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बातचीतः भाजपा पिछड़ा विरोधी होती तो मैं डिप्टी सीएम न बन पाता

उत्तर प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने एसोसिएट एडिटर आशीष मिश्र से भाजपा और पिछड़ी जातियों के बीच संबंध पर विस्तार से बात की. पेश हैं बातचीत के चुनिंदा अंश:

क्या समस्या है? लखनऊ में अपने आवास पर जनता दर्शन में समस्याएं सुनते उप-मुख्मंयत्री मौर्य क्या समस्या है? लखनऊ में अपने आवास पर जनता दर्शन में समस्याएं सुनते उप-मुख्मंयत्री मौर्य

उत्तर प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने एसोसिएट एडिटर आशीष मिश्र से भाजपा और पिछड़ी जातियों के बीच संबंध पर विस्तार से बात की. पेश हैं बातचीत के चुनिंदा अंश:

ओबीसी मतदाता भाजपा को वोट क्यों दे?
पिछड़ा वर्ग ही नहीं, अनुसूचित वर्ग, सामान्य वर्ग भाजपा की वे शक्तिशाली भुजाएं हैं जिसे तोड़ने की कोशिश सारा विपक्ष एक साथ मिलकर कर रहा है. लेकिन इनके मंसूबे कभी सफल न होंगे.

विपक्षी दल भाजपा को पिछड़ा विरोधी बता रहे हैं.
भाजपा अगर पिछड़ा विरोधी होती तो केशव प्रसाद मौर्य कभी उपमुख्यमंत्री नहीं बन पाते, देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी न होते. भाजपा सरकार की योजनाएं समान रूप से सभी जातियों तक पहुंची हैं.

2017 के विधानसभा चुनाव के बाद आपको मुख्यमंत्री न बनाने पर पिछड़ी जातियों में निराशा है.
अपेक्षाओं को मैं गलत नहीं मानता. यूपी में सपा, बसपा और कांग्रेस ने पिछड़े वर्ग के लोगों को वह सम्मान नहीं दिया जो भाजपा ने दिया है. मुझे जिस प्रकार का स्थान भाजपा ने दिया है वैसा कभी किसी और पार्टी ने किसी को भी नहीं दिया.

चुनाव से पहले आप भी काफी सक्रिय हैं. विकास योजनाओं के उद्घाटन के लिए जिलों का दौरा कर रहे हैं. यह पिछड़े वर्ग के मतदाताओं पर डोरे डालने की पार्टी की योजना तो नहीं?

मैं अति पिछड़ी जाति और बहुत गरीब परिवार में जन्मा हूं. इस नाते भले ही लोग मुझे पिछड़ों का नेता मानते हों पर मैं सभी वर्गों के प्रति अपना उत्तरदायित्व निभा रहा हूं. विकास योजनाएं जनता की हैं, सरकार में होने के कारण जिन्हें जनता को सौंपना मेरी जिम्मेदारी है.

 ●  ओबीसी जनगणना और आरक्षण की मांग हो रही है. क्या कहेंगे?
पिछड़े वर्ग के लोग कई क्षेत्रों में पीछे छूट गए हैं. उन्हें बराबरी पर लाना भाजपा का सिद्धांत है. विपक्षी दलों को यही बर्दाश्त नहीं हो रहा.

अपनी तमाम कोशिशों के बावजूद भाजपा यादव मतदाताओं को सपा से दूर करने में कामयाब नहीं हो पाई है?

यह कहना गलत होगा. 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव और 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को यूपी में बड़ी संख्या में यदुवंशियों और राजवंशियों का वोट मिला. ये लोग अब समझ चुके हैं कि विपक्षी दल इनका समर्थन लेकर सत्ता तो प्राप्त करते हैं लेकिन इनके जीवनस्तर में कोई सुधार नहीं करते.

आपके और मुख्यमंत्री योगी के बीच मनमुटाव की बातें बीते साढ़े चार साल से चल रही थीं.

यह अफवाह विपक्षी दल फैला रहे थे. मुख्यमंत्री योगी और मैं मिलकर काम कर रहे हैं. मेरे घर सुख-दुख के हर अवसर पर मुख्यमंत्री का हमेशा साथ मिला है. पिछले वर्ष उनके पिताजी के निधन पर आयोजित शोक सभा का संचालन मैंने किया था.

2022 के विधानसभा चुनाव में सपा, बसपा और कांग्रेस में से कौन-सा दल भाजपा के लिए खतरा है?

सपा, बसपा, कांग्रेस तीनों मिल जाएं तो भी भाजपा के लिए कोई खतरा नहीं. भाजपा का नारा है ‘‘100 में से 60 प्रतिशत हमारा, 40 प्रतिशत में बंटवारा और बंटवारे में भी हमारा’’. पार्टी इसे जमीनी रूप दे चुकी है.

आगामी विधानसभा चुनाव के मुद्दे क्या होंगे?

भाजपा तो विकास और सुशासन के मुद्दे पर चुनाव लड़ती है. हम जब विकास और सुशासन की बात करते हैं तो विपक्षी पार्टियां जातिवाद और तुष्टीकरण की राह पकड़ लेती हैं. हम गरीब और किसान की बात करते हैं तो विपक्षी परिवार की बात करने लगते हैं. प्रदेश की 24 करोड़ जनता से जुड़े मुद्दों पर बहस की हिक्वमत विपक्ष के पास नहीं है.

चुनाव से पहले प्रदेश की सड़कों में गड्ढों को विपक्षी दल मुद्दा बना रहे हैं.
उत्तर प्रदेश के इतिहास में पिछले 15 वर्ष के दौरान विपक्षी दलों की सरकार से बहुत अच्छा काम हमारी सरकार के दौरान हुआ है. उम्दा सड़कें कम लागत में पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए बनाई गई हैं.

●  अगर 2022 के विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा की सरकार दोबारा बनती है तो क्या पिछड़ी जाति का नेता मुख्यमंत्री बन सकता है?
यह प्रश्न काल्पनिक है. अभी हमारा लक्ष्य वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में 325 सीटों पर कमल खिलाने का है.

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