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''स्थिति नियंत्रण में है, मामले घटने लगे हैं''

लंपी वायरस की स्थिति और इससे निबटने के लिए सरकार की रणनीति पर केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री परशोत्तम रूपाला से सीनियर स्पेशल करेस्पॉन्डेंट हिमांशु शेखर की बातचीत के प्रमुख अंश:

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परशोत्तम रूपाला, केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरीमंत्री परशोत्तम रूपाला, केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरीमंत्री

लंपी वायरस को लेकर देश में मौजूदा स्थिति क्या है?
भारत में पहली बार लंपी वायरस का मामला 2019 के सितंबर महीने में ओडिशा में आया था. इस साल इस वायरस के मामले गुजरात, राजस्थान, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और अंडमान निकोबार में आए हैं. देश के कुल 54 जिलों में 8 अगस्त तक 1.51 लाख मामले रिकॉर्ड किए गए हैं. इनमें से 4,927 पशुओं की मौत हुई है.

लंपी वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य कौन-कौन से हैं?
8 अगस्त तक के आंकड़े बताते हैं कि लंपी वायरस के सबसे अधिक 60,851 मामले गुजरात में आए हैं. इसके बाद पंजाब में 44,429 मामले रिकॉर्ड किए गए. इसी तरह राजस्थान के कुल मामलों की संख्या 43,962 है. उत्तराखंड से 1,040 मामलों की जानकारी मिली है. हिमाचल प्रदेश की बात करें तो वहां 532 मामले सामने और अंडमान निकोबार से 360 मामले सामने आए हैं. लेकिन अगर पशुओं की मृत्यु का मामला देखें तो सबसे अधिक पशुओं की जान राजस्थान में गई है. इसके बाद गुजरात और फिर पंजाब में सबसे ज्यादा पशुओं को लंपी वायरस ने मौत के मुंह में ढकेला है. जिन राज्यों में संक्रमण और पशुओं की मौत के अधिक मामले सामने आ रहे हैं, वहां हम विशेष कार्ययोजना बनाकर राज्यों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं. 

केंद्र सरकार इसे कितने बड़े खतरे के तौर पर देख रही है?
अब स्थिति नियंत्रण में है. मामले घटने लगे हैं. राजस्थान में मामले तेजी से बढ़ रहे थे, लेकिन अब स्थिति नियंत्रण में है. 6 अगस्त को मैंने जयपुर में उच्च स्तरीय बैठक की थी जिसमें केंद्र सरकार और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ थे. जो कदम हमने उठाए, उसका प्रभाव दिख रहा है. 3 अगस्त को बाड़मेर में 312 मामले सामने आए थे. 9 अगस्त को यह संख्या घटकर 33 हो गई. यही स्थिति दूसरे जिलों की भी है. यह देखा जा रहा है कि लंपी वायरस से प्रभावित होने के बाद ठीक होने वाले जानवरों की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ रही है. इस बीमारी में जानवरों की मृत्यु दर सिर्फ एक से तीन प्रतिशत के बीच है. जो पशु स्वस्थ हैं और जिनका पोषण स्तर ठीक है, उनमें लंपी वायरस का खतरा कम रहता है.

लंपी वायरस को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार क्या कर रही है?
हम नियमित तौर पर प्रभावित राज्यों के साथ बैठक कर रहे हैं. समय पर जरूरी दिशानिर्देश जारी किए जा रहे हैं. हमने मंत्रालय में एक कंट्रोल रूम स्थापित किया है, जिसमें वरिष्ठ वेटरिनरी डॉक्टर्स हैं और जिनसे राज्य कभी भी संपर्क कर सकते हैं. हमने हेल्पलाइन भी शुरू की है. केंद्र सरकार की टीम प्रभावित जिलों का दौरा करके जमीनी स्तर पर तकनीकी मदद मुहैया करा रही है. बचाव के लिए वैक्सिनेशन अभियान चलाया जा रहा है. जिन राज्यों में यह बीमारी अब तक नहीं फैली है, उन राज्यों को भी इससे बचाव के लिए दिशानिर्देश जारी किए गए हैं. दीर्घकालिक तौर पर देखें तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 'वन अर्थ, वन हेल्थ' की जो बात कहते हैं, उस पर अमल करके हम अपने देश के पशुधन को सुरक्षित रख सकते हैं.

वैक्सिनेशन को लेकर अभी तक की क्या स्थिति है? क्या इसमें कोई प्राथमिकता भी तय की गई है?
हम स्वदेशी गोट पॉक्स वैक्सीन जानवरों को लगा रहे हैं. यह उत्तरकाशी स्ट्रेन से बना है. यह वैक्सीन लंपी वायरस के खिलाफ बेहद प्रभावी है. दुनिया में लंपी वायरस के खिलाफ जो वैक्सीन उपलब्ध हैं, उनमें और हमारे गोट पॉक्स वैक्सीन में 95 से 99 प्रतिशत तक समानता है. 9 अगस्त तक पूरे देश में 16.51 लाख पशुओं को वैक्सीन लगाई गई. जिन पशुओं को लंपी वायरस का संक्रमण हो गया है, उन्हें वैक्सीन नहीं लगाई जा रही है. जो जिले प्रभावित हैं उनके आस-पास के जिलों में रिंग वैक्सिनेशन रणनीति अपनाकर वैक्सिनेशन अभियान चलाया जा रहा है. आने वाले दिनों में जरूरत के हिसाब से इसका और विस्तार किया जाएगा. 4 अगस्त को मैंने वैक्सीन निर्माताओं के साथ एक बैठक की और केंद्र सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि वैक्सीन की कमी न हो पाए.

इस समस्या से निबटने के लिए राज्यों के साथ किस तरह का समन्वय चल रहा है?
केंद्र सरकार राज्यों के साथ नियमित समीक्षा बैठक कर रही है. राज्यों को हर मदद दी जा रही है. केंद्र सरकार राज्यों को जरूरी आर्थिक संसाधन भी उपलब्ध करा रही है. वैक्सिनेशन अभियान तेजी से बढ़े, इसके लिए भी राज्यों की आर्थिक मदद की जा रही है. केंद्र सरकार की ओर से राज्यों के प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण का कार्य भी किया गया है ताकि यहां से जो दिशानिर्देश जारी हों, उन्हें सही ढंग से जमीनी स्तर पर लागू किया जा सके. प्रभावित क्षेत्रों से दूसरे क्षेत्रों में पशुओं की आवाजाही को नियंत्रित करने, प्रभावित पशुओं के आइसोलेशन, क्लिनिकल सर्विलांस के लिए भी हमने जरूरी दिशानिर्देश राज्यों को दिए हैं. जिन पशुओं की मौत हो रही है, उन्हें जमीन में गहरा गड्ढा खोदकर सावधानीपूर्वक दफनाने से संबंधित निर्देश भी राज्यों को दिए गए हैं. इस बीमारी को लेकर आम लोगों में जागरूकता आए, इसके लिए हमने राज्यों को स्थानीय भाषा में जरूरी सूचनाओं वाले पर्चे वितरित करने को कहा है.

जिन किसानों को पशुधन का नुक्सान हुआ है, उन्हें मुआवजा या कोई राहत देने के लिए क्या केंद्र सरकार कोई योजना बना रही है?
पशुपालन राज्य का विषय है. केंद्र सरकार तकनीकी सहयोग दे रही है. वैक्सिनेशन में हम आर्थिक सहयोग दे रहे हैं. पशुधन के नुक्सान पर किसानों को आर्थिक राहत देने की कोई मांग अब तक हमारे पास किसी राज्य की तरफ से नहीं आई है.

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