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आवरण कथाः क्रिप्टोकरेंसी की बुनियादी जानकारी

खासे उतार-चढ़ाव, लगातार दायरा बढ़ाती जा रही डिजिटल दुनिया के बारे में वे तथ्य जो आप जानना चाहते हैं मगर पूछने से घबराते हैं.

डिजिटल टोकन डिजिटल टोकन

क्रिप्टोकरेंसी क्या है?
यह डिजिटल टोकन है, जिससे आप सामान और सेवाएं खरीद सकते हैं या फिर मुनाफे के लिए लेन-देन कर सकते हैं. इसके लिए सुरक्षित ऑनलाइन लेन-देन के वास्ते सख्त क्रिप्टोग्राफी से जुड़े साझा ऑनलाइन लेजर (खाता-बही) का इस्तेमाल किया जाता है

क्या इससे सामान खरीदा जा सकता है?
क्रिप्टो अभी बस दो देशों अल साल्वाडोर और क्यूबा में कानूनी लेन-देन का जरिया है. भारत सहित बाकी दुनिया क्रिप्टोकरेंसी की खरीद-बिक्री की ही इजाजत देती है

क्या है ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी?
क्रिप्टो का आधार है ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी. इसमें पीयर टु पीयर नेटवर्क के बीच, ऊपर से नीचे तक सारे लेन-देन का विकेंद्रित और बंटा हुआ लेजर है

आखिर कितना सुरक्षित है ब्लॉकचेन?
ब्लॉकचेन में हर 'ब्लॉक’ खास लेन-देन और पहले के लेन-देन का डेटा होता है. अगर कोई भी ब्लॉकचेन तोड़ने की या लेन-देन में हेराफेरी की कोशिश करता है, तो अगले सभी लेन-देन बेमानी हो जाएंगे. क्रिप्टो लॉबी अपने इस दावे के पक्ष में मिसाल देती है कि क्रिप्टो स्पेस में घुसपैठ डिजिटल बैंकिंग के मुकाबले काफी मुश्किल है

ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी का और किस मद में इस्तेमाल हो सकता है?
ब्लॉकचेन के एप्लिकेशंस में मेडिकल डेटा को सुरक्षित तरीके से साझा करना, संगीत की रॉयल्टी की निगरानी, सीमाओं के आर-पार भुगतान, आइओटी (इंटरनेट ऑफ थिंग्स) ऑपरेटिंग सिस्टम की रियलटाइम उपलब्धता, मनी लॉन्ड्रिंग विरोधी निगरानी व्यवस्था, आपूर्ति शृंखला और सामान ढुलाई की निगरानी वगैरह शामिल है

क्रिप्टो के बारे में दुनिया का नजरिया क्या?
अल साल्वाडोर और क्यूबा ही ऐसे देश हैं, जहां बिटकॉइन को लेन-देन का कानूनी जरिया बनाने के लिए कानून पास किए गए हैं. अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन बिटकॉइन लेन-देन की मंजूरी देते हैं लेकिन रूस और चीन नहीं देते. दरअसल, चीन ने इस साल के शुरू में सभी क्रिप्टो लेन-देन पर एकतरफा प्रतिबंध लगा दिया

भारत में क्रिप्टोकरेंसी को नियंत्रित करने के लिए क्या हो रहा है? 
●भारतीय रिजर्व बैंक ने 2018 में क्रिप्टोकरेंसी में लेन-देन पर प्रतिबंध लगा दिया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की पीठ ने मार्च 2020 में खारिज कर दिया

● प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 नवंबर को एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें क्रिप्टोकरेंसी के विज्ञापनों में ''भ्रामक’’, ''बड़बोले दावों’’ और ''गैर-पारदर्शिता’’ पर नाराजगी जाहिर की गई और बताया गया कि क्यों ''बेलगाम क्रिप्टो मार्केट को मनीलॉन्ड्रिंग और आतंक के लिए वित्तीय मदद का जरिया नहीं बनने दिया जा सकता.’’

●रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास कहते हैं कि क्रिप्टोकरेंसी देश की ''व्यापक अर्थव्यवस्था और वित्तीय स्थिरता’’ के लिए खतरा हैं

●सरकार संसद के आगामी सत्र में इसे लेकर कोई विधेयक पेश कर सकती है. क्रिप्टो को शायद लेन-देन के कानूनी जरिए की इजाजत न मिले, लेकिन उसे धन-संपत्ति जैसा मान लिया जाए और शायद सेबी से नियंत्रित किया जाए

क्रिप्टो में कैसे करें कारोबार?
क्रिप्टो करीब 40 क्रिप्टो एक्सचेंज में खरीदा-बेचा जा सकता है. इनमें कॉइनबेस, बिनांस, कॉइनडीसीएक्स, वजीरएक्स और कॉइनस्विच कुबेर प्रमुख हैं. जानकार शुरू में ऐसी रकम का निवेश करने को कहते हैं, जो डूब जाए तो गम नहीं. अनाड़ियों को जानकारों से सलाह लेने को भी कहा जाता है.

क्रिप्टो निवेश के पांच कदम
1.  क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज की पहचान करें
2.  डिजिटल वॉलेट में पैसे डालने के लिए डेबिट कार्ड या वायर ट्रांसफर को जरिया बनाएं
3.  एक्सचेज में सूचीबद्ध क्रिप्टो का चयन करें

4.  ट्रेडिंग रणनीति में से चुनें: स्काल्पिंग (बिक्री के पहले थोड़े समय के लिए कॉइन को अपने पास रखें),  डे ट्रेडिंग (एक दिन तक संपत्ति को हाथ में रखना), स्विंग ट्रेडिंग (कुछ दिनों या हफ्तों तक अपनी स्थिति बरकरार रखना), पोजिशन ट्रेडिंग (लंबे समय के मूल्य बदलाव का इंतजार) वगैरह. मुनाफा क्रिप्टो अकाउंट से जुड़े बैंक खाते में जाता है. उसी खाते से क्रिप्टो खरीद का पैसा आता है

5. अपनी क्रिप्टो को हार्डवेयर या सॉफ्टवेयर वॉलेट में सुरक्षित रखें

किसने शुरू की क्रिप्टो करेंसी?
2008 में सातोषी नाकामोटो के छद्म नाम से कोई एक शख्स या कुछ लोगों के समूह ने श्वेत-पत्र निकाला और उसे विकेंद्रित भुगतान व्यवस्था का नाम दिया. उन लोगों ने उसे ग्लोबल वर्चुअल करेंसी बिटकॉइन कहा और बिटकॉइन डॉट ओरआरजी नाम से डोमेन पंजीकृत कराया. मकसद सीमाओं के आरपार दो व्यक्तियों के बीच लेन-देन को बिना किसी ''भरोसेमंद मध्यस्थ’’ को बीच में लाए संभव बनाना था

कैसे विकसित हुई यह टेक्नोलॉजी?
विकेंद्रित समुदाय ने ब्लॉकचेन नामक प्रोटोकॉल का इस्तेमाल किया. पहले पहल इसका प्रस्ताव 1991 के एक रिसर्च पेपर में आया. नाकामोटो और दूसरों ने उसमें 2009 में क्राउडसोर्सिंग के जरिए और सुधार किया, जिसे उन्होंने एक अच्छा सामाजिक काम बताया
आखिर इसकी उत्पत्ति कैसे हुई? 

हाल के दौर में दिवलिया होने की सबसे बड़ी घटना 2008 में सामने आई. अमेरिका में लीमन ब्रदर्स की वजह से उपजे संकट ने वित्तीय व्यवस्था की किसी और ढंग से कल्पना करने को प्रेरित किया. इस तरह एक विकेंद्रित मुद्रा व्यवस्था सामने आई, जहां लोग एक-दूसरे से लेनदेन इंटरनेट के जरिए कर पाएं और उन्हें केंद्रीय बैंक और केद्रीय नियम-कायदों जैसे केंद्रीय संस्थाओं पर निर्भर न रहना पड़े, जहां मुट्ठी भर अधिकारी फैसले करते हैं
लीमन ब्रदर्स

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