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आवरण कथाः उम्मीद की चमक

एफएमसीजी क्षेत्र लॉकडाउन प्रतिबंधों के बुरे नतीजों से बच निकला—लेकिन उसकी वृद्धि सपाट है

सपाट वृद्धि डाबर के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर मोहित मल्होत्रा सपाट वृद्धि डाबर के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर मोहित मल्होत्रा

महामारी के दौरान अगर कोई चीज लोगों ने खरीदी है तो वह खाने-पीने और साफ-सफाई के सामान. वैसे कोविड-19 लॉकडाउन की वजह से सभी क्षेत्रों में उत्पादन केंद्र बंद हो गए, पर आवश्यक वस्तुओं का उत्पादन जल्दी ही फिर शुरू हो गया, और इस वर्ग में एफएमसीजी (फास्ट मूविंग कन्ज्यूमर गुड्स) का बड़ा हिस्सा आता है.

बहरहाल, देश के लगभग हर हिस्से में कड़ी बंदिशों की वजह से उत्पादन की गंभीर चुनौतियां भी थीं. अधिकतर एफएमसीजी कंपनियों ने अपना सामान्य कामकाज जून से शुरू कर दिया, और उसे मांग में आई अचानक उछाल तथा ग्रामीण मांग में बढ़ोतरी के साथ कच्चे माल की कम कीमतों का फायदा मिला. यह क्षेत्र दूसरों से बेहतर प्रदर्शन कर रहा है, लेकिन इसकी विकास दर इस साल उम्मीदों के मुताबिक नहीं है.


डेटा विश्लेषण फर्म नीलसन के मुताबिक, देश के एफएमसीजी क्षेत्र को 2020 में सपाट वृद्धि दर का सामना करना पड़ेगा क्योंकि लॉकडाउन बेहद कड़े थे और बार-बार बढ़े तथा उत्पादन पर बंदिशें लगीं, दुकानें बंद रहीं और अभी भी सामाजिक दूरी का पालन हो रहा है. जनवरी में फर्म ने इस क्षेत्र में 9-10 फीसद वृद्धि की भविष्यवाणी की थी, जो अप्रैल में इसका महज आधा (5-6 फीसद) रह गया था. उसे अब दोबारा संशोधित करके ब्रान्डेड एफएमसीजी क्षेत्र के लिए -1 से 1 फीसद वृद्धि का अनुमान लगाया गया है.


इधर, स्वास्थ्य और स्वच्छता उत्पाद कोविड बाद की दुनिया के लिए प्रमुख उपभोक्ता जरूरत बनकर उभरे हैं. ग्रामीण क्षेत्र की मांग से भी उद्योग को लाभ हुआ है, जो पूरे एफएमसीजी बिक्री का 36-37 फीसद है. असल में, ग्रामीण भारत में मांग में आए सुधार ने एफएमसीजी खिलाडिय़ों को प्रोत्साहित किया कि वे ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी बढ़ाएं—अपने वितरण नेटवर्क को दुरुस्त करें और वहां के लिए खासतौर पर उत्पाद पेश करें. कई कंपनियों ने लॉकडाउन के दौरान टियर 2, 3 और 4 शहरों और कस्बाई इलाकों में बेहतर वृद्धि दर की रिपोर्ट दी है. महामारी ने उपभोक्ताओं के खरीद का व्यवहार भी बदल दिया है क्योंकि लोग अब ऑनलाइन खरीदारी पर जोर दे रहे हैं.

केस स्टडी
मोहित मल्होत्रा,  50 वर्ष
मुख्य कार्यकारी अधिकारी, डाबर इंडिया


डाबर ने वित्त वर्ष 2019-20 में स्थिर वृद्धि दर्ज की थी. इसके अधिकारी बताते हैं कि फरवरी, 2020 तक डाबर राजस्व में 6 फीसद की वृद्धि दर हासिल करने और शुद्ध लाभ में 14 फीसद की वृद्धि दर दर्ज करने की राह पर था. लेकिन महामारी और लॉकडाउन ने मार्च में इस पर बुरा असर डाला. अंत में कंपनी ने इस वित्त वर्ष में कामकाज से राजस्व वृद्धि में 2 फीसद और शुद्ध लाभ में 5.8 फीसद की वृद्धि दर्ज की. कंपनी के मुताबिक, इसने मांग के बदले पैटर्न के हिसाब से खुद को ढाल लिया. मसलन, इसने आयुर्वेदिक इम्युनिटी बूस्टर का उत्पादन बढ़ा दिया.

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