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खुशीः किस चीज से मुझे खुशी मिलती है

अगर कोई नैतिक जीवन नहीं जीता, तो उसके लिए स्थायी रूप से खुशी का अनुभव करना असंभव है.

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खुशी के मंत्र खुशी के मंत्र

खुशी के मंत्र

अपूर्व लोचन, माइंडफुलनेस गुरु, लाइफ कोच और मेंटर

वर्तमान में रहो: जिसे हम खुशी कहते हैं, उसका 95 प्रतिशत हर दिन बस कुछ समय बैठने और वर्तमान पर ध्यान केंद्रित करने से हासिल किया जा सकता है. इसे खाना खाने और पानी पीने जैसा दैनिक अभ्यास बनाएं, कुछ ऐसा जिसके बिना आप रह नहीं सकते. खुशी के लिए यह महत्वपूर्ण है.

व्यायाम: दिनचर्या में व्यायाम शामिल होना चाहिए. दिनचर्या में ऐसे व्यायाम शामिल होने चाहिए जो लचीलापन, शक्ति और हृदय की मांस-पेशियों को मजबूत बनाते हों. तीनों का संयोजन बेहतर स्थिति में रखता है और आप ऊर्जा से भरे रहते हैं. तीनों में एक के बिना दूसरे का प्रभाव समान नहीं होता.

नैतिकतापूर्ण जीवन जिएं: अगर कोई नैतिक जीवन नहीं जीता, तो उसके लिए स्थायी रूप से खुशी का अनुभव करना असंभव है.

'ऐसा होता तो’ छोड़ें: यह वाक्यांश या विचार आपको दुखी कर सकता है. घटनाओं को उसी रूप में स्वीकार करें जैसे वे सामने आती हैं. इससे आप खुश रहेंगे. 'स्वीकृति’ की कमी अवसाद के प्रमुख कारणों में से एक है.

मैत्री फैलाएं: ब्रह्मांड में सद्भावना, क्षमा, करुणा और अहानिकर होने के आश्वासन की भावनाओं को महसूस करें और प्रसारित करें. प्रकृति के नियम हमेशा इन्हें वापस आपके पास भेजते हैं. जब आप वास्तविक इरादे के साथ ऐसा करते हैं, तो आप ऐसा करते समय भी आनंद का अनुभव करेंगे. यह गहरे आनंद की भावना लाता है.

करुणा और क्षमा: आयुर्वेद इस पर जोर देता है कि सभी बीमारियों का कारण मन में है. प्रत्येक जीवित प्राणी के लिए, जिसमें आप स्वयं भी शामिल हैं और विशेष रूप से उन लोगों के प्रति दया का भाव रखें जिन्होंने आपको चोट पहुंचाई है. द्वेष या क्रोध को बनाए रखना विषाक्तता का कारण बनता है और समय के साथ हम पुरानी बीमारियों के शिकार हो जाते हैं.

कृतज्ञता: कृतज्ञता का भाव सुबह का पहला भाव और रात का अंतिम भाव होना चाहिए. भविष्य में कोई स्वर्णपात्र पाने की मृगतृष्णा का पीछा न करें.   

—अदिति पै से बातचीत पर आधारित

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