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बातचीतः जिन्हें भाजपा की कार्यप्रणाली का ज्ञान नहीं वे ही अटकलें लगाते हैं

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार और भाजपा संगठन में बदलाव की चर्चाओं के बीच उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने 6 जून की सुबह लखनऊ में गौतमपल्ली स्थित अपने आवास पर इंडिया टुडे के असिस्टेंट एडिटर आशीष मिश्र से बातचीत की. कुछ अंश:

 उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार और भाजपा संगठन में बदलाव की चर्चाओं के बीच उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने 6 जून की सुबह लखनऊ में गौतमपल्ली स्थित अपने आवास पर इंडिया टुडे के असिस्टेंट एडिटर आशीष मिश्र से बातचीत की. कुछ अंश:

 उत्तर प्रदेश में 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के सामने क्या चुनौतियां हैं?

कोरोना जैसी महामारी पहले कभी नहीं हुई. अब स्वास्थ्य जनता की प्राथमिकता बन गया है. जितना हो सकता है केंद्र और राज्य की सरकार पूरी प्रतिष्ठा लगाकर लोगों को बचाने की कोशि‍श कर रही हैं. 

कोरोना की दूसरी लहर में सरकार के कामकाज पर सवाल खड़े हुए हैं?

पहले भी जब देश पर कोई संकट आता था तो पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी विपक्ष की भूमिका निभाते थे. संकट के समय वे हमेशा सत्ता पक्ष के साथ खड़े रहते थे. कोरोना काल में पहली बार यह देखने को मिला कि सभी विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की छवि खराब करने का काम किया. सपा प्रमुख अखि‍लेश यादव की भूमिका सबसे ज्यादा खराब रही.

 भाजपा के प्रदेश संगठन में बदलाव की अटकलें लगाई जा रही हैं? 
भाजपा कार्यकर्ता आधारित पार्टी है. कार्यकर्ता के निर्माण और उन्हें सक्रिय रखने के लिए रैली, प्रशि‍क्षण, बैठक और सम्मेलन नियमित होते रहते हैं. जिन्हें भाजपा की कार्यप्रणाली का ज्ञान नहीं वे ही अटकलें लगाते रहते हैं. 

 पंचायत चुनाव में भाजपा के कमजोर प्रदर्शन की क्या वजह मानते हैं?
पंचायत चुनाव में भाजपा का यह पहला अनुभव था जब सभी जगह पर प्रत्याशी खड़ा किया. मेरा मानना है कि जब चुनाव चिन्ह पर चुनाव नहीं हो रहा हो तो प्रत्याशी नहीं खड़ा करना चाहिए था. हम लोगों से गलती हुई. अगर चुनाव चिन्ह होता तो परिणाम अलग आते. फिर भी, भाजपा ने बहुत बेहतर प्रदर्शन किया है. जिला पंचायत सदस्यों का चुनाव भाजपा बड़ी संख्या में जीतेगी. 

 दलित और पिछड़ी जाति के बीच भाजपा का जनाधार कम हो रहा है? 
पार्टी के पास पासी, जाटव, कठेरिया, कोरी, वाल्मीकि, खटीक, धोबी समेत अनुसूचित जाति के सभी वर्गों में नेतृत्व है. ओबीसी में भी कुर्मी, मौर्य, पाल, सैनी, बिंद, निषाद, मल्लाह, प्रजापति सभी जातियों में भाजपा के पास नेतृत्व है. भाजपा सभी जातियों की बात सुनती है और सभी को मौका देती है. 

 अगले विधानसभा चुनाव में भाजपा की लड़ाई किस दल से मानते हैं?
ईमानदारी, अपराध मुक्त, कानून का राज, विकास ऐसे कई सारे बिंदुओं पर योगी आदित्यनाथ की सरकार के कामकाज के आगे अखि‍लेश यादव की पिछली सरकार कहीं नहीं ठहरती है. कोरोना काल में जहां योगी जी गांव-गांव गए वहीं अखि‍लेश ने खुद को बंगले में कैद कर रखा. ऐसे में जनता अखि‍लेश को क्यों पसंद करेगी. 

 प्रदेश भाजपा के प्रकोष्ठ और मोर्चा का गठन नहीं हो पाया है? 
प्रक्रिया चल रही है. दो हफ्ते के भीतर इनका गठन हो जाएगा. 

 भाजपा नेताओं ने प्रदेश सरकार के कामकाज के खि‍लाफ पत्र लिखे हैं?
जिस पार्टी के पास तीन सौ से अधि‍क विधायक हों. साठ से अधि‍क सांसद हों, हजारों जनप्रतिनिधि हों, उनमें दो-तीन नेताओं ने अगर सुझाव के लिए पत्र लिखे हों तो उसे किसी प्रकार का विवाद नहीं मानना चाहिए. 

 बीते कुछ दिनों में भाजपा नेताओं के अपराधि‍यों से गठजोड़ की बातें भी सामने आई हैं?
अपराधि‍यों को संरक्षण देने वाला चाहे वह प्रदेश सरकार में मंत्री हो या संगठन में पदाधिकारी, सब पर सख्त कार्रवाई हो रही है. 

 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने कितनी सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है?
जितनी सीटें भाजपा के पास हैं, उससे अधि‍क सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है. हम 51 प्रतिशत से अधि‍क वोट हासिल करेंगे. 

 मंत्रिमंडल विस्तार की संभावना है?
अभी कोई चर्चा नहीं हुई है. कोरोना महामारी में सरकार का ध्यान केवल लोगों की सुरक्षा पर है. अगले तीन महीने तक पार्टी जनता के बीच जाकर उनकी सेवा पर ध्यान लगाएगी. 

 प्रदेश भाजपा और सरकार में कई पावर सेंटर बनने के आरोप लग रहे हैं?
प्रदेश सरकार योगी जी के नेतृत्व में काम कर रही है. संगठन राष्ट्रीय अध्यक्ष के नेतृत्व में काम कर रहा है.
 
 भाजपा और बसपा के बीच तालमेल की अटकलें लगाई जा रही हैं?
यह सब खबरें निराधार हैं. बहन जी (मायावती) स्वयं सपा से ज्यादा ताकतवर हैं.

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