन में 200 परीक्षणों की इसकी क्षमता अब बढ़ कर प्रति दिन 20,000 परीक्षण हो गई है. डॉ. अरोकिस्वामी वेलुमनी कहते हैं, ''इस साल हमारी वृद्धि लगभग दोगुनी रही है.’’

कोविड फैलने के बाद लॉकडाउन के आरंभिक दिनों में अन्य सभी लैब सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई थीं, लेकिन इस महीने तक इन सेवाओं की मांग 90 प्रतिशत तक बहाल हो गई है. उन्होंने पिछले छह महीनों में 20 प्रतिशत नई नौकरियां दी हैं और इन नए लोगों की औसत आयु 25 वर्ष है. डॉ. वेलुमनी कहते हैं, ''भविष्य के लिए मेरा दर्शन है 'लगे रहो’.

यह समय अवसर को गले लगाने, कुछ नया करने और दृढ़ता से लगे रहने का है क्योंकि लोग अब गुणवत्तापूर्ण निदान का महत्व महसूस करना शुरू कर रहे हैं. इस समय देश में विकास और लैब इन्फ्रास्ट्रक्चर को बड़ा करने की जबरदस्त गुंजाइश है.’’


‘‘अभी कुछ महीने पहले तक लोग जानते तक नहीं थे कि पीसीआर क्या होता है. अब यह सामान्य हो गया है’’

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