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सपा के राज में बैकवर्ड का फायदा सिर्फ यादवों को: मायावती

बहुजन समाज पार्टी की मुखिया और चार बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रहीं मायावती ने कई महीनों के लंबे अंतराल के बाद मीडिया से तसल्ली से बातचीत करने का मन बनाया. इंडिया टुडे के प्रमुख संवाददाता पीयूष बबेले से बातचीत में बीएसपी सुप्रीमो पूरी तरह से सर्वजन समाज के पहरुए के तौर पर नजर आईं.

मायावती मायावती

बहुजन समाज पार्टी की मुखिया और चार बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रहीं मायावती ने कई महीनों के लंबे अंतराल के बाद मीडिया से तसल्ली से बातचीत करने का मन बनाया. इंडिया टुडे के प्रमुख संवाददाता पीयूष बबेले से बातचीत में बीएसपी सुप्रीमो पूरी तरह से सर्वजन समाज के पहरुए के तौर पर नजर आईं. उन्होंने कांग्रेस को दलित विरोधी बताया तो सपा को पूरी तरह से यादवों की पार्टी करार दिया. बातचीत के प्रमुख अंश:

• प्रमोशन में आरक्षण बिल लोकसभा में पारित नहीं हो सका. इस पूरे घटनाक्रम को आप किस तरह से देखती हैं?

केंद्र की यूपीए सरकार एससी/एसटी विरोधी है. कांग्रेस की दलित विरोधी मानसिकता में कोई बदलाव नहीं आया है. प्रमोशन में आरक्षण कोई नई चीज नहीं है. संविधान निर्माता बाबा साहेब आंबेडकर के प्रयासों से 1955 से ही यह व्यवस्था देश में लागू है. मैं जब-जब उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रही, यह व्यवस्था प्रदेश में लागू रही. स्थिति बदली है 19 अक्तूबर, 2006 के सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद. इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने तीन ऐसी शर्तें लगा दीं, जिनके बाद एससी/एसटी को प्रमोशन में आरक्षण देना तकरीबन नामुमकिन हो गया. लेकिन इसकी जिम्मेदारी भी कांग्रेस की है. सरकार ने अच्छे वकील किए होते और माननीय सुप्रीम कोर्ट के सामने सही तरह से पक्ष रखा होता तो यह स्थिति आती ही नहीं.

• लेकिन लोकसभा में मंत्री के हाथ से बिल छीनने की कोशिश कर रहे समाजवादी पार्टी सांसद का हाथ तो खुद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पकड़ा.
यह सब कांग्रेस की नाटकबाजी है. कांग्रेस को बिल पास कराना था तो सरकार लोकसभा अध्यक्ष से सदन में मार्शल बुलाने की मांग कर सकती थी. महिला आरक्षण विधेयक के मुद्दे पर संसद में पहले भी ऐसा हुआ है. सोनिया गांधी का हाथ पकडऩा और कांग्रेस का हल्ला मचाना सब नाटक है.

• प्रमोशन में आरक्षण विधेयक का आपकी पार्टी जितने आक्रामक ढंग से समर्थन कर रही है, उससे आपका अगड़ी जाति का वोटर छिटक तो नहीं जाएगा?
अपर कास्ट के लोग समझदार हैं. उन्हें पता है कि यह विधेयक संविधान की मूल भावना के अनुकूल है. इसका विरोध सिर्फ उत्तर प्रदेश में हो रहा है. समाजवादी पार्टी ने कुछ रिटायर अफसरों को पकड़ लिया है, वे ही यह नाटक कर रहे हैं. सपा खुद दफ्तरों में ताले लगवा रही है. इस पूरे आंदोलन में सपा ने बड़े पैमाने पर पैसा बहाया है. ऐसा नहीं है तो फिर यूपी के अलावा बाकी राज्यों में आरक्षण विधेयक का विरोध क्यों नहीं हो रहा. बाकी राज्यों में भी तो अपरकास्ट के लोग रहते हैं. आप समझ लीजिए कि अपर कास्ट के लोगों को आरक्षण से कोई परेशानी नहीं है.

• पर इस पूरे घटनाक्रम से आपकी छवि को दलित समर्थक और अपर कास्ट विरोधी बनाने का प्रयास तो ही रहा है.
सर्व समाज का हित मैंने हमेशा ऊपर रखा है. सपा की तरह सिर्फ यादव समाज का हित ध्यान में नहीं रखा. सपा खुद को पार्टी तो पिछड़ों की बताती है, लेकिन इस पार्टी के सत्ता में आते ही पिछड़ों का मतलब सिर्फ यादव हो जाता है. मैं साफ कर दूं कि मैं यादव समाज की विरोधी नहीं हूं, लेकिन सपा सरकार सिर्फ यादवों की सरकार है. जब हम उत्तर प्रदेश में 2007 में सत्ता में आए तो हमने सबसे पहला काम यह किया कि सरकारी नौकरियों में भर्ती पर लगी रोक हटाई. हमने जितनी नौकरियां दीं उनमें से 30 से 35 लाख नौकरियां तो अपर कास्ट वालों को मिलीं.

• लेकिन सपा तो मुसलमानों की भी बड़ी हिमायती बनती है.
सपा ने मुसलमानों को सिर्फ धोखा दिया है. यूपी में 2012 में विधानसभा चुनाव से पहले सपा ने मुसलमानों को आबादी के अनुपात के लिहाज से नौकरियों में 18 फीसदी आरक्षण देने का वादा किया था, तो अब आरक्षण दें. हम पूरा समर्थन देने को तैयार हैं. वादा पूरा करो, कौन रोकता है? सच्चर कमेटी की रिपोर्ट लागू की जाए. इसके लिए भी हम केंद्र औैर राज्य को पूरा समर्थन देंगे. लेकिन इनकी नीयत में खोट है. 1995 में जब मेरी सरकार थी तो ओबीसी कोटे में हमने पिछड़े मुसलमानों को शामिल कराया था. लेकिन सपा के राज में बैकवर्ड का सारा फायदा सिर्फ यादवों को मिला.

• अखिलेश यादव सरकार के मौजूदा कामकाज की रेटिंग आप की नजर में क्या है?
अखिलेश को मुख्यमंत्री बने करीब नौ महीने हो गए हैं. यह सरकार हर मोर्चे पर फेल है. इसमें हर स्तर पर करप्शन फैला हुआ है. यहां तक कि हमारे कार्यकाल में हुए कामों की जांच में भी करप्शन हो रहा है. प्रदेश में चोरी, डकैती, अपहरण अपने चरम पर हैं. जबसे अखिलेश कुर्सी पर बैठे हैं, प्रदेश में बलात्कार के 1,500 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं. पूरे प्रदेश में 100 से ज्यादा सांप्रदायिक दंगे हो चुके हैं, इनमें से डेढ़ दर्जन दंगे ऐसे रहे जो बड़े पैमाने पर हुए और सबकी नजर में आए. स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है. थानों में पीडि़तों की एफआइआर तक नहीं लिखी जा रही.

• और आप अपने चार कार्यकाल को किस तरह आंकती हैं?
मैंने सर्वसमाज के हित के लिए लगातार काम किया है, हर कोशिश की है.

• उत्तर प्रदेश से आप अकेली दलित मुख्यमंत्री रही हैं. ऐसे में दलित समाज की उम्मीदें आप से बढ़ जाती हैं. इस समाज के उत्थान के लिए आपने कितना-क्या किया?
मैं हर काम सर्व समाज को ध्यान में रखकर करती हूं. मैं जब-जब सरकार में रही, मैंने सभी वर्गों के लिए बहुत कुछ किया.

• लोकसभा चुनाव के लिए आपकी क्या तैयारी है?
हम तैयार हैं. आज चुनाव हो जाएं, हम आज चुनाव लड़ लेंगे. हम पूरी तरह तैयार हैं.

• अगले छह महीने या साल भर आप के एजेंडे पर सबसे ऊपर क्या चीजें हैं?
महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा बहुत महत्वपूर्ण है. यूपी में तो महिलाओं पर जुल्म हो रहे हैं, देश की राजधानी दिल्ली भी महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं. केंद्र महिलाओं पर होने वाले अत्याचार के खिलाफ सख्त कानून बनाए. इन कानूनों की पब्लिसिटी भी अच्छी तरह से की जाए. महिला हित के कानूनों को सरकार आम तौर पर जरूरी प्रचार नहीं देती है.

• आप भी मानती हैं कि केंद्र की कांग्रेस सरकार सीबीआइ का दुरुपयोग करती है?
कांग्रेस ही क्यों, भाजपा भी सीबीआइ का दुरुपयोग करती रही है. यही दोनों पार्टियां केंद्र की सत्ता में रही हैं और दोनों ने सीबीआइ का जमकर दुरुपयोग किया है.

• आप पर भी सीबीआइ का दबाव पड़ा?
अब तो हमारे ऊपर कोर्ई केस नहीं है. 2003 में भाजपा सरकार के समय हमारे ऊपर ताज कॉरिडोर वाला केस लगवाया गया था. यह सब सियासी साजिश के तहत हमें परेशान करने की कोशिश थी. सीबीआइ के जरिए हमें डराने की कोशिश की गई, लेकिन हम कभी दबे नहीं.

• गुजरात विधानसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी की जीत पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है?
इस पर हमें क्या कहना है? यह भाजपा का अंदरूनी मामला है. (हालांकि इस बातचीत के अलगे ही दिन मायावती ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखकर महिला उत्पीडऩ पर कानून बनाने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग की. पत्र में मायावती ने कहा कि भाजपा नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने का सपना देख रही है, लेकिन हम उसके ये मंसूबे पूरे नहीं होने देंगे.

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