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''इस देवभूमि में कोई भूखा नहीं सोएगा''

उत्तराखंड में तो हम बरसात में 3-4 महीने का राशन तक पहले से स्टोर करके रखते हैं. देवभूमि के संस्कार ऐसे हैं कि कोई भूखा नहीं सोएगा.

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत

दूसरे राज्यों को बड़े पैमाने पर पलायन करने वाले उत्तराखंड के निवासी कोरोना वायरस के प्रकोप के बाद देशभर में हुए लॉकडाउन के चलते वापस लौट आए हैं. इसने राज्य सरकार के सामने अवसर और चुनौती, दोनों पेश की है. इस मसले पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से मीनाक्षी कंडवाल ने बातचीत की. प्रस्तुत हैं इसके प्रमुख अंश:

उत्तराखंड में वापस लौटे प्रवासियों के आर्थिक पुनर्वास के लिए क्या योजनाएं हैं?

हम डेटा तैयार कर रहे हैं कि वापस लौटे कितने लोग रुकने के इच्छुक हैं और वे क्या काम करना चाहते हैं. मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत 150 काम तय किए गए हैं. जैसे सब्जी, फल और फूल उत्पाद, ब्रह्मकमल पर काम, पशुपालन, सैलून, ब्यूटी पार्लर आदि. पर्यटन के लिए 10,000 नए रोजगार विकसित करने की एक छोटी योजना भी है. पंडित दीनदयाल उपाध्याय कृषि योजना के तहत हम हर किसान को बिना ब्याज के एक लाख रुपया लोन देते हैं. वहीं समूह में काम करने वाले को इसके तहत हम बिना ब्याज के 5 लाख रुपया लोन देते हैं.

मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना में अभी ऑनलाइन लिंक भरवाए जा रहे हैं. यह लंबी प्रक्रिया लगती है.

हमारे पास एक-एक व्यक्ति का डेटा है, जिन्हें हम राज्य में लाए हैं. जिलाधिकारियों को हमने कहा है कि जो भी लोग आवेदन कर रहे हैं, उनका बैंक के साथ तालमेल बैठाकर उन्हें कर्ज देने की व्यवस्था करवाइए.

लेकिन आपको लगता है कि लौटकर आए ये लोग आपकी योजनाओं के भरोसे यहां रुकेंगे?

अभी अनुमान लगा पाना कठिन है. लेकिन राज्य में पर्यटन क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं तो लगता है कि हॉस्पिटेलिटी इंडस्ट्री से जुड़े लोग यहां जरूर रुकेंगे. इसके अलावा हमने एग्रो बेस्ड योजनाओं पर फोकस किया है. पहाड़ी उत्पादों से हम एक हिमालयन ब्रांड विकसित करें, इस ओर लोगों का ध्यान आकर्षित किया जा रहा है.

क्या उत्तराखंड का सामाजिक-आर्थिक और भौगोलिक ढांचा अचानक वापस लौट आए प्रवासियों का भार उठाने में सक्षम है?

जरूरत की चीजें पर्याप्त मात्रा में पूरे देश और उत्तराखंड में भी उग रही हैं. उत्तराखंड में तो हम बरसात में 3-4 महीने का राशन तक पहले से स्टोर करके रखते हैं. देवभूमि के संस्कार ऐसे हैं कि कोई भूखा नहीं सोएगा.

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