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‘‘यही तो लाख टके का सवाल है कि परिसीमन के बाद क्या होगा-चुनाव होगा या पूर्ण राज्य का दर्जा मिलेगा’’

उत्तर प्रदेश के 62 वर्षीय भाजपा दिग्गज तथा पूर्व रेल राज्यमंत्री की नियुक्ति ही यह संकेत देने को काफी थी कि नरेंद्र मोदी की सरकार राजनैतिक प्रक्रिया बहाली का इरादा रखती है.

मनोज सिन्हा, उप-राज्यपाल, जम्मू-कश्मीर मनोज सिन्हा, उप-राज्यपाल, जम्मू-कश्मीर

मनोज सिन्हा 62 वर्ष
उप-राज्यपाल, जम्मू-कश्मीर


राजधानी श्रीनगर में एक पहाड़ी की चोटी पर स्थित राजभवन से डल झील और आसपास की पर्वत शृंखला का शानदार नजारा दिखता है. लेकिन जम्मू-कश्मीर में लगातार अशांति और उथल-पुथल की वजह से कोई भी महामहिम इस नजारे का लुत्फ उठाने की फुर्सत बमुश्किल ही पाता होगा. मनोज सिन्हा भी अपवाद नहीं हैं.

पिछले साल अगस्त में नियुक्त हुए मनोज सिन्हा 5 अगस्त, 2019 में जम्मू-कश्मीर को केंद्रशासित प्रदेश बनाए जाने के बाद दूसरे उप-राज्यपाल हैं और शुरू से ही उन्हें फुर्सत के मौके थोड़े मिले हैं. उत्तर प्रदेश के 62 वर्षीय भाजपा दिग्गज तथा पूर्व रेल राज्यमंत्री की नियुक्ति ही यह संकेत देने को काफी थी कि नरेंद्र मोदी की सरकार राजनैतिक प्रक्रिया बहाली का इरादा रखती है.

यह राजनैतिक प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 370 को बेमानी बना देने के बाद से ही ठप है. इधर, 24 जून को प्रधानमंत्री ने कश्मीरी नेताओं को खुले मन से राजनैतिक बातचीत के लिए निमंत्रण भेजकर बुलाया, तो उसका आंशिक श्रेय सिन्हा भी ले सकते हैं, क्योंकि इनमें कई नेता नजरबंदी और हिरासत में रह चुके हैं और भाजपा उन पर तरह-तरह के तोहमत मढ़ती रही है. इस बातचीत को जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाली की लंबी प्रक्रिया का हिस्सा माना जा गया है. 

अब आगे निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन और उसके बाद विधानसभा चुनाव कराने का काफी मुश्किल काम है. इस बीच जम्मू-कश्मीर के बेचैन युवाओं को रोजगार मुहैया कराने और विकास की फौरन जरूरत है.

इस केंद्रशासित प्रदेश को औद्योगिक हब में बदल देने के ऊंचे-ऊंचे वादों के बावजूद जमीन पर दिखाने को ज्यादा कुछ नहीं है. ग्रुप एडिटोरियल डायरेक्टर (पब्लिशिंग) राज चेंगप्पा से विस्तृत बातचीत में उप-राज्यपाल सिन्हा ने विवादास्पद मसलों और घाटी में अमन और तेज प्रगति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के बारे में खुलकर बात की. प्रमुख अंश:

● प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ जम्मू-कश्मीर के नेताओं की 24 जून को बैठक के बाद राजनैतिक प्रक्रिया शुरू हुई है. इसका नतीजा क्या रहा है?

राजनैतिक प्रक्रिया को बस प्रधानमंत्री की मीटिंग से मत जोडि़ए. प्रयास पहले ही शुरू हो गया था. जब मुझे यह कार्यभार दिया गया और मैं प्रधानमंत्री से मिलने गया तो उन्होंने खास बातें कही थीं. एक, संवाद जारी रखिए लोगों से. और दूसरे, ग्रासरूट डेमोक्रेसी (जमीन स्तर का लोकतंत्र) को जल्दी से जल्दी मजबूत करने की जरूरत है. मुझे लगता है कि प्रक्रिया पहले ही शुरू कर दी गई थी.

लंबे समय बाद राज्य में त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था लागू की गई. आप किसी से भी पूछ सकते हैं कि लंबे समय बाद फ्री, फेयर, ट्रांसपेरेंट और वायलेंस-फ्री इलेक्शन हुआ. जिन जिलों में 5-7 फीसद वोटिंग होती थी, वहां भी बहुत उत्साह के साथ युवा और महिलाओं ने हिस्सेदारी की. बीसों जिले में डीडीसी (ब्लॉक डेवलपमेंट काउंसिल) का गठन हुआ. प्रधानमंत्री के साथ सर्वदलीय बैठक सौहार्दपूर्ण वातावरण में हुई. अच्छी शुरुआत से ही आधी दूरी तय हो जाती है.

● विपक्षी नेता पूछते हैं कि पहले परिसीमन, फिर चुनाव और उसके बाद राज्य की दर्जा बहाली की बात क्यों है?

पिछले 15 अगस्त को प्रधानमंत्री ने लाल किले की प्राचीर से साफ-साफ कहा था कि डिलिमिटेशन कमिशन (परिसीमन आयोग) का काम खत्म हो जाएगा तो वहां विधानसभा के चुनाव होंगे. यही बात केंद्रीय गृह मंत्री ने संसद में कही थी. आपको पता है कि पार्लियामेंट के फ्लोर पर कही बात का महत्व क्या है—वही होना है. अब वह प्रक्रिया धीरे-धीरे आगे बढ़ रही है.

डिलिमिटेशन की प्रक्रिया पूरी हो जाए तो चुनाव आयोग यह तय करने की संवैधानिक संस्था है कि चुनाव कब होंगे, कैसे होंगे. यूटी (केंद्रशासित प्रदेश) बनने के बाद अगर रिऑर्गनाइजेशन ऐक्ट पढ़ेंगे तो उसमें असेंबली में सीटों की संख्या बढ़ गई है. इसलिए डिलिमिटेशन के बिना चुनाव नहीं हो सकते.

कई लोग तर्क दे रहे हैं कि असम में तो नहीं हुआ, तो वह तर्क यहां चलता नहीं है. डिलिमिटेशन कमिशन बना है पार्लियामेंट के ऐक्ट से. हमारे चुनाव आयोग के बारे में सामान्य रूप से दुनिया भर में अच्छी धारणा है. हमें चुनाव आयोग और परिसीमन आयोग में भरोसा रखना चाहिए.

●विपक्षी नेताओं का कहना है कि राज्य का दर्जा पहले क्यों नहीं बहाल किया जा सकता?
यह तो कोई कह ही नहीं रहा है कि राज्य नहीं बनाएंगे. प्रधानमंत्री और गृह मंत्री दोनों कह चुके हैं कि सही समय पर राज्य का दर्जा बहाल कर दिया जाएगा. उस समय का इंतजार करना चाहिए. अगर डिलिमिटेशन नहीं होगा तो चुनाव कैसे होगा? डिलिमिटेशन हो जाने दीजिए, उसके बाद यह तो लाख टके का सवाल है कि पहले चुनाव होगा या स्टेटहुड मिलेगा.  

● कश्मीर की पार्टियां अनुच्छेद 370 को हटाए जाने को चुनौती दे रही हैं और सुप्रीम कोर्ट में अपील कर चुकी हैं.
सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले का इंतजार करना चाहिए. आप सुप्रीम कोर्ट के कई निर्देश ऐसा पाएंगे कि कोई मामला अदालत में हो तो उसके पक्ष या विपक्ष में सार्वजनिक माहौल बनाना असंवैधानिक और गैर-कानूनी है.

● प्रधानमंत्री ने कहा है कि अभी भी गिरफ्तार नेताओं की रिहाई और मामले की समीक्षा के लिए एक कमेटी बनाई जाएगी. क्या वह कमेटी बन गई है?

मोटे तौर पर कहें तो कोई भी राजनैतिक नेता अब हिरासत में नहीं है. हिरासत वालों की दो कैटेगरी है. कैटेगरी ए: राजनैतिक व्यक्ति. कैटेगरी बी: जो सीआरपीसी, आइपीसी जैसे कानूनों के तहत आतंकवाद या आतंकी फंडिंग के लिए गिरफ्तार हैं. कैटेगरी बी वालों की रिहाई कैसे हो सकती है? इसके बावजूद हमने गृह मंत्री के निर्देश पर एक कमेटी बनाई है. प्रमुख सचिव (गृह) कमेटी के मुखिया हैं और कमेटी हरेक मामले पर अलग से गौर करेगी.

● जम्मू-कश्मीर को केंद्रशासित प्रदेश बने लगभग दो साल बीत गए और विकास को लेकर ऊंचे वादे भी किए गए. क्या हासिल हो पाया है?
इसे दो नजरिए से देखिए—पिछले 70 साल में क्या हुआ और पिछले दो साल में क्या हुआ है. दो साल में दो एम्स को मंजूरी दी गई. श्रीनगर एम्स के लिए अवंतीपोरा में काम शुरू हो गया है. दूसरा जम्मू में बनेगा. सात नए मेडिकल कॉलेज, दो कैंसर इंस्टीट्यूट, सात नर्सिंग कॉलेज, एक हड्डी संस्थान और बाल रोग केंद्र की मंजूरी मिली है.

दो सुरंगे जून में खोली गईं, एक बनीहाल के पास और जेड मोड़ टनल. राजमार्गों के निर्माण की रफ्तार देखिए. श्रीनगर को रेल लाइन से जोड़ने का काम लंबे समय से जारी है. 2022 तक श्रीनगर कन्याकुमारी से जुड़ जाएगा. इस साल संसद में जम्मू-कश्मीर केलिए 1.08 लाख करोड़ रु. का बजट पारित हुआ. आबादी के अनुपात में देखें तो यह बजट उत्तर प्रदेश और बिहार से 7-8 गुना ज्यादा है. यह उपलब्धि है.

● लेकिन नेताओं का कहना है कि बिजली कटौती वगैरह श्रीनगर में जारी है?
दो साल पहले और अब बिजली की हालत की तुलना कीजिए. दो साल में ही दो कोविड लहरों के बावजूद हर चीज में सुधार की उम्मीद करना तो असंभव को पाने जैसा है. आपने कितनी बिजली 70 साल में पैदा की? महज 3,450 मेगावाट. अगले चार-पांच साल में 3,500 मेगावाट बिजली और मिल जाएगी.

क्षमता 16,000 से 20,000 मेगावाट की है. सियालकोट में एक परियोजना 35 साल में पूरी नहीं हो सकी. जो आज विकास की बात कर रहे हैं, उनकी यह उपलब्धि है. हमने करीब 1,100 लंबित परियोजनाओं को पूरा किया है.

हमने ऐसी पारदर्शी व्यवस्था बनाई है कि कोई भी परियोजना प्रशासकीय मंजूरी, तकनीकी मंजूरी, वित्तीय मंजूरी और ई-टेंडर के बिना शुरू नहीं हो सकती. हमने उस रैकेट पर पूरी तरह ढक्कन लगा दिया है. अब सभी काम जिओ-टैग, सत्यापित और सार्वजनिक किया जाता है, ताकि लोग देख सकें कि काम सही ढंग से हो रहा है या नहीं.

● क्या भ्रष्टाचार घटा है?
भ्रष्टाचार सिर्फ घटा नहीं है, हमने इसे पूरी तरह रोक दिया है. यह अनेक लोगों के लिए समस्या बना हुआ था.

● लेकिन लोग तो अभी भी छोटे स्तर पर भ्रष्टाचार की शिकायत करते हैं. 
मैं यह नहीं कहता कि पूरी तरह खत्म हो गया है. लेकिन हमने व्यवस्था में बदलाव किया है. अब यह कोई नहीं कह सकता कि ऊपरी हलकों में भ्रष्टाचार है. कई लोग जो भ्रष्ट थे, वे जेल भेज दिए गए. हमने लोगों की संपत्ति जब्त कीं. हम भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस’ की बात ही नहीं कर रहे हैं, बल्कि कार्रवाई भी कर रहे हैं.

● उद्योगों को प्रोत्साहन के मामले में क्या है?
हम उद्योगों को 28,400 करोड़ रु. मूल्य का प्रोत्साहन दे रहे हैं. हम जीएसटी पर 300 फीसद प्रोत्साहन दे रहे हैं. जो प्रस्ताव आ रहे हैं, उससे मुझे कोई संदेह नहीं है कि अगले दो साल में राज्य में 30,000-35,000 करोड़ रु. निवेश दिखेगा और 5,00,000-6,00,000 लोगों को रोजगार मिलेगा. हमारे पास 20,000 करोड़ रु. के प्रस्ताव तो आ चुके हैं. हमारे उद्योग सचिव जम्मू गए हैं. प्रस्तावों पर जम्मू में बैठक की तारीख भी तय हो चुकी है.

● चिंता यह है कि फंड और उद्योग नीति तो अच्छी है मगर यह कागजों पर ही है?
उद्योग नीति महज तीन या चार महीने पहले आई है. तब से हम कोविड संक्रमण को ही काबू में रखने में जुटे हैं. आप तीन-चार महीने बाद फिर आइए. मैं आपको 20,000 करोड़ रु. का निवेश और परियोजनाएं दिखाऊंगा. मैं यह भी दिखाऊंगा कि जमीन पर काम शुरू हो चुका है.

● जम्मू-कश्मीर के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा है कि वे ‘दिल्ली की दूरी’ के साथ ‘दिल की दूरी’ मिटाना चाहते हैं. दूरी मिटाने की सरकार की क्या योजना है?
जम्मू-कश्मीर प्रधानमंत्री के दिल के बहुत करीब है. मैं उनसे लगातार राज्य के मसलों के बारे में मिलता रहता हूं. हर बार वे पूछते हैं कि फलां हाइवे तैयार हुआ क्या, फलां टनल बनी क्या, डीडीसी के फंड दे दिए गए क्या. डिस्ट्रिक्ट कैपेक्स बजट का मामला है तो जिले का बजट देश में कहीं और नहीं बना होगा.

यह यहां प्रधानमंत्री के निर्देश पर बनाया गया. पंचायत, बलॉक और डीडीसी स्तर पर व्यापक बहस के बाद बजट पास हुआ. पिछले साल डिस्ट्रिक्ट कैपेक्स बजट 5,136 करोड़ रु. का था. इस साल यह दोगुना 12,600 करोड़ रु. है. हमने विकास की काफी योजनाएं शुरू की हैं, जो ठीकठाक चल रही हैं.

● यह आशंका बनी हुई है कि जम्मू-कश्मीर के बाहर के लोग आएंगे, जमीन खरीदेंगे और स्थानीय नौकरियों और रोजगार पर काबिज हो जाएंगे.
कुछ थोड़े लोगों को छोड़कर, यहां आम तौर पर लोगों में ऐसा कोई डर नहीं है. आप पड़ताल कर सकते हैं कि किसी बाहरी को एक इंच भी जमीन मिली है क्या. जहां तक उद्योग की बात है, तो यहां कोई होटल बनाना चाहता है तो हम उसे जमीन मुहैया कराएंगे, अगर कोई अस्पताल बनाना चाहता है तो उसे जमीन देंगे.

अगर फोर्टिस, मेदांता या कोई भी अच्छा सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल यहां आना चाहता है तो उसे जमीन दी जाएगी. इसके अलावा यहां जमीन के कानून के मुताबिक जम्मू-कश्मीर का स्थानीय निवासी प्रमाण-पत्र होना अनिवार्य है. मोटे तौर 90 फीसद जमीन खेती की है, जिसे कोई बाहरी खरीद नहीं सकता. बाकी 10 फीसद जमीन सरकारी है, जिसे जम्मू-कश्मीर का निवासी भी नहीं खरीद सकता.

● हरियाणा और महाराष्ट्र की तरह यहां स्थानीय लोगों को नौकरियों में आरक्षण के मामले में क्या है? क्या यहां भी वैसी कोई योजना है?
जिनके पास स्थानीय निवासी प्रमाण-पत्र है, उसे ही यहां नौकरी मिल सकती है, किसी बाहरी को नहीं. अब आइएएस में तो आरक्षण होता नहीं है. अफवाह फैलाना और भावनाएं भड़काना बंद होना चाहिए. जम्मू-कश्मीर देश की मुख्यधारा की ओर बढ़ रहा है. यहां लोग विकास और रोजगार चाहते हैं. लेकिन कुछ लोग निहितस्वार्थ के चलते यहां शांति और समृद्धि नहीं चाहते.

● सुरक्षा के हालात कैसे हैं?
सुरक्षा के हालात काफी अच्छे हैं. पिछले कुछ साल के मुकाबले तीन गुना से अधिक पर्यटक इस बार आए हैं. सुरक्षा बलों की धमक बढ़ी है. हमने ऐसी रणनीति बनाई है कि हम आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे और इस बारे में देश में जनमत तैयार करेंगे.

हमारे सुरक्षा बलों के बीच तालमेल काफी अच्छा है, चाहे जम्मू-कश्मीर पुलिस हो, सेना या अर्द्धसैनिक बल. ड्रोन के रूप में एक नई चुनौती आ खड़ी हुई है. इससे निपटने के लिए सभी अहम ठिकानों पर जरूरी इंतजामात किए गए हैं.

● घाटी में लोग खुलकर अपनी बात कहने से डरते हैं और उनकी शिकायत है कि उनके साथ इज्जत से नहीं पेश आया जाता?

मैं यह पूरी जिम्मेदारी से कहता हूं कि जम्मू-कश्मीर में आम आदमी या किसी राजनैतिक व्यक्ति की बोली पर कोई पाबंदी नहीं है. हर रोज सभाएं होती हैं. किसी तरह की राजनैतिक गतिविधि या बहस-मुबाहिसे या लोकतंत्र को मजबूत करने वाले कार्यक्रमों पर कोई पाबंदी नहीं है, लेकिन राष्ट्र-विरोधी गतिविधि की इजाजत नहीं दी जाएगी. आम आदमी की इज्जत-आबरू पर कभी चोट नहीं पहुंचाई गई. ऐसा कभी होगा भी नहीं. हर नागरिक की गरिमा की रक्षा की जाएगी.

''जम्मू-कश्मीर निश्चित रूप से धीरे-धीरे शांति और विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है, यह मुख्यधारा का हिस्सा बनने की राह पर है. प्रधानमंत्री के साथ सर्वदलीय बैठक सौहार्दपूर्ण वातावरण में हुई. अच्छी शुरुआत से ही आधी दूरी तय हो जाती है.’’ 

‘‘हम उद्योग जगत को 28,400 करोड़ रु. मूल्य का प्रोत्साहन दे रहे हैं. मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है कि अगले दो साल में राज्य में 30,000-35,000 करोड़ रु. का निवेश दिखेगा, जिससे 5,00,000-6,00,000 लाख रोजगार पैदा होंगे’’

''राजनैतिक गतिविधि, बहस-मुवाहिशे या लोकतंत्र को मजबूत करने वाले कार्यक्रमों पर कोई पाबंदी नहीं है. हर नागरिक के सम्मान की रक्षा की जाएगी. लेकिन राष्ट्र-विरोधी गतिविधि की इजाजत नहीं दी जाएगी.’’

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