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बातचीतः यूपी के हर गांव में किसान आंदोलन शुरू होगा

किसान महापंचायत के अगले दिन 6 सितंबर की दोपहर 12 बजे भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत ने इंडिया टुडे के एसोसिएट एडिटर आशीष मिश्र से आगे की रणनीति पर चर्चा की. बातचीत के मुख्य अंश. 

किसान महापंचायत के अगले दिन 6 सितंबर की दोपहर 12 बजे भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत ने इंडिया टुडे के एसोसिएट एडिटर आशीष मिश्र से आगे की रणनीति पर चर्चा की. बातचीत के मुख्य अंश.

मुजफ्फरनगर महापंचायत के सफल आयोजन के बाद भारतीय किसान यूनियन की आगे की रणनीति क्या है?

किसान की कोई रणनीति नहीं है. यूपी के हर गांव का किसान परेशान है. महापंचायत के बाद किसानों को अपनी शक्ति का एहसास हुआ है. अब यूपी के हर गांव में किसान अपनी समस्याओं के लिए आंदोलन करेगा. 

किसानों आंदोलन की आड़ में भाजपा विरोधी दल अपने लिए माहौल बना रहे हैं?
किसान अपनी लड़ाई खुद लड़ रहा है. मुजफ्फरनगर की किसान पंचायत में आने वाले किसानों की दो दिन मजदूरी, आने-जाने का खर्च जोड़ लें तो कुल 20 करोड़ रुपए से अधिक खर्च हुआ है.

किसानों के 35 लाख रुपए तो महापंचायत स्थल पर व्यवस्था करने में खर्च हुए हैं. भाजपा सरकार पाकिस्तान, चीन के साथ शांतिवार्ता कर सकती है लेकिन अपने देश के किसानों के साथ बैठक नहीं कर सकती. बातचीत हो, दो कदम सरकार पीछे हटे तो एक-आधा कदम किसान भी पीछे हट जाएंगे. 

 ● भारतीय किसान यूनियन पर हाइवे को टोल फ्री करवाने जैसी गलत मांगों पर दबाव बनाकर किसानों का समर्थन जुटाने का आरोप लग रहा है?
हर वह मुद्दा जो किसानों को बेवजह परेशान कर रहा है, हम उसका विरोध कर रहे हैं. 

किसान महापंचायत के मंच से हिंदू-मुस्लिम एकता की बात पर काफी जोर दिया गया? 
भाजपा जब कमजोर पड़ती है तो वह दंगे करवाती है. 2013 में मुजफ्फरनगर दंगे के बाद हिंदू-मुस्लिम एकता टूट गई थी. भाजपा सरकार की किसान विरोधी नीतियों ने हिंदू, मुस्लिम के साथ समाज के हर तबके को एक किया है. इस एकता को तोड़ने के लिए भाजपा फिर दंगे कराने की फिराक में है.

मुस्लिम विरोधी मतों को एकजुट करने के लिए भाजपा सरकार हिंदुत्व कार्ड खेल रही है?

धार्मिक स्थलों का विकास तो होना चाहिए. भाजपा की मंशा को जनता बखूबी समझ रही है. हम राम के असली वंशज हैं. हमारा गोत्र रघुवंशी है. राम मंदिर निर्माण में सरकार को हम किसानों भी सहयोग लेना चाहिए था. 

मुजफ्फरनगर की किसान पंचायत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ पहली बार यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधा गया?

हमने मोदी जी के साथ योगी जी को वोट दिया है. इसका मतलब यह नहीं है कि उनकी किसान विरोधी नीतियों को हम सहते रहेंगे. योगी जी का हम सम्मान करते हैं. योगी जी को भी किसानों के साथ बातचीत कर उनकी समस्याओं का हल निकालना चाहिए.

क्या भाजपा को हराने के लिए भारतीय किसान यूनियन यूपी में 2022 का विधानसभा चुनाव लड़ेगा?
किसान यूनियन चुनाव से दूर रहती है. मैं भाजपा को वोट नहीं दूंगा. अन्य किसान भी अपने विवेक से भाजपा के खिलाफ दूसरी राजनैतिक पार्टियों को वोट करने को स्वतंत्र हैं.

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