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आवरण कथाः अलहदा नजरिया

इंडिया टुडे में काम करने वाले कुछ योद्धा जिन्होंने कोविड को मात दी; संक्रमण होने और उससे लड़कर उबरने तथा उसके बाद के अपने अनुभवों को साझा करते हुए.

मंदार देवधर,  चीफ फोटोग्राफर मंदार देवधर,  चीफ फोटोग्राफर

कोविड पॉजिटिव: 8 अप्रैल
स्थिति: इलाजरत
जगह: मुंबई

मंदार देवधर, चीफ फोटोग्राफर

वर्ष 2020 के दौरान मुझे फोटो जर्नलिस्ट होने के नाते तकरीबन रोज बाहर जाना और महामारी को कैमरे में दर्ज करना होता था. इसी काम से मैं दिन भर बेहद एहतियात बरतते हुए घूमता और घर पहुंचते ही परिवार के किसी सदस्य के संपर्क में आए बगैर खुद को अच्छी तरह सैनिटाइज करता.

अपने सामान और बैग को घर के एक कोने में रख देता और उन्हें भी सैनिटाइज करता. मेरी पत्नी गृहणी हैं और महामारी के प्रकोप के बाद मुश्किल से ही कभी घर से बाहर निकलीं. मेरा 17 साल का बेटा भी घर पर रहकर एचएससी बोर्ड की परीक्षा की तैयारी करता रहा जो 23 अप्रैल से शुरू होने वाली थी.

इस दौरान मैं वायरस से बचने में सफल रहा था. यहां तक कि मार्च 2021 में दो दिन की गोवा यात्रा के बाद भी. 20 मार्च को मुंबई हवाई अड्डे पर पहुंचते ही मैंने आरटी-पीसीआर टेस्ट करवाया जो निगेटिव आया. पर वापसी के नौ दिन बाद मुझे कुछ खटका. मैं कमजोर महसूस कर रहा था. 1 अप्रैल आते-आते मुझे थोड़ी खांसी और सर्दी-जुकाम हुआ. पारिवारिक डॉक्टर की सलाह से मैंने दवाई ली.

अगले दिन मुझे बेहतर लगा, पर उस रात मेरी पत्नी को तेज बुखार और बदन दर्द होने लगा. 3 अप्रैल को मेरे बेटे को भी बुखार हो गया. वह एक दिन में ठीक हो गया, पर मेरी पत्नी और मैं 8 अप्रैल को कोविड पॉजिटिव निकले. डॉक्टरों ने हम दोनों को होम क्वारंटीन की सलाह दी.

मैं खुशकिस्मत हूं कि मुझे मददगार पड़ोसी मिले, जिन्होंने व्यस्तताओं के बावजूद हमें सारे वक्त घर का बना ताजा खाना दिया और जरूरत पडऩे पर वे किराने की और अन्य चीजें भी लाए. मेरी हाउसिंग सोसाइटी के आधे बाशिंदे पत्रकार हैं, लिहाजा काफी जागरूकता और आपसी सहयोग है.

असल में अप्रैल 2020 में हमारी बिल्डिंग शहर की उन पहली इमारतों में थी जिन्हें बीएमसी ने सील कर दिया था क्योंकि परिसर में पांच फोटो जर्नलिस्ट कोविड पॉजिटिव मिले. मैंने पूरे साल कोविड से जुड़ी तस्वीरों को कैमरे में कैद किया, पर कैमरे के पीछे से देखने के बजाय बीमारी को भीतर से अनुभव करना बहुत अलहदा है. इस बीमारी से बच निकलने के बाद मुझे लगता है कि मैं फिर काम पर लौटते वक्त कुछ बेहतर और अलग नजरिया ला सकता हूं.

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