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'स्थिति अच्छी नहीं है, मगर अराजक भी नहीं’

शिक्षक का प्रशासनिक पद संभालना गलत नहीं है. मूल बात है, वे किसी भी पद पर जाएं, शिक्षण कार्य में उनकी रुचि बरकरार रहे.

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विजय कुमार चौधरी विजय कुमार चौधरी

बिहार के विश्वविद्यालयों की स्थिति इस वक्त अराजक और विस्फोटक लगने लगी है. इसके पीछे क्या वजहें हैं?

इसमें कोई दो राय नहीं है कि स्थिति अच्छी नहीं है, मगर अराजक या विस्फोटक नहीं कह सकते. कुछ स्थानीय समस्याएं जरूर हैं. मगर सुधार भी हो रहा है. हमारा ग्रॉस एनरॉलमेंट रेशियो बढ़ा है. हम कक्षाएं, परीक्षाएं और सत्र इन सभी को नियमित करने में जुटे हैं. अगले एक साल में हम लोग यह लक्ष्य हासिल कर लेंगे. 

माना जाता है कि कई विवि में स्थायी वीसी नहीं होने की वजह से दिक्कतें हैं.

यह एक तात्कालिक समस्या है, स्थायी समस्या नहीं है. हम इसके समाधान के लिए लगातार कुलाधिपति महोदय के कार्यालय से संपर्क में हैं. उन्होंने आश्वस्त किया है कि इसका जल्द हल होगा.

विवि में प्रशासनिक पदों पर लोगों की कमी है और प्राध्यापकों की रुचि पढ़ाने के बदले प्रशासनिक पद संभालने की रहती है.

शिक्षक का प्रशासनिक पद संभालना गलत नहीं है. मूल बात है, वे किसी भी पद पर जाएं, शिक्षण कार्य में उनकी रुचि बरकरार रहे, अपना शत-प्रतिशत कक्षाओं में दें, क्योंकि विवि का मूल काम छात्रों को शिक्षा देना ही है. इसलिए वह किसी सूरत में बाधित नहीं होना चाहिए.

विवि में शिक्षकों की कमी की बात कही जाती है.

इसके लिए हम लोग लगातार ड्राइव चला रहे हैं. हम लोग फिलहाल 4,600 से अधिक शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया में हैं. इनमें से 200 के करीब शिक्षक नियुक्त हो भी चुके हैं. यह विवि सेवा आयोग द्वारा निरंतर चल रहा है.

- पुष्यमित्र

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