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आनंद के लिए किए जाते हैं गोल

भारत के शीर्ष फुटबॉलर 37 वर्षीय सुनील छेत्री एएफसी एशियन कप के लिए क्वालिफाइ करने के भारतीय अभियान, अपनी टीम के जुनूनी खिलाड़ियों और इतने साल मैदान पर टिके रहने की अपनी क्षमता के बारे में बता रहे हैं.

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सुनील छेत्री सुनील छेत्री

 इस अभियान के दौरान आखिर कौन-सी चीजें टीम के पक्ष में रही हैं?

सब कुछ सही रहा—टूर्नामेंट से पहले हमने जिस तरह शिविर में तैयारी की, हर गेम के दौरान कोलकाता में दर्शकों की जो भीड़ उमड़ी और फिर फुटबॉल. सब कुछ खुशगवार रहा. इस अभियान में सब कुछ था. यहां तक कि अफगानिस्तान के खिलाफ हुए मैच में टीम ने जो हौसला और लड़ने की क्षमता दिखाई, वह अविश्वसनीय थी.

 टीम के युवाओं के बारे में आपकी क्या राय बनी?

क्वालिफायर मैचों के दौरान इन नौजवान खिलाड़ियों ने जिस तरह से खेल दिखाया है उससे मैं वाकई खुश हूं. मैं उन युवाओं की मौजूदगी से हमेशा प्रोत्साहित होता रहा हूं जो पिछले दो-एक सालों में उभरकर आए हैं. सबसे बड़ी बात यह है कि वे युवा सीनियर इंडियन नेशनल टीम के लिए खेलने के दबाव से मुक्त होकर खेलते हैं. इसके अलावा वे इतना खुलकर अपनी बात कहते हैं, जो प्रभावशाली है और टीम के लिए फायदेममंद भी है.

 नौजवान खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय खेल के लिए तैयार करने के लिहाज से भारतीय सुपर लीग (आइएसएल) का योगदान क्या रहा है?

बहुत सारे युवाओं को आइएसएल में मौका मिला. आपने नाओरेम रोशन सिंह को बेंगलूरू एफसी के लिए वाकई अच्छा खेलते देखा—सात गोल में मदद और एक गोल ठोकने की बदौलत उन्हें राष्ट्रीय टीम में आने का न्यौता मिला. हैदराबाद के युवाओं और एटीके-मोहन बागान एफसी के लिस्टन कोलाको को भी उनका हक मिला. इसका श्रेय कोच इगोर स्टीमाक को जाता है.

 आप अब भी गोल करने से नहीं रुक रहे. इतना सब हासिल करने के बाद भी आप इस भूख को कैसे जिंदा रखते हैं?

हर बार गेंद को नेट तक पहुंचाकर मैं बस खुश होता हूं. हर मैच यही करने का मौका है—इसी से मुझे ताकत मिलती है. मैं कोई आंकड़ों या रिकॉर्ड का पीछा नहीं कर रहा हूं. यह बस वह खुशी है जो टीम के लिए खेलने और गोल करने से मिलती है.

 उम्र के साथ अपने खेल में आपको क्या बदलाव करने पड़े हैं?

मेरे खेल के लिहाज से देखें तो ज्यादा कुछ नहीं बदला. लेकिन मेरी जीवनशैली में बदलाव आए—मेरे आहार में बदलाव, जिस तरह मैं वर्क आउट करता हूं. मैं लगातार ज्यादा पढ़ रहा हूं, चीजों को ज्यादा समझ रहा हूं. मुझे पता है कि मैं युवा नहीं हो रहा हूं, इसलिए पिछले कुछ साल सही विकल्प चुनने के रहे हैं. खुद की बहुत जांच-पड़ताल की और इससे वे नतीजे हासिल करने में मदद मिली जो मैं चाहता हूं. खेल में बदलावों से ज्यादा उन चीजों में आए बदलावों से फर्क पड़ा है जो मैं खेल से पहले करता हूं.

—शैल देसाई

 

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