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‘‘हमारा लक्ष्य अक्तूबर तक 5जी लाने का है’’

5जी स्पेक्ट्रम की हफ्ते भर चली नीलामी 1 अगस्त को खत्म होने के एक दिन बाद केंद्रीय संचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने, जिनके पास रेल, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालयों की भी जिम्मेदारी है, ग्रुप एडिटोरिल डायरेक्टर राज चेंगप्पा के साथ इसके नतीजों से जुड़े कीमतों, उपलब्धता, सुरक्षा जैसे तमाम मुद्दों पर बातचीत की. विशेष बातचीत के अंश:

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अश्विनी वैष्णव अश्विनी वैष्णव

 5जी नीलामी के नतीजों से कितने संतुष्ट हैं?

यह कामयाब रही और इससे समूचे टेलीकॉम क्षेत्र की ढांचागत और प्रक्रियागत सुधार प्रक्रियाओं की उस पूरी शृंखला की झलक मिलती है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंजाम दिया है. नीलामी से पहले तमाम अनुमान कहते थे कि हमें 80,000 करोड़ रुपए और 1 लाख करोड़ रुपए के बीच मिलेंगे, पर जो आंकड़े आए हैं—1.5 लाख करोड़ रुपए—उनसे संकेत मिलता है कि उद्योग जिन गहरी परेशानियों से घिरा था, उनसे बाहर आ रहा है.

 भारत में हमें कितनी तेजी से अपने फोन पर 5जी मिल सकता है?

हम उद्योग जगत के साथ तालमेल बनाकर काम कर रहे हैं. नीलामी से पहले भी हमने आग्रह किया कि जहां तक मुमकिन हो देश भर में उपकरण स्थापित करना शुरू कीजिए. मध्य-अगस्त से पहले हमें स्पेक्ट्रम आवंटित कर पाना चाहिए और फिर उपकरण स्थापित करके, उन्हें ट्यून करके और उन्हें चलाकर हमें अक्तूबर तक 5जी शुरू कर पाना चाहिए.

 दुनिया भर में 5जी नेटवर्क को लेकर सुरक्षा और टावरों नजदीक रह रहे लोगों पर तीव्र रेडिएशन के नुक्सानदायक प्रभावों के बारे में चिंता रही है.

इन चीजों को हमें उचित प्रमाण और वैज्ञानिक डेटा की रोशनी में देखना चाहिए. मैं कहूंगा कि अगर इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड (ईएमएफ) के लिए वैश्विक मानक 100 है, तो भारत में ईएमएफ का औसत स्तर महज 10 या वैश्विक मानक का दसवां हिस्सा है.

हमारे यहां रेडिएशन का इतना कम स्तर क्यों होना चाहिए जब यह बुनियादी तौर पर अच्छी सेवा देने की हमारी क्षमता में रुकावट डालता है? तो हमारे यहां जहां बहुत निरापद और सुरक्षित वातावरण निश्चित रूप से है, हमें अपने टेलीकॉम क्षेत्र की सेवाओं में सुधार लाने के लिए ईएमएफ को मौजूदा स्तर पर रखने के बजाए इसे बढ़ाने पर भी विचार करना चाहिए.

 अमेरिका में कुछेक एयरलाइनों ने 5जी की स्थापना की विरोध किया था. उनका कहना था कि यह हवाई जहाज की इलेक्ट्रॉनिक मशीनों के साथ छेड़छाड़ कर सकता है. भारत में भी क्या ऐसी परेशानी होगी?

यह अमेरिका की खास समस्या है क्योंकि 5जी के लिए उन्होंने जिन फ्रीक्वेंसी का इस्तेमाल किया, उनमें से कुछ इसका इस्तेमाल करने वाले पुराने हवाई जहाजों पर असर डाल सकती थीं. भारत में हमने, और दरअसल ज्यादा देशों ने, हवाई जहाजों के उपकरणों के लिए इस्तेमाल फ्रीक्वेंसी और 5जी के लिए जो आवृत्तियां इस्तेमाल की जाएंगी, दोनों के बीच अच्छा-खासा फासला छोड़ दिया है.

 पहले हुआवे से 5जी टेक्नोलॉजी खरीदने को लेकर भी सुरक्षा चिंताए जाहिर की गई थीं. क्या आपने इस पर गौर किया है?

जब प्रधानमंत्री मोदी ने आत्मनिर्भर भारत कार्यक्रम की घोषणा की, तब जो लक्ष्य तय किए गए, उनमें एक शुरू से 5जी नेटवर्क शुरू से आखिर तक स्वदेशी तरीकों से विकसित करना भी था. उसमें न केवल मूल नेटवर्क का निर्माण और डिजाइन तैयार करना बल्कि नेटवर्क मैनेजमेंट सिस्टम, रेडियो कनेक्शंस और इसे कारगर बनाने के लिए जरूरी हर चीज शामिल थी.

स्वदेशी 5जी नेटवर्क अब सी-डॉट (सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स) ने भारतीय निजी उद्यमियों की पूरी टोली के साथ मिलकर विकसित किया है, जो इसमें अपनी विशेषज्ञता और संसाधन लगाने के लिए आगे आए. यह गेम-चेंजर होने जा रहा है. वे इन्हें न केवल भारत में स्थापित करने जा रहे हैं बल्कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर भी मिल रहे हैं.

 भारत में निर्मित इस 5जी नेटवर्क के तैयार होने से पहले आप यह कैसे पक्का करेंगे कि रिलायंस जियो और एयरटेल सरीखी कंपनियां, जो विदेशी नेटवर्कों के साथ हाथ मिला रही हैं, हमारे सुरक्षा सरोकार को पूरा करें?

इन कंपनियों में बहुत सुपरिभाषित और भरोसेमंद स्रोत व्यवस्था है. यह ऐसी व्यवस्था है जो बहुत वैज्ञानिक ढंग से निर्मित और बहुत उम्दा तरीके से परिभाषित है, इसलिए ऐसा कोई भी उपकरण इस्तेमाल नहीं किया जाएगा जो हमारे विश्वस्त व्यवस्था ढांचे पर खरा नहीं उतरता.

 क्या भारत के लोग 5जी वाले सेल फोन और टैरिफ का खर्च उठा पाएंगे?

ज्यों ही 5जी दायरा विकसित होता है, हैंडसेट मैन्युफैक्चरर्स उत्पादन बढ़ा देंगे. भारत आज दुनिया में मोबाइल फोन का दूसरा सबसे बड़ा मैन्युफैक्चरर है और 25-30 फीसद के करीब नए मोबाइल फोन पहले ही 5जी-समर्थ हैं. हैंडसेट की कीमतें हर साल कम हो रही हैं और 5जी हैंडसेट 15,000 रुपए में मिल रहा है. टैरिफ में भारत की टेलीकम्युनिकेशन सेवा आज सबसे सस्ती है. 5जी के मामले में भी यही उम्मीद है.

 सेवाओं की गुणवत्ता के संदर्भ में हमारे यहां 4जी के साथ भी परेशानियां रही थीं, जिसमें बार-बार कॉल ड्रॉप और कनेक्ट नहीं हो पाना शामिल था.

तीन चीजें मिलकर यह दायरा बनता है, जो अच्छी गुणवत्ता की सेवाएं देता है. पहला है स्पेक्ट्रम उपलब्ध होना. हाल में हुई नीलामी में बहुत बड़ी संख्या में उन कमियों को पूरा कर दिया गया है जो कई ऑपरेटरों के लिए स्पेक्ट्रम में थीं.

दूसरे, हमें बड़ी तादाद में टावर की जरूरत है—प्रधानमंत्री मोदी की तरफ से शुरू किए गए सुधारों के नतीजतन टावर की इजाजत कुछ घंटों में आ रही हैं जो पहले कुछ महीनों में आया करती थी. तीसरी बात फाइबरीकरण बढ़ाना है और पीएम का गतिशक्ति पोर्टल पक्का करता है कि सारा बुनियादी ढांचा समन्वित हो. सारे राज्य साथ आए हैं. इनसे चीजों की रफ्तार खासी तेज हो सकेगी.

 क्या स्पेक्ट्रम की कीमत के बारे में आपके फैसले पर 2जी घोटाले के प्रेत का असर पड़ रहा है?

बिल्कुल नहीं. मोदी सरकार में नीतिगत स्पष्टता है. हमने भारत में ग्राहकों की विशाल तादाद पर आधारित मॉडल विकसित किया है, जो यह पक्का करता है कि हमारे स्पेक्ट्रम की कीमत पर्याप्त तय हो. कुछ देशों ने स्पेक्ट्रम व्यावहारिक तौर पर मुफ्त मुहैया किया है, पर हमारी अर्थव्यवस्था को देखते हुए कीमत वाजिब है.

 आखिर में, सार्वजनिक क्षेत्र की संस्था बीएसएनएल में जान फूंकने के लिए आप इतना सारा पैसा—1.64 लाख करोड़ रुपए—क्यों झोंक रहे हैं?

बीएसएनएल टेलीकॉम बाजार को स्थिरता देने वाली बहुत अहम ताकत है. टेलीकॉम रणनीतिक क्षेत्र है जो देश की सुरक्षा पर बहुत ज्यादा असर डालता है. तकरीबन सारा अहम रक्षा टेलीकॉम ढांचा बीएसएनएल खड़ा करता है. दूसरे, बीएसएनएल गरीब से भी गरीब इलाकों की मदद कर रहा है, चाहे ओडिशा के गांव हों या छत्तीसगढ़, झारखंड या पूर्वोत्तर और सरहदी इलाकों के गांव, जहां दूसरी टेलीकॉम कंपनियों नहीं है.

तीसरे, जब हमारे पास 5जी सहित नई किस्म का उपकरण होगा, तो उसके भारत में निर्मित होने के चलते हमें विशाल प्लेटफॉर्म की जरूरत होगी जो इन तमाम चीजों का परीक्षण कर सके. इस काम में हम बीएसएनएल का इस्तेमाल कर सकते हैं. चौथा, बीएसएनएल का आज भी 10 करोड़ से ज्यादा का ग्राहक आधार है. हमारा फलसफा यह है कि बीएसएनएल जीवंत, टेक्नोलॉजी में निपुण कंपनी हो.

 अंतत: निजी हाथों में सौंपने से पहले एयर इंडिया को भी पीएसयू की तरह चलाते रहने के लिए लंबे वक्त तक कुछ ऐसा ही तर्क दिया जाता रहा था.

बीएसएनएल के लिए हमारे पास स्पष्ट तरीके से तय बिजनेस प्लान है. हम नेटवर्कों को अपग्रेड करने और उसकी जरूरत के मुताबिक स्पेक्ट्रम देने के लिए जरूरी मूल पूंजी मुहैया कर रहे हैं. हमें इसकी कामयाबी का पूरा भरोसा है.

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