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बातचीतः मुझे अतीत का पछतावा या भविष्य की चिंता नहीं होती, मैं वर्तमान में जीता हूं

मुझे जो कार्य दिया जाता है उसमें मैं अपना सौ फीसद देता हूं. बाकी सब ईश्वर और मेरे राज्य के लोगों के ऊपर है. मैंने मुख्यमंत्री बनने के लिए लामबंदी नहीं की

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

इस 4 जुलाई को पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड के 11वें मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली. वे तीरथ सिंह रावत के चार महीनों के विवादास्पद कार्यकाल और उनके इस्तीफे के बाद मुख्यमंत्री बने हैं. इंडिया टुडे के ग्रुप एडिटोरियल डायरेक्टर राज चेंगप्पा और सीनियर एडिटर अनिलेश एस. महाजन से बातचीत में धामी ने कहा कि वे भाजपा के विकास के एजेंडे को आगे बढ़ाने और हरेक को बतौर टीम साथ ले चलने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

चुनाव छह महीने दूर हैं और हॉटसीट पर आप हैं. आपकी प्राथमिकताएं क्या हैं?

मेरे पूर्ववर्तियों की शुरू की गईं कुछ परियोजनाएं हैं जिनको वक्त पर पूरा करना है. उसके बाद, मुझे राज्य के महकमों में 24,000 रिक्तियों को भरना है. मैंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे समय सारिणी का पालन करें ताकि इसे हम साल 2021 के आखिर तक पूरा कर पाएं.

2017 में निर्णायक जनादेश मिलने के बावजूद चार महीनों में भाजपा ने दो बार मुख्यमंत्री बदल दिया है. वोटरों के लिए आपका संदेश क्या होगा?

2014 से, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्र में सत्ता संभाली, उत्तराखंड को विकास परियोजनाओं में अपना हिस्सा मिलता रहा है. आप देहरादून जाएं या बद्रीनाथ या गंगोत्री जैसे तीर्थस्थल, या पिथौरागढ़ जैसे दूरदराज के क्षेत्रों की ओर निकलें, जमीनी स्तर पर आपको विकास कार्य दिखेंगे. कर्णप्रयाग-ऋषिकेश रेलवे ट्रैक और केदारनाथ पुनर्वास परियोजनाओं पर तेजी से काम हो रहा है. भाजपा सरकार ने आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वच्छ भारत और अन्य सामाजिक योजनाओं को दूरदराज के इलाकों तक पहुंचाया है.

विकास को छोड़कर, क्या आप बता सकते हैं कि बार-बार मुख्यमंत्री बदलने की जरूरत क्यों पड़ी?

भाजपा में, हम बतौर टीम चुनाव लड़ते हैं. मैं अपनी ओर से सर्वश्रेष्ठ करूंगा और मुझे भरोसा है कि लोग मेरा काम देखेंगे. मेरी नियुक्ति के साथ, काडर और वोटर का मूड बदल गया है.

मुख्यमंत्रियों के पास अमूमन अपने राज्य को बदल देने की दृष्टि होती है. उत्तराखंड के विकास के लिए आपके पास कोई अनूठी योजना है?

मैं एक सैनिक का बेटा हूं और मुझमें अनुशासन तथा समय की पाबंदी का गुण माता-पिता से विरासत में आया है. मेरा विजन उत्तराखंड को एक आदर्श राज्य बनाने का है. केंद्र की मदद से, हम लोग कोल्ड स्टोरेज और गोदाम जैसे कृषि इन्फ्रास्ट्रक्चर खड़े करेंगे. हमने पहले ही नौकरशाही में बदलाव किया है—और नए मुख्य सचिव को नियुक्त किया है.

एक बार फिर से पर्यटकों की भीड़ जमा हो रही है. महामारी की तीसरी लहर का भी खतरा है. आप इससे कैसे निबटेंगे?

हम जल्द ही हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के लिए राहत पैकेज का ऐलान करेंगे. हमारी सरकार जीवन रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. मौजूदा प्रोटोकॉल के मुताबिक, होटल 50 फीसद क्षमता के साथ खुले हैं और राज्य में प्रवेश के लिए आरटी-पीसीआर रिपोर्ट अनिवार्य है.

आप जिन राहत और विकास परियोजनाओं की बात कर रहे हैं, उसके लिए पैसा कहां से आएगा?

इनमें से कई परियोजनाओं के लिए केंद्र सरकार की एजेंसियां खर्च का बड़ा हिस्सा वहन कर रही हैं. मैं पहले ही 12 महत्वपूर्ण केंद्रीय मंत्रियों से मिलकर उनसे मदद का अनुरोध कर चुका हूं. मैं प्रधानमंत्री के साथ भी संपर्क में हूं—वे राज्य को समझते हैं और मेरा मार्गदर्शन कर रहे हैं.

आप कैबिनेट में सबसे युवा और सबसे जूनियर भी हैं. प्रदेश भाजपा में इतने गुटों और धड़ों के होते हुए नेतृत्व करना कितना मुश्किल है?

ऐसी कोई चुनौती नहीं है. मैं सभी वरिष्ठ नेताओं से उनके सहयोग और मार्गदर्शन के लिए मिल रहा हूं. सबको साथ लेकर चलने का कौशल होना चाहिए—यही टीम भावना है. मैं कड़ी मेहनत करता हूं—सुबह पांच बजे जागता हूं और आधी रात के बाद तक काम करता हूं. मैं वर्तमान में जीता हूं, मुझे अतीत का पछतावा नहीं और भविष्य की मैं चिंता नहीं करता. मुझे जो कार्य दिया जाता है उसमें मैं अपना सौ फीसद देता हूं. बाकी सब ईश्वर और मेरे राज्य के लोगों के ऊपर है. मैंने मुख्यमंत्री बनने के लिए लामबंदी नहीं की.

आपके पदोन्नयन के साथ, लगता है कि भाजपा राज्य में सत्ताविरोधी लहर से निपटने के लिए बहुत सारे युवा चेहरे लेकर आएगी.

यह पार्टी तय करेगी.

आपको उत्तराखंड में कांग्रेस या आम आदमी पार्टी से खतरा महसूस होता है?

राज्य में विपक्ष की कोई साख नहीं. राज्य में ऊर्जा से भरे युवाओं ने फिर उनका बुलबुला फोड़ दिया है. युवाओं से मिल रही प्रतिक्रिया अद्भुत है. वे समझते हैं कि मैं उनके एजेंडे को पूरा करने के लिए लाया गया हूं—चाहे नौकरियां हों या राज्य के विकास में उनकी सहभागिता.

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