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कोरोना संकटः 'भावनात्मक समर्थन दवा भी है'

मुझे चिंता थी कि कहीं मैंने अपने परिवार को संक्रमित न कर दिया हो. जब मुझे पता चला कि उन्हें संक्रमण नहीं है, तो मैं खूब रोया

रोहित दत्ता, 45 वर्ष निदेशक, इमैजिन फाइबर्स, दिल्ली में कोविड-19 के संक्रमण से उबरने वाले पहले शख्स रोहित दत्ता, 45 वर्ष निदेशक, इमैजिन फाइबर्स, दिल्ली में कोविड-19 के संक्रमण से उबरने वाले पहले शख्स

प्र: आप 25 फरवरी को यूरोप से लौटे. जब आप आए तो ऐसा कैसे हुआ कि आपको क्वारंटाइन में जाने को नहीं कहा गया?

मैं 21 फरवरी तक इटली में था और उस वक्त वहां कोविड-19 ज्यादा नहीं फैला था. फिर मैं बुडापेस्ट गया था, जिसके बाद मैं 25 फरवरी को विएना होते हुए दिल्ली लौटा. उस वक्त यूरोप खतरे की सूची में नहीं था और शायद जिस दिन मैं उतरा था, उस दिन मुझे बुखार नहीं था. अलबत्ता, हमें कहा गया था कि कि अगर लक्षण दिखाई दें तो हम आरएमएल अस्पताल में रिपोर्ट करें.

बीमारी का आपको कैसे पता चला?

26 फरवरी के आसपास, मुझे करीब 99.5 बुखार हुआ. पैरासिटामॉल लेने पर यह उतर जाता और फिर हो जाता. मुझे पता था कि मैं बीते कुछ दिन संक्रमण प्रभावित क्षेत्रों में था, इसलिए मुझे चिंता होने लगी. मैं एक चिकित्सक के पास गया और फिर आरएमएल अस्पताल में जांच करवाई. यह कोई दर्दनाक बीमारी नहीं थी. मुझे लगातार, औसत तेज बुखार और शरीर में दर्द था. मुझे सूखी खांसी भी थी. पर कुछ भी गंभीर नहीं था.

आपका टेस्ट जब पॉजिटिव आया तो आपकी क्या प्रतिक्रिया थी?

मैं डर गया था, अपने से ज्यादा अपने परिवार और दोस्तों के लिए. किसी संक्रामक बीमारी की जांच में सकारात्मक पाए जाने पर जिम्मेदारी और दोष की भावना आती है. मैं बुरी तरह डरा हुआ था कि मैंने कहीं अपने परिवार को संक्रमित न कर दिया हो. जब मुझे पता चला कि उन्हें संक्रमण नहीं है तो मैं जीवन में पहली बार रोया. उसके बाद, अकेले रहने की आदत डालनी थी. सफदरजंग अस्पताल में मेरी बहुत अच्छी देखभाल हुई. और, मेरा परिवार हर दिन वीडियो कॉल के माध्यम से मेरे पास रहा. भावनात्मक समर्थन दवा भी है.

आप देश में कोविड-19 से उबरने वाले पहले मरीज हैं. क्या इस अनुभव ने आप में कोई बदलाव पैदा किया है?

जब मैं घर लौटा, तो मैं नेटफ्लिक्स की एक सीरीज देखना चाहता था जिसे मैंने अस्पताल में देखना शुरू किया था. पर (हंसते हुए) मीडिया ने मुझे अकेला नहीं छोड़ा. मेरे जीवन में निश्चित रूप से कुछ बहुत महत्वपूर्ण हुआ है, जिसे मैं भूलूंगा नहीं. मैं पहले भी स्वास्थ्य के प्रति सचेत था, अब और भी सचेत रहूंगा.

आप करीब एक महीने सामाजिक रूप से अलग-थलग रहे (14 दिनों का उपचार और फिर उसके बाद 14 दिनों के लिए घर में पृथक). जब आपके आने-जाने से बंदिशें हट जाएंगी तब आप सबसे पहले क्या करना चाहेंगे?

ईश्वर के दर्शन को जाना चाहूंगा. ऐसी घटनाएं जीवन को एक गहरा अर्थ देती हैं. हो सकता है कि मैं अभी तुरंत न जा सकूं क्योंकि कई पूजास्थल बंद हैं. पर मैं बाद में जरूर जाऊंगा. कृतज्ञता ज्ञापन के लिए.

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