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बातचीतः हम परिवारों की प्राइवेसी सुनिश्चित करेंगे

हर परिवार को एक पहचानपत्र देने की कोशिश का उद्देश्य नीति निर्माण और शासन की डिलिवरी में गेम-चेंजर बनना है. मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर ने सीनियर एडिटर अनिलेश महाजन से विशेष बातचीत में बताया कि हरियाणा किस तरह इस पहल को सफलतापूर्वक लागू कर रहा है जबकि कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे राज्यों में यह अभी तक शुरू नहीं हो पाया. मुख्य अंश:

मनोहरलाल खट्टर मनोहरलाल खट्टर

हर परिवार को एक पहचानपत्र देने की कोशिश का उद्देश्य नीति निर्माण और शासन की डिलिवरी में गेम-चेंजर बनना है. मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर ने सीनियर एडिटर अनिलेश महाजन से विशेष बातचीत में बताया कि हरियाणा किस तरह इस पहल को सफलतापूर्वक लागू कर रहा है जबकि कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे राज्यों में यह अभी तक शुरू नहीं हो पाया. मुख्य अंश:

बातचीतः मनोहरलाल खट्टर

नीति निर्माण में परिवार पहचान पत्र किस तरह गेम-चेंजर होगा?

भारतीय नागरिक की पहचान आधार कार्ड से होती है, एक यूनिक आइडी, जिससे लोगों को सीधे डिलिवर करने में मदद मिलती है. फिर भी हमारा समाज व्यक्ति केंद्रित नहीं है, यह परिवार केंद्रित है. लिहाजा, एक परिवार पहचान पत्र जरूरी है.

क्या यह राज्य के कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों तक सीमित है या यह सबके लिए है?

यह सबके लिए है. हरियाणा में 69 लाख परिवार हैं, जिनके ब्यौरे विभिन्न विभागों के पास हैं, भले ही वह पीडीएस लाभार्थी के रूप में हों, संपत्ति के पंजीकरण या कुछ दूसरे लाभ के लिए हों. काम डेटा में सहयोग और सफलता लाने का है. हमने इसे संस्थागत बनाने के लिए एक अलग विभाग, सिटीजन रिसोर्स इन्फॉर्मेशन डिपार्टमेंट (सीआरआइडी) बना दिया.

 आप डेटा कैसे जुटाते हैं?

शुरू में परिवार का प्रमुख परिवार के आकार, नाम, उम्र, संपत्ति और आय जैसी बुनियादी जानकारी खुद देता है. फिर उसे पांच सदस्यीय टीम प्रमाणित करती है. इस तरह जुटाया गया डेटा अटल सेवा केंद्र पर फीड किया जाता है.

 क्या आपने इस फैमिली आइडी के साथ सरकारी योजनाओं को जोड़ना शुरू कर दिया है?

हां, हमने 456 योजनाओं को पीपीपी के साथ जोड़ दिया है. मुख्यमंत्री परिवार समृद्धि योजना, पीएम जीवन ज्योति बीमा योजना, पीएम दुर्घटना सुरक्षा योजना, पीएम किसान सम्मान निधि, पीएम लघु व्यापार सम्मान निधि और पीएम श्रमजीवी सम्मान निधि, पीएम फसल बीमा योजना, सब इस आइडी से जोड़ दी गई हैं.

 यह आइडी लोगों के जीवन में किस तरह बदलाव लाएगा?

यह डेटाबेस हमें—आय के मामले में—राज्य के एक लाख सबसे ज्यादा गरीब लोगों की पहचान करने और हमारे संसाधनों को उन्हें ऊपर उठाने में मदद कर रहा है.

 क्या केंद्र प्रायोजित योजनाओं के लिए परिवार का आइडी सार्थक है?

नहीं. यह केवल राज्य की योजनाओं या उन योजनाओं के लिए है, जिनमें राज्य नागरिकों की ओर से योगदान करता है. हमने ऐसी 100 से ज्यादा योजनाओं की पहचान की है, चाहे वह विवाह के लिए लड़कियों की सहायता हो या स्कूली छात्रों को छात्रवृत्ति. यह डेटा बदलता रहेगा.

 आप परिवार की इकाई कैसे तय करते हैं?

परिभाषा के मुताबिक परिवार में पति-पत्नी, बच्चे व उन पर निर्भर माता-पिता होते हैं. फिलहाल, हम सालाना 1.8 लाख रु. से कम आय वाले बीपीएल परिवारों की पहचान कर रहे हैं; धीरे-धीरे हम उसमें परिवारों की प्रति व्यक्ति आय शामिल करेंगे. अगर किसी परिवार में तीन सदस्य हैं तो प्रति व्यक्ति आय 60,000 रु. होगी, पर अगर उसमें छह सदस्य हैं तो यह 30,000 रु. हो जाएगी.

 आप इस तरह के डेटा की निजता की रक्षा कैसे करेंगे?

यह डेटा एक जगह पर नहीं होगा. हमारे पास बुनियादी जानकारी होगी और बाकी डेटा अलग-अलग होगा. सो, अगर स्वास्थ्य विभाग इस जानकारी का इस्तेमाल करना चाहता है तो उसे सिर्फ स्वास्थ्य संबंधी जानकारी मिलेगी.

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