scorecardresearch
 
डाउनलोड करें इंडिया टुडे हिंदी मैगजीन का लेटेस्ट इशू सिर्फ 25/- रुपये में

बातचीतः मैं दबंगई वाले अंदाज में केंद्रीकरण के खिलाफ हूं

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन 2030 तक राज्य को एक खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बना देना चाहते हैं

X
डॉ. पलानिवेल त्यागराजन,वित्त मंत्री, तमिलनाडु डॉ. पलानिवेल त्यागराजन,वित्त मंत्री, तमिलनाडु

तमिलनाडु के वित्त मंत्री डॉ. पलानिवेल त्यागराजन मानते हैं कि अगर विकास गरीबों में भी सबसे गरीब की जिंदगियों तक पहुंचने में नाकाम रहे, तो जीडीपी के आंकड़ों का खास मतलब नहीं रह जाता. वैश्विक वित्तीय बाजारों के विश्लेषक रह चुके वित्त मंत्री ने 'तमिलनाडु फर्स्ट' कॉन्क्लेव में इंडिया टुडे के ग्रुप एडिटोरियल डायरेक्टर (पब्लिशिंग) राज चेंगप्पा से बात की.

प्र. आपके मुख्यमंत्री तमिलनाडु को एक खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाना चाहते हैं..

एक लक्ष्य होना अच्छी बात है क्योंकि यह आपको जवावदेह बनाता है. तीन साल में एक खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लिए हमें सामान्य तौर पर 14-14.5 फीसद विकास दर हासिल करने की जरूरत है जिसमें महंगाई भी शामिल है. महंगाई फिलहाल 6.5 फीसद के आसपास है. अगर मैं इसे निकाल दूं तो इसका मतलब है कि मुझे करीब 7.5-8 फीसद की विकास दर चाहिए, जिसे हासिल करना मुश्किल नहीं है.

तमिलनाडु ने औद्योगिक राज्य बनने की कोशिश करते हुए भी हमेशा कल्याणकारी राज्य होने में यकीन किया है. आप बही-खातों में संतुलन कैसे लाते हैं?

यह धारणा ही बुनियादी तौर पर गलत है कि कल्याणकारी राज्य पूंजीवादी या औद्योगिकतावादी राज्य नहीं हो सकता. दुनिया भर में कल्याणकारी समाज आर्थिक भेदभाव कम करने और समावेशी होने, सर्वश्रेष्ठ अर्थव्यवस्था बनाने की कोशिश करते हैं. अगर आप भारत को लें, तो तमिलनाडु इन सब चीजों पर किसी से भी ज्यादा खर्च करता है और मानव तथा सामाजिक विकास संकेतकों, हाइ स्कूलों/कॉलेजों में सकल नामांकन अनुपात वगैरह में उसके नतीजे अव्वल राज्यों में से एक हैं. आप जितने ज्यादा कल्याणकारी और परवाह करने वाले होंगे...आपके यहां उत्पादकता और वृद्धि भी उतनी ही ज्यादा होगी. इसमें कोई अंतर्विरोध नहीं है.

आपके श्वेतपत्र ने संसाधनों में केंद्र के घटते योगदान की तरफ उंगली उठाई. यह रिश्ता अब गैरबराबरी के किस स्तर पर खड़ा है?

सैद्धांतिक स्तर पर मैं जबरन केंद्रीकरण की धारणा के ही खिलाफ हूं. पर अभी मान लें कि यह मौजूं नहीं है. अमल के स्तर पर दिल्ली में बैठकर पूरे देश के लिए एक किस्म की योजना बनाना मूर्खतापूर्ण है. स्वच्छ भारत की मिसाल लें. उन्होंने कहा कि हमने टॉयलेट बनाए, कोई परेशानी नहीं. वे कहते हैं कि हम सीधे स्थानीय निकाय के पास जाएंगे, उन्हें पैसा देंगे और वे टॉयलेट बनाएंगे. ठीक है. सीएजी की रिपोर्ट में कई गड़बड़ियां दिखाई गई हैं. कोई परेशानी नहीं. मगर सबसे बड़ी परेशानी यह है कि आप जब टॉयलेट बना देते हैं तो पानी सप्लाइ कौन करेगा? केंद्र तो नहीं करेगा, बराबर? पंचायत या निगम करेगा. आप हरेक पंचायत की जलापूर्ति दिल्ली से नहीं संभाल सकते, बराबर? यह फैसला स्थानीय लोगों को करना चाहिए.

तमिलनाडु को दूसरा सबसे बड़ा औद्योगिक राज्य माना जाता है. मगर 2011 से राष्ट्रीय स्तर पर आपकी रैंकिंग गिर रही है.

इन चीजों को आप कैसे आंकते हैं? फिलहाल तमिलनाडु की प्रति व्यक्ति आय लगभग 10,000-15,000 रुपए है, जो गुजरात से कम है. लेकिन तमिलनाडु में 15 साल से छोटी एक भी लड़की ऐसी नहीं जो स्कूल में न हो. गुजरात में उनमें से 15-20 फीसद स्कूल में नहीं हैं. किस किस्म का विकास मैं चाहता हूं? तमिलनाडु में हर 1,000 लोगों पर चार डॉक्टर हैं. गुजरात में हर हजार लोगों पर एक डॉक्टर है. किस किस्म का समाज मैं चाहता हूं? जीडीपी के आंकड़े ही सब कुछ नहीं हैं. हमारा जिंदगी जीने का तरीका है जिसकी मैं रक्षा करना और बनाए रखना चाहता हूं, जिसे मुख्यमंत्री द्रविडियन मॉडल कहते हैं. हम इसे लागू करेंगे और बीते 10 साल में जो भी कमियां रहीं हैं, अगले पांच साल में हम फिर शीर्ष पर लौटेंगे. मुझे 100 फीसद यकीन है.

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें