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बातचीतः असल में सबकी लड़ाई बसपा से है

बहन जी ओमिक्रॉन के इस दौर में प्रदेश में निकल गई होतीं तो क्या होता? इन्हें सत्ता का लालच है. हमें लोगों की जान की परवाह है.

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फैजान खान फैजान खान

बातचीत: फैजान खान, राष्ट्रीय प्रवक्ता, बसपा

एक नैरेटिव बनाया जा रहा है चुनाव में भाजपा-सपा आमने सामने हैं और बसपा लड़ाई से बाहर है?

असल में सबकी लड़ाई बसपा से है. लेकिन इसे बाइपोलर दिखाया जा रहा. क्योंकि ये दोनों दल एक दूसरे के पूरक और पोषक हैं. हिंदू-मुस्लिम की सियासत करते हैं. अगर आप डेटा भी देखें तो पाएंगे कि लोकसभा चुनाव में जब हम सपा से मिलकर लड़े थे तो हमारी 10 सीटें आईं थी और सपा की 5 सीटें. बसपा का वोट प्रतिशत भी ज्यादा था.

सपा सबसे पहले टिकट घोषित करती थी. पर इस बार क्या हो गया. सपा जानती है कि अगर उसने टिकट का ऐलान कर दिया तो उनकी किसी सभा में भीड़ नहीं दिखेगी. 

सभी दलों के नेता चुनाव मैदान में प्रचार कर रहे हैं लेकिन बहन जी कहीं नहीं निकल रहीं. मोदीजी अब तक एक दर्जन से ज्यादा रैलियां...?

रैलियां तो उन्होंने बंगाल में भी की थीं वो भी कोरोना काल में क्या नतीजा रहा? सबको रैली करने से मना किया जा रहा है. हमें जनता की जान की भी परवाह है. कांशीरामजी की पुण्यतिथि पर 9 अक्तूबर को बहनजी सिर्फ उन्हें श्रद्धांजलि देने निकली थीं और लाखों की भीड़ उन्हें देखने के लिए जमा हो गई.

अब अगर बहन जी ओमिक्रॉन के इस दौर में प्रदेश में निकल गई होतीं तो क्या होता? इन्हें सत्ता का लालच है. हमें लोगों की जान की परवाह है.

तो आप कहना चाहते हैं बहनजी कोविड के कारण रैलियां नहीं कर रहीं?

नहीं कोविड के कारण नहीं. हम अपनी पॉलिटिक्स अपने तरीके से करते हैं. अगर बहनजी नहीं निकलीं. तो विपक्ष के पेट में दर्द क्यों हो रहा है.

लेकिन विपक्ष को इससे बहाना मिल गया है वे कह रहे हैं कि तमाम जांचों से बहनजी को इतना डरा दिया गया है कि वो प्रचार नहीं कर रहीं हैं?

ये अफवाह फैला दी गई है बस. ये आपस की नूरा कुश्ती में बता रहे हैं कि ये इसका काला धन (कानपुर-कनौज इत्र व्यापारी प्रकरण) है ये उसका काला धन है.

ऐसा पहली बार है कि चुनाव में बसपा का कोई पुराना चेहरा नहीं दिख रहा. सब बड़े नेता पार्टी से निकाले जा चुके हैं?

इन्हें नेता किसने बनाया? मायावती ने ही इन्हें नेता बनाया न, वर्ना इन्हें कौन जानता था. नेता के जाने से फर्क नहीं पड़ता क्योंकि जनता तो हमारे साथ है. ये सब चुके हुए नेता थे. किसी को बेटे के लिए टिकट चाहिए था किसी को दामाद के लिए. बसपा में ये सब नहीं चलता. लालच और मोह में ये लोग दूसरे दलों में चले गए. देखिएगा इनका क्या हश्र होता है.

लेकिन अब वे ये प्रचार कर रहे हैं कि सतीश मिश्रा को आरएसएस ने बसपा को खत्म करने के लिए प्लांट किया है?

अब आप बताइए सतीशजी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव हैं. 72 साल की उम्र में भी रात दिन पार्टी के काम में लगे हैं. जो पार्टी के लिए मेहनत करता है उस पर भी आरोप लगाया जाएगा कि वो प्लांट किया गया नेता है. ये उनकी बौखलाहट है बस.

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