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तेज खोपड़ी वाली शकुंतला

जल्द ही शकुंतला देवी के किरदार में आ रहीं विद्या बालन अपने दिमाग में इस बात को लेकर एकदम स्पष्ट थीं कि उसे ढर्रे वाली और उबाऊ कतई नहीं होना चाहिए.

विद्या बालन विद्या बालन

जल्द ही शकुंतला देवी के किरदार में आ रहीं विद्या बालन अपने दिमाग में इस बात को लेकर एकदम स्पष्ट थीं कि उसे ढर्रे वाली और उबाऊ कतई नहीं होना चाहिए.

● बायोपिक्स अमूमन प्रशंसात्मक/वर्णनात्मक होती हैं. शकुंतला देवी क्या उससे अलग तरह की है?

इस बात को लेकर मैं दिमाग में बिल्कुल साफ थी: बायोपिक अगर चुनूंगी तो ऐसी कि जिसमें कोई जान हो. इन्हें देखना अक्सर बोरिंग होता है. इसी वजह से मुझे द डर्टी पिक्चरर के बाद बायोपिक्स के कई ऑफर ठुकराने पड़े. शकुंतला देवी के बारे में इतना ही जानती थी कि वे एक मानव कंप्यूटर थीं और उन्होंने गिनेस बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में जगह बनाई थी. उन पर फिल्म बनाने के लिए इतनी वजह काफी थी. पर वे मां भी थीं और बेटी के साथ टकराव उनका बड़ा दिलचस्प पहलू था. मां-बेटी वाली फिल्में हम लोगों ने देखी नहीं हैं.

● ऐसा क्यों सोचती हैं आप?

ड्रामे के लिहाज से इस रिश्ते में बड़ी संभावना है. मैं सबसे ज्यादा मां से ही लड़ती हूं. वक्त के साथ अब थोड़ा नरम पड़ गई हूं. पर मेरा गुस्सा उन्हीं पर निकलता था. हमारी फिल्मों में मां को ग्लोरिफाइ किया गया है. हम उसे एक इनसान की तरह देख ही नहीं पाते.

● वर्चुअल प्रोमोशन से आपको ऊब हुई कि नहीं?

शुरू में मैं घर से ही कर रही थी. घर के कोने-कोने से कर डाला. अब थोड़ा बदलाव चाहती थी तो सिद्धार्थ (निर्माता पति) के ऑफिस चली गई. अब हमेशा घर पर भी तो नहीं बैठे रह सकते. जरूरी एहतियात बरतते हुए आपको काम पर तो लौटना ही होगा क्योंकि न करने पर आपको और दूसरों को कीमत चुकानी पड़ रही है.

● आपने एक शॉर्ट फिल्म प्रोड्यूस भी की है, जिसमें एक मां अपने बेटे को स्त्री समानता के बारे में समझा रही है. ऐसी क्या और भी फिल्में प्रोड्यूस करने की योजना है?

कतई नहीं. मैं एक्टिंग करती हूं और उसी में मस्त हूं, वही करना चाहूंगी. प्रोड्यूसर का काम तो भइया, बहुत जिम्मेदारी वाला होता है, हर चीज को और सभी लोगों को जोड़कर रखना. और वो सब मेरे बूते का नहीं.

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