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‘‘कार्यकर्ता जानते हैं कि कुछ भी हो जाए, गांधी परिवार पार्टी विचारधारा से समझौता नहीं करेगा’’

पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय माकन राहुल गांधी के प्रिय पात्र हैं. कांग्रेस कार्यसमिति का सदस्य होने के साथ ही वे राजस्थान के प्रभारी महासचिव भी हैं जो उन दो राज्यों में से एक है जहां पार्टी सत्ता में है. कौशिक डेका से बातचीत में उन्होंने बताया कि कैसे कांग्रेस का मौजूदा संकट पार्टी के युवा नेताओं के लिए खुद को साबित करने का अवसर हो सकता है.

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अजय माकन अजय माकन

बातचीतः अजय माकन

प्र.कांग्रेस 'अस्तित्व के संकट’में क्यों फंसी है?

इसमें दो राय नहीं कि हाल के दिनों में हमारा चुनावी प्रदर्शन बहुत उत्साहजनक नहीं रहा है. लेकिन हमें खत्म हुआ मानना मूर्खता होगी. 2019 के आम चुनाव में हमें 19.5 फीसद वोट मिले थे. जब भाजपा 2009 में 18.8 प्रतिशत तक गिरकर आज जैसी मजबूत स्थिति में पहुंच सकती है, तो आप कांग्रेस के लिए 'अस्तित्व का संकट’ जैसे वाक्यांश का उपयोग कैसे कर सकते हैं?

हम देश के सबसे पुराने राजनैतिक दल हैं जो पारंपरिक राजनैतिक शैली में काम करता है और अतीत में यह शैली काफी सफल रही है. लेकिन समय बदल गया है, लोकतंत्र के उपकरणों का विकास होने के साथ मतदाताओं से संवाद का तरीका भी बदल गया है. निजी तौर पर मुझे लगता है कि पिछले दो दशकों में बदलाव की इस चुनौती का जवाब देने में हम अपने विरोधियों की तुलना में धीमे थे. इसके अलावा, अगर हम विश्व स्तर पर रुझानों को देखें तो पाएंगे कि वैचारिक रूप से दक्षिणपंथी रुझान वाले राजनैतिक दल जीत रहे हैं. भारत इन प्रवृत्तियों से अछूता नहीं रह सकता. 

 अगले कुछ विधानसभा चुनावों और 2024 में आप कांग्रेस का कैसा भविष्य देखते हैं?

चुनाव जीतने के लिए जो भी ताकत लगानी होती है, हम लगाते हैं. अंतत: यह विचारों की लड़ाई है. यह उन लोगों को सशक्त बनाने की कोशिश है जिनके अधिकार अपने बहुमत के बल पर सत्ता के मद में चूर अधिनायकवादी सरकार ने छीन लिए हैं.

 बहुत से लोग कांग्रेस में नेतृत्व के मुद्दे की आलोचना कर रहे हैं. उनका कहना है कि गांधी परिवार पार्टी के लिए प्रासंगिक नहीं रहा. क्या गैर-गांधी व्यक्ति कांग्रेस का नेतृत्वकर्ता हो सकता है?

यह प्रश्न पूर्वाग्रह से ग्रसित है. कांग्रेस के अधिकांश कार्यकर्ता राहुल गांधी को अध्यक्ष बनाना चाहते हैं, गांधी परिवार हमारा नेता है क्योंकि कांग्रेस कार्यकर्ताओं को उन पर पूरा भरोसा है और हमारा विश्वास है कि वे किसी भी स्थिति में इस महान राष्ट्र का वास्तविक प्रतिनिधित्व करने वाली पार्टी की विचारधारा से समझौता नहीं करेंगे. 

 युवा मतदाताओं का मत पाने के लिए उनसे कहने को कांग्रेस के पास क्या है?

अगर कोई युवा मतदाता इतिहास में बहुत गहराई तक नहीं जाना चाहता, तो भी मैं केवल एक ही बात कहना चाहूंगा. मनमोहन सिंह और नरसिंह राव के नेतृत्व में भारत सरकार का कामकाज शानदार था. हमने अर्थव्यवस्था को उदार बनाया और आगे चल कर 14 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला. चाहे 1991 का आर्थिक संकट रहा हो या 2007 की मंदी, हमने इसका सफलता से सामना किया.

अब इसकी तुलना भाजपा शासन से करें. मुद्रास्फीति, मूल्य वृद्धि, बढ़ती असमानता और आर्थिक अनिश्चितता जैसे प्रश्नों का उत्तर वे बुलडोजर, लाउडस्पीकर, हिजाब और हनुमान चालीसा की मदद से किए जा रहे ध्रुवीकरण से दे रहे हैं. बाकी के खिलाफ बहुसंख्यकों के ध्रुवीकरण के गंभीर परिणाम होंगे जिन्हें युवाओं और आने वाली पीढ़ियों को भुगतना होगा.

 कांग्रेस के पास राज्यों में युवा और उभरते हुए जन नेता न के बराबर हैं. आपके कई समकालीनों ने पार्टी छोड़ दी है जबकि बुजुर्ग नेताओं का श्रेष्ठतम समय खत्म हो चुका है.

प्रतिकूलता सच्चे नेतृत्व की परीक्षा है. दुर्भाग्य से मेरे कई समकालीन, जिन्हें हमारी पार्टी ने वर्षों तक महत्व दिया और विकसित किया, एक ऐसी पार्टी में शामिल होने के लिए हमें छोड़ गए जिसका राजनैतिक दृष्टिकोण हमसे उलट है. लेकिन हम अब जिस स्थिति में हैं, वह युवाओं के लिए सीढ़ी चढ़ कर ऊपर आने का मौका है.

 विपक्षी एकता की धुरी बनने की बजाए कांग्रेस पार्टियों को अलग-थलग कर रही है. ऐसा उन पार्टियों के नेताओं की महत्वाकांक्षा के कारण है या उन लोगों के आरोपों के मुताबिक कांग्रेस नेतृत्व के अहंकार के कारण?

आप और टीएमसी जैसी पार्टियां देश के विभिन्न हिस्सों में भाजपा को चुनाव जीतने में मदद करती हैं. अपने राज्यों के बाहर वे कांग्रेस के वोटों को बांटने के लिए चुनाव लड़ते हैं. ठ्ठ

‘‘अगर हम विश्व स्तर पर रुझान देखें तो पाएंगे कि दक्षिणपंथी विचारधारा वाली पार्टियां जीत रही हैं. भारत इन प्रवृत्तियों से अछूता नहीं रह सकता’’.

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