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''मध्य प्रदेश में मंदी का कोई असर नहीं''

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने एक सवाल के जवाब में कहा, मुझे नहीं पता कि प्रधानमंत्री खुद की मार्केटिंग करते हैं या देश की?

मंदार देवधर मंदार देवधर

मध्य प्रदेश की नौ माह पुरानी कमलनाथ सरकार अक्तूबर में इंदौर में अपना पहला व्यापार सम्मेलन आयोजित करने की योजना बना रही है. पूर्व केंद्रीय वाणिज्य मंत्री कमलनाथ को पिछले कई दशकों से उनके लोकसभा क्षेत्र छिंदवाड़ा में उद्योग लाने का श्रेय दिया जाता है. अब यही काम उन्हें राज्य के लिए करना है. मुख्यमंत्री ने राहुल नरोन्हा से अपनी योजनाओं के बारे में बात की. कुछ अंश:

मध्य प्रदेश सरकार 'अद्वितीय मध्य प्रदेश' नाम से अपना पहला व्यापार सम्मेलन आयोजित करने जा रही है. जबकि अतीत में आप ऐसे कदमों की आलोचना किया करते थे. उसे बेकार तक कह दिया था. अब यह बदलाव कैसा?

यह वैसा नहीं है. पिछले 10 वर्षों में हमने निवेशक सम्मेलन आयोजित किए जिनमें ऑप्टिक्स के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे, पर वे पूरे नहीं हुए. हमारा विचार अलग है. आज, मध्य प्रदेश देश की धड़कन बन चुका है और यही इसकी सबसे आकर्षक राज्य होने की पहचान है. भारत का दिल होने के नाते इसके इर्दगिर्द देश की 60-65 प्रतिशत आबादी बसती है. नई जीएसटी प्रणाली ने राज्य के आकर्षण को बढ़ा दिया है. निवेशकों का ट्रैक रिकॉर्ड भी देखना होगा. हमारे सबसे अच्छे ब्रांड एंबेसडर कौन हैं? वही आज हमारे बड़े निवेशक भी हैं.

आप यह कैसे तय करेंगे कि जिस निवेश का वादा किया गया है, वह राज्य में लगेगा ही?

निवेश विश्वास पर टिका होता है. आप इसे मांगते नहीं. जब तक निवेशक को सरकार और राज्य के लोगों पर भरोसा नहीं होगा, वह निवेश नहीं करेगा. हम यही संदेश देना चाहते हैं कि यह राज्य सभी निवेश प्रस्तावों पर तेजी से काम करेगा. हम सभी आवश्यक सहायता और सुविधाएं उपलब्ध कराएंगे. मध्य प्रदेश किसी परियोजना को अन्य राज्य की तुलना में दो साल पहले पूरा करने का माहौल उपलब्ध कराता है तो यह निवेशकों को दो साल के समय की बचत का फायदा दे रहा है. हमारे मौजूदा निवेशक भविष्य में निवेश करने वाले लोगों से बात करेंगे. हम विभिन्न क्षेत्रों पर आधारित सत्र आयोजित करेंगे जिनमें निवेशकों के मुद्दों और समस्याओं पर चर्चा की जाएगी.

पिछली तिमाही में देश की जीडीपी वृद्घि दर 5 प्रतिशत थी, जो बहुत आकर्षक नहीं है. आप उम्मीद कैसे जगाएंगे?

देश में निराशा का माहौल है. लोग निवेश करने से कतरा रहे हैं. यहां तक कि खर्च करने से भी डर रहे हैं. मुझे लगता है कि इसका जवाब केंद्र सरकार को देना चाहिए. अच्छी बात यह है कि मध्य प्रदेश में ऐसा माहौल नहीं है. वाहनों की बिक्री में अन्य राज्यों के मुकाबले यहां मंदी नहीं दिखी. मैं सीआइआइ की बैठक में भाग लेने  इंदौर गया था, जहां लोगों से बातचीत से साफ पता चला कि मध्य प्रदेश में कोई मंदी का माहौल नहीं है. देश के बाकी हिस्सों में जो हो रहा है, उससे मध्य प्रदेश पर असर नहीं पड़ा है.

विलंब के लिए अक्सर राज्य के प्रशासनिक तंत्र को दोषी ठहराया जाता है ...

मैं उद्योग मंत्री भी रहा हूं. प्रशासनिक तंत्र में आमूल-चूल बदलाव आ रहा है. 'चलता है' वाला रवैया अब नहीं चलता. अब, ज्यादातर निवेशकों से मैं खुद मिलता हूं और पूछता हूं कि काम चल रहा है या नहीं? जहां तक रफ्तार की बात है, सरकारी अधिकारियों को निवेशकों से आगे रहना होगा. सबसे महत्वपूर्ण बात, निवेशकों तक यह बात साफ तौर पर पहुंचनी चाहिए कि यहां काम तेजी से संपन्न होता है.

प्रधानमंत्री पूरी दुनिया में भारत की मार्केटिंग करते हैं, लेकिन क्या आपको लगता है कि कुछ क्षेत्रों में निवेश ज्यादा पहुंचा है?

मुझे नहीं पता कि प्रधानमंत्री खुद की मार्केटिंग करते हैं या देश की. 2014 से 2019 के बीच आने वाले निवेश की भूमिका 2014 से पहले तैयार हुई थी. उसके बाद भारत में कोई बड़ा निवेश नहीं आया है; रिकॉर्ड और आंकड़ों से आप जांच सकते हैं.

आज बेरोजगारी के बजाय रोजगार अयोग्यता की समस्या ज्यादा है, ऐसे में कौशल विकास में आपकी योजना क्या है?

मध्य प्रदेश या पूरे देश की भी तुलना करें तो कौशल विकास केंद्रों की सबसे बड़ी संख्या मेरे जिले छिंदवाड़ा में है. कुशल भारत नारा लगने के करीब 10-12 साल पहले से हम इस दिशा में काम कर रहे हैं. हमें नतीजे ध्यान में रखकर कौशल विकास करना होगा, क्योंकि नतीजों से ही लोगों को हुनरमंद बनाने की सफलता या विफलता का मूल्यांकन किया जा सकता है.

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