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अरविंद केजरीवाल की पीएम बनने की चाहत ही उनकी सबसे बड़ी चूक: अन्ना हजारे

अन्ना हजारे का कहना है कि आप के अंदर अगर कुछ लोग ऐसे ही हावी रहे तो उसके और बुरे वक्त आएंगे.

आप नेता अरविंद केजरीवाल के मार्गदर्शक और पूर्व साथी अण्णा हजारे ने आज तक के विशेष संवाददाता पंकज खेलकर को बताया कि आखिर आप विफल क्यों रही और क्या वह एक प्रभावी विपक्षी दल पार्टी बन सकती है.

आपके हिसाब से अरविंद केजरीवाल की सबसे बड़ी गलती क्या थीः राजनीति में उतरना, मुख्यमंत्री का पद छोडऩा या इतने बड़े पैमाने पर राष्ट्रीय स्तर के चुनाव में कूद पडऩा?
केजरीवाल की सबसे बड़ी गलती थी दिल्ली के मुख्यमंत्री का पद छोडऩा और इतने बड़े पैमाने पर लोकसभा का चुनाव लडऩा. केजरीवाल और मैं वर्षों तक साथ काम कर चुके हैं. जब उन्होंने राजनैतिक दल बनाने की इच्छा जाहिर की, तब ही मैंने उन्हें चेतावनी दे दी थी कि हमें संघर्ष का रास्ता अपनाना चाहिए, लेकिन उन्होंने मेरी बात नहीं मानी. हमारा इतिहास बताता है कि हमारे देश में वास्तविक सफलता संघर्ष से मिलती है, लेकिन केजरीवाल पार्टी बनाने के लिए अड़े थे. जब पहले साल में ही उन्हें भारी सफलता मिल गई तो उन्होंने सोचा, ‘‘अब मैं इस देश का प्रधानमंत्री बन सकता हूं.’’ यह उनकी सबसे बड़ी विफलता थी.

पिछले कुछ महीनों में क्या अरविंद ने आपसे मिलने की कोशिश की?
जब वे दिल्ली के मुख्यमंत्री थे तब मैं उनसे एक बार मिला था. मैंने उनसे कहा, ‘‘पूरे देश की चिंता मत करो, अपना ध्यान दिल्ली पर लगाओ,’’ लेकिन उन्होंने मेरी बात नहीं सुनी और लोकसभा का चुनाव लड़ा इस हार के बाद वे न तो मुझसे मिले हैं और न ही उन्होंने संपर्क किया है. वे अपनी मर्जी के मुताबिक चल रहे हैं. मेरा उनसे कोई संपर्क नहीं है.

आप के भीतर चल रहे मौजूदा टकराव को आप किस तरह से देखते हैं? यह एक असल लोकतांत्रिक संघर्ष है या पार्टी बिखर रही है?
आप के अंदर अगर कुछ लोग ऐसे ही हावी रहे तो मैं तो यह कह सकता हूं कि उसका और बुरा समय आएगा. आपको देश की सेवा करने के लिए दिमाग में सेवा के भाव को ही कूट-कूटकर भरना होगा. अगर दिमाग में राजनैतिक सत्ता का लालच आया तो समाज में पार्टी की छवि और बिगड़ेगी.

फरवरी, 2014 में आपने केजरीवाल को सत्ता का भूखा बताया था. क्या अब भी आपका ऐसा मानना है?
जी हां, केजरीवाल अगर राजनैतिक सत्ता के लिए लड़ाई जारी रखते हैं तो इस देश के बाकी लोगों को भी लगेगा कि वे सत्ता के लालची हैं और वे जो कुछ कर रहे हैं, अपने व्यक्तिगत हितों के लिए कर रहे हैं.

बतौर पार्टी आप का वजूद रहेगा?
मेरा रास्ता सही था. मेरा अब भी मानना है कि अरविंद को पार्टी नहीं शुरू करनी चाहिए थी. अच्छी बात यह है कि उनकी छवि अब भी साफ-सुथरी है. उन्होंने कई साल तक समाज के लिए काम किया है और इसी वजह से उन्हें इतने कम समय में काफी कुछ हासिल हुआ है. मैं नहीं समझता कि आप खत्म हो चुकी है. कई बार नादानी में गलतियां हो जाती हैं और अरविंद ने अपनी गलतियों को स्वीकार कर लिया है.

अपने पुराने शिष्य को क्या सलाह देंगे?
अब वे मेरे पास नहीं आएंगे क्योंकि हमारे विचार अलग-अलग हैं, अगर वे ऐसा करते हैं तो मैं स्वागत ही करूंगा क्योंकि वे समाज की भलाई के लिए सोचते हैं.

मैं आप के कार्यकर्ताओं को यह सलाह देना चाहूंगा कि एकजुट रहें, पार्टी के लिए काम करें और समाज से बुराइयों को बुहार कर दूर करने के लिए अपने पार्टी के चुनाव चिन्ह झाड़ू का इस्तेमाल करें.

आप का भविष्य क्या है?
यह एक बेहतरीन विपक्षी दल बन सकता है. सत्ताधारी पार्टी अगर कोई गलती करती है तो उन्हें इसका जोरदार विरोध करना चाहिए. सिर्फ अरविंद की पार्टी ही ऐसा कर सकती है.

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