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''हमारी योजनाएं खैरात नहीं, उत्पादकता बढ़ाने में सहायक’’

छत्तीसगढ़ में अंबिकापुर जिले के भैंसाखार गांव के निवासी राजनाथ सिंह के घर पारंपरिक ओरांव खाना कुर्थी दाल, टमाटर की चटनी और लकरा का स्वाद लेते हुए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपनी सरकार की योजना भेंट-मुलाकात अभियान कार्यक्रम और 2023 में होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा का मुकाबला करने के बारे में इंडिया टुडे से बातचीत की. कुछ अंश:

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मुख्यमंत्री भूपेश बघेल मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

बातचीतः भूपेश बघेल

 भेंट-मुलाकात अभियान का मकसद क्या है?

हमने कई योजनाएं शुरू कीं पर कोविड के दो साल के दौरान उनकी शुरुआत देखने के लिए मैदान में, गांवों में नहीं जा पाए. तो विचार यह है कि गांवों में आएं, योजनाओं का असर देखें और लोगों से सुनें कि उन्हें सचमुच इनके फायदे मिल रहे हैं या नहीं. 

मैं हरेक विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र के तीन गांवों में जाऊंगा, गांव वालों के साथ पेड़ के नीचे या बगीचे में बैठूंगा. अगर चीजें संतोषजनक हैं तो ठीक है. सुधार की गुंजाइश बताई जा सकती है और जहां भी अफसरों की तरफ से खामियां पाई जाती हैं, तत्काल कार्रवाई होगी.

 आपकी सरकार की ज्यादातर योजनाएं, कर्ज माफी, धान खरीद, गोबर की खरीद या भूमिहीन मजदूरों को पैसा देना, गांवों से जुड़ी हैं. क्या लगता है कि इनका राजनैतिक लाभ मिलेगा? क्या कांग्रेस को शहरी सीटें नहीं चाहिए? 

नहीं, बिल्कुल नहीं. अगर मैं दिन तीन गांवों में बिताता हूं तो रात कस्बों में बिताता हूं. वहां मैं लोगों से मिलता हूं और शहरी इलाकों के लिए अलग योजनाएं हैं. वर्ना छत्तीसगढ़ लगातार तीन बार सबसे स्वच्छ राज्य का इनाम नहीं जीतता. हम जमीन को फ्रीहोल्ड में बदलने की इजाजत दे रहे हैं और औद्योगिक नीति लाए हैं. शहरी खुश नहीं होते तो कांग्रेस रायपुर सहित नगर निगमों के सभी 14 चुनाव नहीं जीतती.

 क्या आप भाजपा के नक्शेकदम पर चलकर लाभार्थी केंद्रित योजनाएं लाए हैं, जिनमें लोगों के हाथ में पैसा धरकर राजनैतिक फायदे की फसल काटते हैं? आप भूमिहीन मजदूर योजना के लाभार्थियों को साल में 7,000 रुपए देने को कैसे सही ठहराएंगे?

छत्तीसगढ़ की योजनाएं भाजपा सरकारों से प्रेरित नहीं हैं. न्याय योजना तब पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी लाए थे. भाजपा ने काम के आधार पर नहीं बल्कि सर्जिकल स्ट्राइक और पुलवामा के आधार पर वोट मांगे. सरकार ने स्वामीनाथन समिति की रिपोर्ट के आधार पर धान का 2,500 रु. प्रति ‌क्व‌िंटल लाभकारी मूल्य देने का फैसला किया.

गरीब और भूमिहीनों को साल में 7,000 रुपए मिल रहे हैं. हम गाय का गोबर खरीद रहे हैं और उससे कंपोस्ट खाद बना रहे हैं. जमीन को पोषक तत्व मिल रहे हैं और मवेशियों को उत्पादक बनाया जा रहा है. हमारी योजनाएं खैरात नहीं हैं, वे उत्पादकता बढ़ाने में सहायक हैं.

 भेंट मुलाकात पर लौटें, तो भाजपा कह रही है कि आपके दौरों से असल में वास्तविक जमीनी स्थिति उजागर हो रही है कि योजनाओं का कितना कम फायदा लोगों तक पहुंचा है. यही नहीं, उसने कहा कि कांग्रेस आंतरिक सर्वेक्षणों से हिल गई है जो बहुत गुलाबी तस्वीर पेश नहीं करते. आप क्या सोचते हैं?

मैं लोगों से खुलेआम पूछ रहा हूं कि योजनाएं उन तक पहुंच रही हैं या नहीं. मोटे तौर पर लोग मुझे बता रहे हैं कि उन्हें फायदे मिल रहे हैं, पर कुछ योजनाओं में सुधार की गुंजाइश है. जहां तक लोकप्रियता की बात है, तो अगर हम लोकप्रिय नहीं होते तो चार उपचुनाव नहीं जीतते और बिल्कुल हाल ही में खैरागढ़ का उपचुनाव, जो कांग्रेस की सीट तक नहीं थी, वह भी 20,000 वोटों से जीता.

 छत्तीसगढ़ में पहली बार धार्मिक मुद्दे केंद्र में आ रहे हैं. मुकाबला कैसे करेंगे?

भाजपा ध्रुवीकरण के लिए सांप्रदायिक मुद्दे उठाती है. इसका जवाब सांस्कृतिक है. छत्तीसगढ़ की अनूठी संस्कृति है, यह आदिवासियों की, हरेली, तीज, कर्मा जयंती सरीखे पर्व-त्योहारों, देव गढ़ी सरीखी परंपराओं, आदिवासी नृत्य उत्सव की संस्कृति है, जिसे हम पुनर्जीवित कर रहे हैं. हम राम के बारे में वैकल्पिक नजरिया भी सामने ला रहे हैं, जिसे दरकिनार कर दिया गया है.

राम को रैम्बो बनाया जा रहा है—राम कभी ऐसे नहीं थे. राम राज के संदेश के मूल में समानता और अमन है. आजकल आक्रमक हनुमान के झंडे और स्टिकर दिखते हैं. राम-हनुमान के मूल को ही भाजपा बदलने की कोशिश कर रही है.

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