scorecardresearch
 
डाउनलोड करें इंडिया टुडे हिंदी मैगजीन का लेटेस्ट इशू सिर्फ 29/- रुपये में

‘‘सरकार जैविक किसानों के लिए मार्केटिंग और मेहनताना बेहतर करने का प्रयास कर रही है’’

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर स्वच्छ कृषि के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को आगे बढ़ाने में जुटे हुए हैं. उन्होंने अनिलेश एस. महाजन के साथ बातचीत में भारत में प्राकृतिक और जैविक खेती को आगे बढ़ाने की अपनी योजनाओं के बारे में बताया.

X
केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर

 प्रधानमंत्री मोदी और आपका मंत्रालय प्राकृतिक तथा जैविक खेती की क्षमता का लाभ उठाने पर काफी जोर लगा रहे हैं. आप उसे कैसे पूरा करेंगे?

प्रधानमंत्री मोदी ने प्राकृतिक खेती की जोरदार वकालत की है. इससे देश में कृषि के इस रूप के प्रति जागरूकता बढ़ी है. पिछले साल दिसंबर में गुजरात के आणंद में वहां के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने हजारों किसानों के सामने प्रस्तुति दी थी. मंत्रालय की परंपरागत कृषि विकास योजना (पीकेवीवाइ) के तहत प्राकृतिक खेती अब 5 लाख हेक्टेयर खेतों में की जाती है.

केवल हिमाचल प्रदेश, गुजरात और आंध्र प्रदेश में ही अकेले 3 लाख हेक्टेयर ऐसे खेत हैं और मध्य प्रदेश भी आगे बढ़ रहा है. संतोषजनक बात यह है कि प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूकता बढ़ रही है. उपभोक्ता भी स्वास्थ्य के प्रति अधिक जागरूक हो रहे हैं, जिससे प्राकृतिक और जैविक खाद्य उत्पादों की मांग बढ़ रही है. यह क्षेत्र युवा उद्यमियों को भी आकर्षित कर रहा है.

 अगले पांच साल में देश का जैविक उत्पादन कहां तक पहुंचेगा, आपकी क्या राय है? जैविक खेती की संभावनाओं को साकार करने के लिए आपका मंत्रालय किन क्षेत्रों में काम कर रहा है?

भारत ने जैविक खेती में मजबूत और अभूतपूर्व प्रगति की है. आज देश जैविक खेती के क्षेत्र के मामले में दुनिया में चौथे स्थान पर है और जैविक उत्पादों के मामले में सबसे ऊपर है. 2013-14 में जैविक खेती के अंतर्गत कुल क्षेत्र 11.8 लाख हेक्टेयर था और अब यह 38 लाख हेक्टेयर से भी अधिक हो गया है.

मेरे मंत्रालय के पास पीकेवीआइ जैसी योजनाएं हैं और पूर्वोत्तर में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए एक योजना है. इससे 12 लाख हेक्टेयर में खेती कर रहे 15 लाख किसान लाभान्वित हो चुके हैं. गंगा के किनारे के 5 किमी के कॉरिडोर पर शुरुआती फोकस है. राज्यों को भी जैविक और प्राकृतिक खेती से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया गया है. इस मकसद को हासिल करने के लिए हमने वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों की एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है और कार्य प्रगति पर है.

 इसके लिए बाजार का बुनियादी ढांचा विकसित करने के लिए आप क्या कर रहे हैं?

जैविक और प्राकृतिक खेती कर रहे किसानों की बाजार तक पहुंच में सुधार लाने और उन्हें उपज का अच्छा पारिश्रमिक हासिल कराने के लिए सरकार काफी प्रयास कर रही है. उपज के प्रमाणीकरण के लिए, जैविक समूहों को किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) से जोड़ा जाना चाहिए जिनसे उन्हें कटाई के बाद की सुविधाएं सुनिश्चित हो सकें.

अकेले पूर्वोत्तर के लिए अब तक 170 एफपीओ का गठन किया जा चुका है. इसके अलावा, पीकेवीवाइ के तहते 130 एफपीओ शुरू किए गए हैं. जैविक और प्राकृतिक खेती करने वाले सभी किसानों को इन एफपीओ के जरिए बाजार से जोड़ने की योजना है.

 प्रधानमंत्री मोदी फसलों से विविधीकरण के भी प्रबल समर्थक हैं. जैविक और प्राकृतिक खेती पर जोर और तिलहन तथा दलहन के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को उस दिशा में कदम के रूप में देखा गया. इसमें अब तक हमें क्या कामयाबी मिली है? 

सरकार नियमित रूप से 22 फसलों के लिए एमएसपी और गन्ने के लिए एफआरपी (उचित एवं लाभकारी मूल्य) तय करती है. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत राज्यों को दलहन, बाजरा, तिलहन, कपास आदि खरीदने के लिए मदद प्रदान की जाती है; केंद्र और राज्य किसानों से 25 फीसद तिलहन और दलहन खरीद रहे हैं.

राज्यों की ओर से अतिरिक्त खरीदारी के प्रस्ताव को जल्द ही मंजूरी मिल जाती है. यह दालों के उत्पादन की मात्रा में पहले ही परिलक्षित हो रहा है. दलहन उत्पादन 2015-16 में 160.3 लाख टन था जो 2021-22 में बढ़कर 270 लाख टन हो गया है; यह 65 फीसद की शानदार वृद्धि है.

इससे हमें आयात को 2016-17 में 63.6 लाख टन से घटाकर 2020-21 में 23.2 लाख टन करने में मदद मिली है. प्रधानमंत्री मोदी ने एमएसपी में पारदॢशता लाने और सुचारु ढंग से लागू करने के लिए एक समिति गठित करने का वादा किया है. फसलों में विविधता लाना और जैविक तथा प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना इसमें एक महत्वपूर्ण हिस्सा होगा.

‘‘उपभोक्ता भी स्वास्थ्य के प्रति अधिक जागरूक हो रहे हैं, जिससे प्राकृतिक और जैविक खाद्य उत्पादों की मांग बढ़ रही है. यह क्षेत्र युवा उद्यमियों को भी आकर्षित कर रहा है ’’.

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें