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''अगर कानून का शासन हिंदुत्व है, तो मुझे कोई ऐतराज नहीं’’

कर्नाटक के मुख्यमंत्री बासवराज बोम्मई ने गद्दी पर साल भर पूरे होने के मौके पर ग्रुप एडिटोरियल डायरेक्टर राज चेंगप्पा से अपनी उपलब्धियों और चुनौतियों पर बातचीत की. मुख्य अंश:

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कर्नाटक के मुख्यमंत्री बासवराज बोम्मई कर्नाटक के मुख्यमंत्री बासवराज बोम्मई

आपका व्यापक राजनैतिक अनुभव रहा है. आप मंत्री भी रह चुके हैं. राज्य के एक पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे भी हैं. मुख्यमंत्री होने और इस काम के आपके नजरिए के लिए क्या चुनौतियां हैं?

अपने राजनैतिक करियर के बिल्कुल पहले दिन से मुझे लोगों की राजनीति और सत्ता की राजनीति के बीच चुनना पड़ा. मुझे लगा कि मुझे जनता की राजनीति करनी चाहिए क्योंकि सत्ता तो इसका बाइप्रोडक्ट ही है. मैं जन अभियानों और संघर्षों से जुड़ा रहा हूं और मुझे उनके साथ रहना बहुत अच्छा लगता है.

मुख्यमंत्री होना बहुत अलग है और यह भारी जिम्मेदारी भी है, जिसके साथ तमाम किस्म की चुनौतियां हैं. कतार के आखिरी आदमी को भी लगना चाहिए कि यह सरकार उसके लिए है. लोगों की आकांक्षाएं इतनी ज्यादा हैं कि उन्हें पूरा करने के लिए आपको अत्यधिक ऊर्जावान ढंग से काम करने की जरूरत है.

 एक साल के मुख्यमंत्री काल में आप अपनी किन तीन या चार उपलब्धियों की चर्चा करना चाहेंगे?

पहली बात तो यह है कि जब भी लोग परेशानी में रहे, सरकार उनके साथ खड़ी हुई. कुछेक उदाहरण दूं, तो जब भारी बाढ़ आई, मैं न केवल उन जगहों पर गया, बल्कि बचाव की कोशिशों के अलावा हमने उन्हें भारी राहत भी दी, जो सामान्य से काफी ज्यादा थी. हमने किसानों को दी जाने वाली राहत भी दोगुनी कर दी और उन्हें 1,600 करोड़ रुपए दिए. हम जरूरतमंदों को पांच लाख से ज्यादा आवास दे चुके हैं.

दूसरे, विकास का पूरा नजरिया, जिसमें हमने 100 से ज्यादा आकांक्षी तालुका बनाए हैं, और जो भी असंतुलन हैं, खासकर जो शिक्षा, स्वास्थ्य और मातृ तथा बाल कल्याण से जुड़ा है, उस सबको मैं दुरुस्त करना चाहता हूं. तीसरे, हमने खुशहाली के राजमार्ग के तौर पर शिक्षा पर जोर दिया है, और मैंने 8वीं कक्षा से ऊपर की लड़कियों और प्री-यूनिवर्सिटी से ऊपर के लड़कों के लिए स्कॉलरशिप शुरू की.

 आपने महिलाओं के रोजगार के लिए एक खास योजना भी शुरू की है.

हां. वह चौथी बात है. अर्थव्यवस्था का मतलब धन नहीं, बल्कि लोग और उनकी गतिविधियां हैं. इसलिए, मैंने अब एक योजना बनाई है जिसमें हम इस साल उद्यमिता के माध्यम से पांच लाख से ज्यादा महिलाओं को रोजगार देने जा रहे हैं. यह आदि से अंत तक दृष्टिकोण होगा; हम उन्हें मूल धन, 'ऐंकर बैंक’ हस्तक्षेप, उत्पाद और मार्केटिंग दे रहे हैं. इन सब उपायों से लोगों को अपनी प्रति व्यक्ति आमदनी और राज्य की खुशहाली बढ़ाने में मदद मिलेगी.

 आपकी कल्याण योजनाओं की तारीफ हुई है, वहीं भ्रष्टाचार के मसले भी हैं, जिसमें ठेकेदारों ने आरोप लगाए कि उन्हें 40 फीसद कमिशन देना पड़ा. पुलिस वालों के खिलाफ भी भ्रष्टाचार के आरोप हैं.

बहुत अच्छा सवाल है. पहली बात तो यह कि ठेकेदारों की वह शिकायत मेरे कमान संभालने से ठीक पहले की गई थी. मैं (तब) मुख्यमंत्री नहीं था. दूसरे, मैंने इन ठेकेदारों को बुलाया और कहा, ''मुझे कुछ मामले दो जिनमें 40 फीसद दिया गया हो और मैं कार्रवाई करूंगा.’’ वे एक भी मामला नहीं दे पाए. इसके बजाए वे व्यवस्था में सुधार के सुझाव लेकर आए और मैंने वह सब फौरन कर दिया.

मैंने काम के आकलन की जांच के लिए रिटायर्ड हाइकोर्ट जज के मातहत उच्चस्तरीय समिति गठित कर दी, खासकर टेंडर कमिशन की जांच के लिए, जो भ्रष्टाचार का केंद्रबिंदु है. यह समिति 50 करोड़ रुपए से ऊपर की किसी भी परियोजना की छानबीन करेगी. पुलिस के मामलों में भी हमने कार्रवाई की, जिसमें एक शीर्ष पुलिस अधिकारी के खिलाफ सीआइडी जांच का आदेश देना भी है. हमने भ्रष्टाचार से कभी समझौता नहीं किया और जब भी जरूरत पड़ी, भाजपा और कांग्रेस दोनों के लोगों पर छापे मारे.

 आपके कैबिनेट मंत्री के.एस. ईश्वरप्पा को आरोपों की वजह से इस्तीफा देना पड़ा. इस मामले में ताजा स्थिति क्या है?

पूरे मामले में विस्तार से पूछताछ की गई और पुलिस ने कहा कि इसमें उनकी भूमिका का कोई सबूत नहीं है. अब कोर्ट में इसकी छानबीन होगी, ताकि न्यायिक मुहर लग जाए.

 दूसरा बड़ा मुद्दा बढ़ते सांप्रदायिक तनाव को लेकर है, चाहे वह हिजाब का विवाद हो, आपने जो धर्मांतरण विरोधी कानून पारित किया, या हलाल मीट परोसे जाने का मुद्दा. आलोचकों का कहना है कि आप खुद हिंदुत्व वालों से ज्यादा हिंदुत्ववादी हो रहे हैं.

हिजाब के मुद्दे को मैं राजनैतिक या सांप्रदायिक के तौर पर नहीं देखता. मैं इसे नियम-कायदों के पालन के रूप में देखता हूं और इस नजरिए से मदद मिली है. अब सब कुछ सुलझ गया है और कोई परेशानी नहीं है. कई अल्पसंख्यक राजी हैं कि ड्रेस कोड होना चाहिए. सारी परेशानी यह है कि खामोश बहुसंख्यकों की राय को तवज्जो नहीं दी जाती और शोर मचाने वाले कुछ लोगों को मीडिया में बहुत ज्यादा जगह दी जाती है.

जहां तक हलाल की बात है, यह नियम पहले की कांग्रेस सरकार ने बनाया था. हमने इसका पालन भर किया, जैसे हमने लाउडस्पीकर के मुद्दे को लेकर भी किया, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने अब एक व्यवस्था दी है. मेरे मन में इसका कोई रंज नहीं है. अब सब नियम का पालन कर रहे हैं और शांति है.

 विधानसभा में धर्मांतरण विरोधी कानून पारित करने के पीछे उकसावा क्या था?

र्मांतरण विरोधी कानून इस देश में नए नहीं हैं. वे ठेठ महात्मा गांधी के जमाने से रहे हैं. हम सब जानते हैं कि प्रलोभन या बल से धर्मांतरण की इजाजत खुद संविधान में भी नहीं दी गई है. संविधान में जो कहा गया है और पहले के कानूनों में जो कहा गया है, बस उसे ही दोहराया गया है. जोर-जबरदस्ती का कोई काम नहीं होगा, कोई गैर-कानूनी काम नहीं होगा. हम नियम के हिसाब से चलेंगे, आपको भी इसका पालन करना होगा.

 आप 2008 में भाजपा में आए, क्या इसलिए आप अपनी हिंदुत्व की साख साबित करने में जुटे हैं?

मैं ऐसे ड्रॉइंग-रूम बयानों को लेकर परेशान नहीं हूं. मैं इसे इस तरह कहूंगा, अगर कानून के शासन का पालन हिंदुत्व है, तो मुझे इससे कोई ऐतराज नहीं है.

 भाजपा ने वंश मुक्त भारत की बात कही है. कुछ लिहाज से आप भी तो राजनैतिक वंश से ही आए हैं.

बहुत फर्क है. अव्वल तो मेरे पिता मेरे भाजपा में आने से पहले नहीं रहे. फिर मैंने खुद अपना राजनैतिक करियर बनाया और इसलिए नहीं कि मैं नेता का बेटा हूं. दूसरे मामलों में भी मैंने कभी अपने परिवार के नाम का इस्तेमाल नहीं किया. तो मेरी अपनी कड़ी मेहनत की बदौलत लोगों ने मुझे पहचाना और उसे भाजपा ने भी मान्यता दी.

 पूर्व मुख्यमंत्री येदियुरप्पा के बारे में क्या कहेंगे, जो अपने बेटे को भी विधायक बनाना चाहते हैं?

येदियुरप्पा ऐसे शख्स हैं जिन्होंने पिछले 40 साल से अपना जीवन भाजपा को समर्पित कर दिया. वे सात या आठवीं बार शिकारीपुरा का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और उन्होंने चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है. वे रिटायर हो रहे हैं और उस निर्वाचन क्षेत्र के लोग चाहते हैं कि उनका बेटा खड़ा हो, इसलिए उन्होंने यह सुझाव दिया. अब पार्टी आलाकमान इस पर फैसला करेगा.

 राज्य के औद्योगिक विकास को बढ़ाने के लिए आपने क्या किया?

मौजूदा चुनौतियों से पार पाने के लिए कारोबार करने में आसानी जरूरी थी, इसलिए हमने एक के बाद एक कई उपाय किए, जिनमें हमने प्रक्रियाओं को इतना आसान बनाया कि कारोबार स्थापित करने के इच्छुक किसी को परेशानियां न झेलनी पड़ें. हमारे यहां क्षेत्रों के लिए विशेष नीतियां भी हैं. बड़े क्षेत्रों में हमने उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन लाभ या पीएलआइ दिए, जो दूसरे राज्यों के मुकाबले ज्यादा हैं.

केंद्र की मंजूरी मिल जाती है तो हमारे यहां पहला सेमीकंडक्टर प्लांट लगने जा रहा है और हम एफएमसीजी के लिए एक क्लस्टर की स्थापना भी कर रहे हैं. इनके अलावा, हम विशेष निवेश क्षेत्र बना रहे हैं, स्टार्ट-अप का वित्त-पोषण कर रहे हैं, और गैरेज से लेकर संस्थाओं तक, जीनोमिक्स से लेकर अंतरिक्ष और स्टार्ट-अप के विभिन्न क्षेत्रों में जाने के लिए युवाओं को बढ़ावा देने तक आरऐंडडी की नीति लाने वाले पहले राज्य हैं. अब हमारे यहां आरऐंडडी है; कर्नाटक देश का पहला राज्य है जहां आरऐंडडी नीति है. यह सब कर्नाटक को हमारे देश का भावी आर्थिक इंजन बना देगा.

 बेंगलूरू का बुनियादी ढांचा बुरी हालत में है और यहां तक कि तेलंगाना के मंत्री के.टी. रामराव ने निवेशकों को यहां के बजाए हैदराबाद आने के लिए आमंत्रित किया है...

बेंगलूरू का मुकाबला देश के किसी भी दूसरे शहर के साथ नहीं है. हमारा मुकाबला सिलिकन वैली के साथ है. हमारी ताकत हमारा ईकोसिस्टम है, जो उद्यमियों, टेक्नोलॉजिकल हब, तकनीकी तौर पर होनहार लोगों के विशाल पूल और कारोबार करने में आसानी के लिए वाकई मददगार है. अब देश की 38 फीसद एफडीआइ कर्नाटक में आ रही है. बुनियादी ढांचे के मामले में परेशानी जरूर है.

ट्रैफिक जाम खत्म करने के लिए हम सड़कें चौड़ी कर रहे हैं और दर्जन भर गलियारे बना रहे हैं जिस पर सिग्नल नहीं होंगे. मगर स्थायी समाधान की जरूरत है. हम एक योजना तैयार कर रहे हैं जिसमें हम चार सैटेलाइट नगर स्थापित करेंगे जो रेल और सड़क के जरिए इस शहर से जुड़े होंगे. वह खूबसूरत और सुनियोजित ग्रेटर बेंगलूरू होगा, जिसे विकसित करने की योजना हम बना रहे हैं.

 आप दिल्ली आते हैं तो आपके कैबिनेट विस्तार की मंजूरी लेने की बात होती है. क्या यह होने जा रहा है?

हम कैबिनेट का विस्तार करने जा रहे हैं. कब और कैसे, यह भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व तय करेगा. जब वे तय करेंगे, मैं आपको बताऊंगा.

 राज्य के विधानसभा चुनाव मई 2023 में होने हैं. ऐसे में जो एक साल आपके पास बचा है, उसमें आप किन चीजों पर फोकस करने की योजना बना रहे हैं और क्या आपको भरोसा है कि भाजपा को फिर सत्ता मिलेगी?

मेरी प्राथमिकता अपना बजट लागू करना है. दूसरी प्राथमिकता सरकार में बहुत सारे बदलाव लाना है जो लोगों की समस्याओं का तुरत-फुरत समाधान पक्का करेंगे. तीसरा, युवाओं, किसानों और महिलाओं सहित समाज के तमाम तबकों को यह एहसास देना है कि यह सरकार उनके लिए है, और इस हद तक उनकी मदद करने के लिए है कि वे स्वाभिमान की जिंदगी बसर करेंगे.

जो पिरामिड के बिल्कुल निचले तल पर हैं, उन्हें ऊपर उठाने के लिए मैं सारी ताकत, समय और ऊर्जा लगा रहा हूं और मुझे यकीन है कि इससे फर्क पड़ने जा रहा है. जहां तक चुनाव की बात है, अमित शाह जी ने 150 सीटों का लक्ष्य दिया है और हम 150 से ज्यादा सीटें जीतने के लिए पूरा जोर लगाने जा रहे हैं.

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