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गांवों को ताकत देने से घटी बेरोजगारीः भूपेश बघेल

बघेल ने अपने राजनैतिक कौशल का भी परिचय दिया. पड़ोसी मध्य प्रदेश में कांग्रेस की कमलनाथ सरकार गिर गई और राजस्थान में गहलोत ने किसी तरह अपनी सरकार बचाई.

जनता के बीच रायपुर के जाजगिरि गांव में गोवर्धन पूजा के अवसर पर मुख्यमंत्री बघेल जनता के बीच रायपुर के जाजगिरि गांव में गोवर्धन पूजा के अवसर पर मुख्यमंत्री बघेल

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार ने दो साल पूरे कर लिए. इस दौरान मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य में न केवल राजनैतिक स्थिरता प्रदान की बल्कि अर्थव्यवस्था पर कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से लगाए गए लॉकडाउन के असर को विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के जरिए सीमित कर दिया. यही नहीं, बघेल ने अपने राजनैतिक कौशल का भी परिचय दिया. पड़ोसी मध्य प्रदेश में कांग्रेस की कमलनाथ सरकार गिर गई और राजस्थान में गहलोत ने किसी तरह अपनी सरकार बचाई.

इस बीच, बघेल ने न केवल अपने राज्य को कांग्रेस का प्रमुख गढ़ बना दिया बल्कि मजबूत विपक्ष को अस्थिरता पैदा करने का कोई मौका नहीं दिया, हालांकि महामारी और और राज्य में माओवादी उग्रवाद की वजह से उनके सामने भी कम चुनौतियां नहीं थीं. कोरोना लॉकडाउन के दौरान लाखों प्रवासी मजदूरों के छत्तीसगढ़ वापस आने से राज्य में कोविड फैला लेकिन मोटे तौर पर महामारी काबू में रही. ग्रामीणों, आदिवासियों और किसानों के लिए देश की बेहतरीन योजनाएं चलाने वाले छत्तीसगढ़ में कभी रोजगार की कमी नहीं रही.

लॉकडाउन की वजह से जब स्कूल-कॉलेज बंद हो गए तो उन्होंने ऑनलाइन और ऑफलाइन, दोनों तरह से शिक्षा जारी रखी. बस्तर जैसे आदिवासी इलाके में कनेक्टिविटी की दिक्कत थी, लिहाजा वहां ब्लूटूथ के जरिए कक्षाएं लगाई जा रही हैं, जिसे स्थानीय लोग 'बुल्टु के बोल’ कह रहे हैं. बघेल पूरी विनम्रता के साथ कहते हैं, ‘‘शासन ने शिक्षकों को नहीं, बल्कि शिक्षकों ने शासन को रास्ता दिखाया है.’’

भारत में अमूमन लोकप्रिय राजनीति अर्थव्यवस्था बिगाड़ देती है, लेकिन बघेल ने सियासी और प्रशासनिक सूझ-बूझ के दम पर छत्तीसगढ़ में मंदी का असर नहीं होने दिया और वे यह बात गर्व से बताते हैं. राज्य में किसानों, बेरोजगारों और आदिवासियों के लिए विभिन्न योजनाओं के लाभ दिख रहे हैं. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इंडिया टुडे के संपादक अंशुमान तिवारी से अनेक मुद्दों पर बेबाकी से बातचीत की. प्रस्तुत हैं बातचीत के प्रमुख अंश:

• छत्तीसगढ़ में किसानों का आंदोलन नहीं दिखाई दे रहा है, क्या आपकी सरकार ने जो कृषि कानूनों में जो संशोधन किए हैं उनसे किसानों को एमएसपी की चिंता करनी बंद कर देनी चाहिए? 
छत्तीसगढ़ में किसान हितैषी सरकार है. मैं खुद किसान हूं इसलिए किसानों की समस्याओं को हमसे बेहतर कौन समझ सकता है. हमने विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर मंडी ऐक्ट को इस तरह मजबूत किया है कि केंद्र सरकार के कृषि कानूनों से छत्तीसगढ़ के किसानों का नुक्सान न हो.

अगर और कुछ करने की जरूरत हुई तो वह भी करेंगे. छत्तीसगढ़ में 94 प्रतिशत किसानों ने पिछले साल समर्थन मूल्य पर उपज बेचा था, इस साल किसानों का यह आंकड़ा 98 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना है क्योंकि पंजीयन कराने वाले किसानों की संख्या पिछले दो साल में 15 लाख 77 हजार से बढ़कर 21 लाख 29 हजार हो चुकी है. छत्तीसगढ़ में किसानों के हित पूरी तरह सुरक्षित हैं. हमारा किसान आंदोलन को पूरा समर्थन है. कांग्रेस की यह मांग है कि केंद्र सरकार एमएसपी की लिखित गारंटी दे जिससे यह सरकार मुकर रही है. 

• क्या आप केंद्र के नए कृषि‍ कानून मानेंगे या फिर उन्हें रोकने का वैधानिक रास्ता अपनाएंगे? 
कांग्रेस पार्टी केंद्र के कृषि कानूनों का विरोध करती है और इन्हें वापस लेने की किसान संगठनों की मांग का समर्थन करती है. हम जो भी वैधानिक रास्ता होगा वह अपनाएंगे. 

• राज्य में देश का सबसे ज्यादा धान का एमएसपी 2,500 रु. क्विंटल इस सीजन में भी सरकार दे पाएगी क्योंकि कोरोना ने खजाने पर विपरीत असर डाला है? 
केवल इस सीजन में ही नहीं, हम हमेशा इस दिशा में प्रयासरत रहेंगे कि किसानों को उपज की सही कीमत मिले. न केवल धान की, बल्कि मक्का, गन्ना समेत तमाम फसलों की भी इसीलिए हमने राजीव गांधी किसान न्याय योजना शुरू की है और इसके दायरे को अगले सीजन से और भी विस्तृत करने का निर्णय लिया है.

हमारी सरकार की प्राथमिकता ही गांव और किसान हैं इसलिए हम गांवों और किसानों के हितों में हर संभव कदम उठाने से कभी पीछे नहीं हटेंगे. हमने यह योजना कोरोना संकट के दौरान ही लॉन्च की है. जाहिर है कि हमें अपनी क्षमता पर भरोसा है. संकट के बावजूद इसी साल इस योजना के तहत 5,750 करोड़ रुपए आदान सहायता के रूप में किसानों के खातों तक हम पहुंचा रहे हैं.    

• कोरोना के मामले में एक समय छत्तीगढ़ का 80 प्रतिशत हिस्सा ग्रीन जोन था लेकिन अचानक केस बढ़ते गए. फिर भी राज्य टॉप 10 की सूची से बाहर ही रहा. सख्त लॉकडाउन से कोरोना पर काबू पाया लेकिन बेरोजगारी को कैसे राष्ट्रीय स्तर के मुकाबले काफी नीचे ले आए, जबकि राज्य में प्रवासी मजदूर भी काफी संक्चया में वापस आए?   
छत्तीसगढ़ में कोरोना संक्रमण कमोबेश नियंत्रण में ही रहा है. कुछ समय के लिए जब बड़ी संख्या में प्रवासी छत्तीसगढ़ी श्रमिक दूसरे राज्यों से आए तब संक्रमण का स्तर बढ़ा था लेकिन फिर नियंत्रण में आ गया. छत्तीसगढ़ में दूसरे राज्यों से लगभग 7 लाख श्रमिक वापस आए, यह एक बड़ी संख्या थी, हमने इनकी माकूल व्यवस्था की लगभग 21 हजार क्वारंटीन सेंटर बनाए. उनके भोजन, रहने और उपचार की व्यवस्था की. 

जहां तक राज्य में बेरोजगारी का प्रतिशत राष्ट्रीय स्तर से काफी कम रहने का सवाल है तो उसका कारण हमारी सरकार में पहले दिन से ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए उठाए गए कदम हैं. चाहे सुराजी ग्राम योजना हो, राजीव गांधी किसान न्याय योजना हो, समर्थन मूल्य पर वनोपज खरीद हो या गौधन न्याय जैसी योजना—इन सबका परिणाम है कि गांवों में लोगों के पास हमेशा रोजगार के अवसर उपलब्ध रहे.

कोरोना के संकट में जब लाखों लोग बाहर से आए तो हमने मनरेगा योजना के तहत सबको उनके घर के पास गांव में ही काम उपलब्ध कराया. एक समय हमने 26 लाख श्रमिकों को एक दिन में रोजगार उपलब्ध कराया जो उस समय पूरे देश में सबसे अधिक था. यही सब कारण है कि छत्तीसगढ़ की बेरोजगारी दर हमेशा देश में सबसे कम बेरोजगारी दर वाले राज्यों में रही है. 

• कोरोना से स्कूल-कॉलेज बंद रहे तो शहरी बच्चों ने ऑनलाइन पढ़ाई की. बस्तर के आदिवासी इलाकों और राज्य के ग्रामीण इलाकों में कनेक्टिविटी न होने से ऑनलाइन या ऑफलाइन पढ़ाई नहीं हो सकी. सरकार बच्चों-युवाओं की इस समस्या के प्रति क्या सोचती है? 
आपकी जानकारी सही नहीं है. हमने बच्चों के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह की पढ़ाई की व्यवस्था की थी और यह काफी सफल रही है. ‘पढ़ई तुंहर दुआर’ और ‘पढ़ई तुंहर पारा’ अभियानों के तहत दो लाख शिक्षकों ने गांव-गांव, मोहल्ले-मोहल्ले जाकर 29 लाख बच्चों को पढ़ाया. जिन क्षेत्रों में कनेक्टिविटी नहीं है, वहां ब्लू-टूथ के माध्यम से बच्चों को पढ़ाया जा रहा है.

बस्तर में इस कार्यक्रम को 'बुल्टू के बोल’ के नाम से जाना जाता है. वहां के स्थानीय लोग ब्लूटूथ को बुल्टू बोलते हैं. इसके लाउडस्पीकरों के माध्यम से भी छात्रों के मोहल्लों और चौखट तक शिक्षा पहुंचाई गई. संकट के दौरान छत्तीसगढ़ के शिक्षकों ने स्व प्रेरणा से जो जज्बा दिखाया है वह काबिले तारीफ है. मुझे गर्व है कि शासन ने शिक्षकों को नहीं, बल्कि शिक्षकों ने शासन को रास्ता दिखाया है. 

• छत्तीसगढ़ में न्याय योजना का क्रियान्वयन कहां तक पहुंचा है? कितने किसानों को इससे जोड़ा गया है? 
छत्तीसगढ़ सरकार ने किसानों को उनका हक और उपज का वाजिब मूल्य दिलाने के लिए 21 मई, 2020 से राजीव गांधी किसान न्याय योजना शुरू की. इस योजना के तहत राज्य के 19 लाख किसानों को 5,750 करोड़ रुपए की राशि चार किस्तों में दी जा रही है. अब तक तीन किस्तों में किसानों को 4500 करोड़ रुपए की सीधी मदद दी जा चुकी है. चौथी किस्त हम इसी वित्तीय वर्ष के मार्च महीने में देंगे. 

• कोविड की मंदी से उबरने के लिए राज्य की क्या योजना है? 
सबसे पहली बात तो यह कि देशभर में छाई मंदी का छत्तीसगढ़ में असर नहीं है. मैं इसकी वजह बताता हूं. हमने किसानों, पशुपालकों और लघु वनोपज संग्राहकों को धान खरीदी, गोधन न्याय योजना और अन्य योजनाओं के माध्यम से लगभग 70 हजार करोड़ रुपए की राशि प्रदान की. इसी राशि ने छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान की है. मंदी को मात देने में सबसे बड़ी भूमिका इसी राशि ने अदा की है. इसके अतिरिक्त हमने उद्योग सेक्टर, निर्माण सेक्टर और बिजली अधिभार में रियायत देकर किसानों, उद्योगों और नागरिकों को राहत प्रदान की.

हमने स्टील और स्पंज आयरन सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए विशेष पैकेज घोषित किया है. उद्योगविहीन जिलों में उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन योजना लागू की है. कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा दिया. अब हम राज्य में इथेनॉल आधारित उद्योग लगाने की और बढ़ रहे हैं, इससे लगभग 10 हजार करोड़ रुपए का निवेश आने की संभावना है. हमने जेम्स और जूलरी पार्क की स्थापना की ओर भी कदम बढ़ाया है, जो राज्य में अतिरिक्त रोजगार के सृजन में मदद करेगा.

निर्माण सेक्टर में प्राणवायु फूंकने के लिए कई उपाय किए. हमने भू-खंडों के लिए शासकीय गाइड लाइन-दर में 30 प्रतिशत की छूट प्रदान की, उद्योगों के लिए डायवर्जन के लिए 15 दिन की समय सीमा तय की, कॉलोनी विकास के लिए एकल विंडो सिस्टम बनाया, हाउसिंग बोर्ड की कॉलोनियों में मकानों के मूल्य में 15 से 20 प्रतिशत की कमी और गुमास्ता ऐक्ट के नवीनीकरण से छूट प्रदान की. इन सबसे निर्माण सेक्टर में गति आ गई. 

• नक्सलवाद से निपटने की रणनीति में कोई बदलाव करेंगे क्या? 
हमारे राज्य में नक्सली समस्या है, इससे इनकार नहीं किया जा सकता. हम नक्सल समस्या के हल के लिए सुरक्षा, विकास और विश्वास की नीति पर काम कर रहे हैं. इस समस्या को केवल किसी को गोली मार कर समाप्त नहीं कर सकते. हमारा विश्वास है कि जिन नौजवानों की नक्सल भर्ती करते हैं, यदि हम उन्हें रोजगार देते हैं, अगर उन्हें हल पकड़ाते हैं तो वे बंदूक‌ नहीं उठाएंगे. 

• मोबाइल दाई-दादी क्लिनिक की शुरुआत शहरी इलाकों (रायपुर-दुर्ग-भिलाई-बिलासपुर) में की गई है. इसकी ज्यादा जरूरत गांवों को है. ये अनोखी योजना कितना आगे जा पाएगी क्योंकि डॉक्टर गांवों में जाना नहीं चाहते?   
शहरी स्लम इलाकों के लिए मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना के तहत दाई-दीदी क्लिनिक प्रारंभ किया गया है. देश में अपने तरह की यह अनूठी योजना है, जिसमें महिला चिकित्सक और महिला स्टाफ के जरिए महिलाओं के इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है. सामान्यत: हम देखते हैं कि महिलाएं बीमारी के बारे में बताने में संकोच करती हैं. महिला चिकित्सकों के होने से वे नि:संकोच अपनी समस्या उन्हें बता सकेंगी.

वहीं हमारी सरकार की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों में मुख्यमंत्री हाट-बाजार क्लिनिक योजना के माध्यम से दुर्गम से दुर्गम क्षेत्रों तक चिकित्सा सुविधा पहुंचाई जा रही है. छत्तीसगढ़ में हाट-बाजार का बड़ा ही महत्व है. यहां हर चार-पांच गांवों के बीच एक साप्ताहिक बाजार जरूर भरता है. अपनी रोजमर्रा की वस्तुएं खरीदने के लिए हर ग्रामीण परिवार इन बाजारों में पहुंचता है. बाजार-क्लिनिकों में विभिन्न तरह की जांच सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है. सरकार बनने के बाद से ही हमारा सबसे ज्यादा ध्यान नियमित स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता था और हम इसमें काफी हद तक सफल भी हुए है.

डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य योजना, मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य योजना का लाभ लोगों को मिल रहा है. इनमें से डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना के तहत पांच लाख रुपए तक और मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत 20 लाख रुपए तक इलाज की सुविधा मुहैया कराई जा रही है. एक उदाहरण मैं आपको देना चाहता हूं. बस्तर में हर वर्ष मलेरिया से काफी जनहानि होती थी. हमनें मुख्यमंत्री हाट बाजार क्लिनिक योजना प्रारंभ की.

हमने मलेरिया की पहचान और उपचार का एक बड़ा अभियान पूरे बस्तर क्षेत्र में चलाया और अब उसका परिणाम देखिए. पिछले सितंबर की तुलना में इस वर्ष मलेरिया के केसेज में 65 प्रतिशत की कमी हो गई है. हमने ग्रामीण इलाकों में चिकित्सकों की नियुक्तियों को सुनिश्चित किया है. बीजापुर जैसे दूरस्थ आदिवासी जिले में अब महत्वपूर्ण सर्जरी हो रही है. जगदलपुर में सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल अच्छे से काम कर रहा है. मुख्यमंत्री सुपोषण योजना ने तो कमाल कर दिया है एक साल में 77 हजार से ज्यादा बच्चे कुपोषण से मुक्त हो गए है.  

• तेंदूपत्ता संग्रहकों और वनोपज से जुड़े आदिवासियों को कोरोना काल में राहत देने की कोई नई योजना है क्या? 
लॉकडाउन के दौरान फैक्ट्रियों के बंद होने से देश-दुनिया में रोजगार की समस्या गहरा गई थी लेकिन छत्तीसगढ़ में इस संकटकाल में भी वनवासियों को वनोपज और वनोषधि संग्रहण से रोजगार मिलता रहा. आर्थिक रूप से प्रदेश में आत्मनिर्भरता आई, साथ ही अर्थव्यवस्था के पहिये भी सुचारू रूप से चलते रहे. राज्य में हर साल तेंदूपत्ता संग्रहण से 12 लाख 65 हजार संग्राहक परिवारों को रोजगार मिल रहा है. तेंदूपत्ता का मूल्य बढ़ाकर अब 4,000 रुपए प्रति मानक बोरा कर दिया गया है, जिससे उन्हें 649 करोड़ रु. का सीधा लाभ प्राप्त हो रहा है. सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी जाने वाली वनोपजों की संख्या 7 से बढ़ाकर अब 52 कर दी है. छत्तीसगढ़ लघु वनोपजों के संग्रहण में देश में पहले स्थान पर है.  

• कांग्रेस की राज्य सरकारें वह वैकल्पिक विकास मॉडल क्यों नहीं विकसित कर पा रही हैं जो विपक्ष की ताकत बन सके? 
आज छत्तीसगढ़ के विकास मॉडल की चर्चा सारे देश में हो रही है और यहां कांग्रेस की ही सरकार है. कांग्रेस की सरकारें गरीब, मजदूर, किसान, वनाश्रितों और समाज के शोषित और पीडि़त वर्गों के हक में काम करने वाली सरकारें हैं. संख्याबल के लिहाज से हम पीछे जरूर हैं लेकिन विपक्ष की ताकत कम नहीं हुई है.

भाजपा ने लोगों को गुमराह कर उन्हें विभिन्न संवेदनशील मुद्दों पर भटकाकर सत्ता जरूर हासिल कर ली है लेकिन अब उनके फैलाए भ्रम का आवरण टूट रहा है. देश का किसान, मजदूर, मध्यम वर्ग सब इस सरकार से परेशान है. कांग्रेस के लिए यह संघर्ष का समय है और जैसे हम 15 वर्ष संघर्ष कर छत्तीसगढ़ की सत्ता में वापस लौटे हैं वैसे ही राष्ट्रीय स्तर पर भी लौटेंगे. 

‘‘हमने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में 13 साल से बंद स्कूलों को फिर शुरू किया है. बस्तर के लिए अलग भर्ती प्रक्रिया अपनाई है. बस्तर के लोगों में अब विश्वास लौटने लगा है’’

 

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