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'बंगाल एक तरह के डर में जी रहा है; मीडिया का मुंह बंद किया जा रहा है'

जगदीप धनखड़ पूछते हैं, ''अन्य सभी प्रयास कर लेने के बाद जादवपुर विश्वविद्यालय में जाकर हालात को शांत करने के मेरे प्रयास में राजनैतिक क्या था?''

सुबीर हलदर सुबीर हलदर

मुश्किल से दो महीने पहले पश्चिम बंगाल के राज्यपाल का कार्यभार संभालने वाले जगदीप धनखड़ ने अपनी अतिसक्रिय कार्यशैली से यहां के राजनैतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है. सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस का मानना है कि वे एक 'राजनैतिक एजेंडे' के तहत काम करते हुए अपनी सीमाओं का अतिक्रमण कर रहे हैं. लेकिन इस हमले से अविचलित धनखड़ संविधान की रक्षा करने और लोगों के कल्याण के लिए काम करने की प्रतिबद्धता जता रहे हैं. रोमिता दत्ता को दिए उनके साक्षात्कार के अंश:  

आपने ऐसे समय कार्यभार संभाला है जब पश्चिम बंगाल में राजनैतिक उत्तेजना छाई है और राज्य तृणमूल कांग्रेस तथा भाजपा के बीच एक रस्साकशी में फंसा हुआ है. इन स्थितियों में आप अपनी भूमिका को कैसे देखते हैं?

यह चुनौतीपूर्ण दायित्व है. पर मेरे काम की सीमाएं संविधान से तय होंगी. मैंने बंगाल के लोगों की सेवा करने की शपथ ली है. इसके रास्ते में कोई बाधा नहीं आएगी. मैं निर्भय और उत्साह के साथ चुनौतियों का सामना करूंगा.

आप के सामने कैसी चुनौतियां हैं?

मेरा संवैधानिक दायित्व है कि समाज के कमजोर वर्गों को लाभ पहुंचाने के लिए बनी केंद्रीय योजनाओं की स्थिति का आकलन करूं. इस संबंध में यदि राज्य अथवा केंद्र सरकार को चेताने की जरूरत होगी तो मैं करूंगा. मैं राज्य और यहां के लोगों को बेहतर तरीके से जानने के लिए जिलों का दौरा करूंगा. राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति के रूप में राज्य के शैक्षिक वातावरण के बारे में मैं गंभीरता से चिंतित हूं. अगर मैं बंगाल में कुछ चीजें सुधारना चाहता हूं, तो, इसमें बुराई क्या है?

आलोचकों का दावा है कि अमित शाह ने आपको बंगाल में किसी 'खास काम' के लिए खास तौर पर चुना था.

मेरा सिर्फ एक एजेंडा है—अपने पद की शपथ से बाहर न जाना और अन्य गतिविधि में शामिल न होना. क्या आप एक भी मौके का जिक्र कर सकती हैं जब मैंने लक्ष्मण रेखा लांघी हो? अन्य सभी प्रयास कर लेने के बाद जादवपुर विश्वविद्यालय जाकर (कैंपस में केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो के साथ खींचतान की घटना के बाद 19 सितंबर को) हालात को शांत करने के मेरे प्रयास में सियासी क्या था? मेरी सुरक्षा खतरे में पड़ी. बंगाल को फिर से शीर्ष पर देखने की इच्छा में राजनीति कहां है?

सत्तारूढ़ दल को आपकी टिप्पणियों और गतिविधियों पर गंभीर आपत्ति है. सरकार के एक मंत्री ने सुझाव दिया है कि आपको राज्य के पर्यटन स्थलों का दौरा करना चाहिए, न कि जिलों का.

मुख्यमंत्री ने इस बारे में एक बार भी कुछ नहीं कहा है. मेरे मन में उनके प्रति बहुत सम्मान है. पर उन्होंने मुंहफट लोगों को असहिष्णुतापूर्ण माहौल पैदा करने दिया है. यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कोई माननीय मंत्री राज्यपाल की भूमिका को पर्यटक तक सीमित रखने जैसी घटिया सोच रखे. यह अपमानजनक है.

आप राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति का आकलन कैसा करते हैं? यहां राजनैतिक हत्याएं हुई हैं.

पश्चिम बंगाल एक तरह के डर के साये में है. सरकार ने जिस तरह मेरी मौजूदगी—चाहे वह सिलीगुड़ी में हो या फिर कोलकाता के दुर्गापूजा मेले में—के प्रति असहिष्णुता का प्रदर्शन किया है और जिस तरह से मीडिया ने राज्य के प्रथम सेवक के अपमान पर चुप्पी साधे रखी, वह संकेत करता है कि भय का वातावरण है और मीडिया का मुंह बंद किया जा रहा है. राजनैतिक हत्याएं होना शर्मनाक है क्योंकि यह लोकतांत्रिक सिद्धांतों के विपरीत है और इन पर उचित कार्रवाई की जानी चाहिए.

राज्यपाल-मुख्यमंत्री समीकरण तो किसी शीतयुद्ध से कम नहीं है.

मैं अब भी ममता बनर्जी को बंगाल में अपनी सबसे अच्छी मित्र के रूप में देखना पसंद करूंगा. असहमतियों को शत्रुता के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. मैंने नेपथ्य में कुछ ऐसे प्रयास किए हैं जिनसे शत्रुता से बचा जा सके, जैसे शिक्षा मंत्री से मेरा पत्र-व्यवहार. बंगाल के लोग मेधावी हैं और समझ जाएंगे कि कौन आक्रामक हो रहा है.

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