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चुनाव से पहले सौगात

कृषि मंत्री का कहना है कि 31 मार्च तक सभी पात्र किसानों के खातों में निश्चित आय की पहली किस्त स्थानांतरित कर दी जाएगी

विक्रम शर्मा विक्रम शर्मा

बजट में 'प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि' (पीएम किसान) योजना के तहत देश के छोटे और सीमांत किसानों को निश्चित आय देने की घोषणा की गई. केंद्र सरकार की कोशिश है कि लोकसभा चुनावों से पहले ज्यादा से ज्यादा किसानों के खाते में इसकी पहली किस्त पहुंचा दी जाए. इस बारे में केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह कहते हैं, ''हमें उम्मीद है कि 15 दिनों में 2 हेक्टेयर तक की खेती योग्य भूमि रखने वाले छोटे और सीमांत किसानों का पूरा डेटा बेस हमारे पास होगा.'' इसके लिए मंत्रालय के अधिकारियों ने राज्यों से संपर्क किया है.

राज्यों के पास पहले से ही विभिन्न योजनाओं के प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के अंतर्गत लाभ पाने वाले लाभार्थियों की जानकारी है. सभी राज्यों से डेटा आने के बाद इसे सत्यापित कर मंत्रालय की वेबसाइट पर डाल दिया जाएगा. राधा मोहन सिंह बताते हैं, ''पीएम किसान योजना के तहत 2,000 रु. की पहली किस्त 31 मार्च तक सभी पात्र किसानों के खातों में निश्चित रूप से स्थानांतरित कर दी जाएगी.'' पैसा सीधे किसानों के खाते में जाएगा और इसमें कोई बिचैलिया नहीं होगा.

वहीं, किसानों को दी जाने वाली 6,000 रु. सालाना की राशि को बहुत कम बताकर विपक्ष सरकार को घेर रहा है. इस पर कृषि मंत्री कहते हैं, ''शहरों में वातानुकूलित कमरों में रहने वाले लोग इसे समझ नहीं सकते. किसान जानते हैं कि यह सहायता कितनी महत्वपूर्ण और उपयोगी है.

आलोचकों को गांव की जमीनी सच्चाई समझनी चाहिए.'' उनके मुताबिक, यह सहायता किसानों को साहूकारों के चंगुल से बचाएगी. भविष्य में पीएम किसान योजना के तहत सहायता राशि बढ़ाए जाने का संकेत देते हुए उन्होंने कहा, ''जैसे-जैसे हमारे संसाधन बढ़ेंगे, आय समर्थन राशि भी बढ़ेगी.'' इसके अलावा, राज्य भी अपने किसानों को सुनिश्चित आय सहायता प्रदान करने के लिए इस राशि में वृद्धि कर सकते हैं. तेलंगाना, ओडिशा जैसे राज्यों के उदाहरण पहले से ही मौजूद हैं. अंतरिम बजट के एक दिन बाद ही झारखंड सरकार ने भी किसानों को अतिरिक्त सहायता देने की घोषणा की.

कृषि मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सुनिश्चित आय समर्थन योजना के साथ पहले से चल रहीं सभी तरह की सब्सिडी जारी रहेंगी, जो किसानों को विभिन्न योजनाओं के तहत प्रदान की जा रही हैं. सरकार का किसी भी सब्सिडी को बंद करने का कोई इरादा नहीं है. वे कहते हैं, ''अगर इस तरह की सब्सिडी रोक दी जाएगी तो अराजकता होगी.'' जाहिर है, इस चुनावी साल में भाजपा सरकार ने किसानों को लुभाने के लिए अपना पिटारा खोल दिया है.

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