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'आजकल के भोजपुरी गीतकार पढ़ते-लिखते नहीं हैं’

भोजपुरी संगीत के मौजूदा जातिवादी दौर से वे भी दुखी हैं. इंडिया टुडे ने इस मसले पर उनसे बातचीत की, इसके प्रमुख अंश:

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विनय बिहारी मशहूर गीतकार और बिहार के पूर्व संस्कृति मंत्री विनय बिहारी मशहूर गीतकार और बिहार के पूर्व संस्कृति मंत्री

विनय बिहारी को भोजपुरी गीतों का सबसे बड़ा गीतकार माना जाता है. वे 20 हजार से अधिक गीत लिख चुके हैं, 700 फिल्मों में उनके गीत गाए जा चुके हैं. भोजपुरी गीतों से मिली लोकप्रियता ने जहां मनोज तिवारी, रवि किशन और निरहुआ जैसे गायक-अभिनेताओं को सांसद बना दिया, वहीं विनय बिहारी पिछले तीन बार से विधायक चुने जाते रहे हैं और एक बार बिहार के कला संस्कृति मंत्री भी रह चुके हैं.

हालांकि उन पर भी भोजपुरी गीतों में अश्लीलता और द्विअर्थी गीतों को आगे बढ़ाने का इल्जाम है, मगर भोजपुरी संगीत के मौजूदा जातिवादी दौर से वे भी दुखी हैं. इंडिया टुडे ने इस मसले पर उनसे बातचीत की, इसके प्रमुख अंश:

 भोजपुरी गीतों में जातिवाद के नए ट्रेंड को आप कैसे देखते हैं?

 

ऐसा नहीं है कि पहले भोजपुरी गीतों में जातिवाद नहीं होता था. मगर कभी किसी जाति को नीचा दिखाने की परंपरा नहीं थी. अभी के गानों से जातियों के बीच द्वेष पैदा हो रहा है.

 ऐसा ट्रेंड क्यों शुरू हुआ?

 

आज भोजपुरी गीत रचने वाले लोग पढ़ते-लिखते नहीं हैं. ऐसे में मधुर गीत नहीं रचे जा रहे. गायकों को भी हड़बड़ी है कि जाति के गीत गाकर वे अपनी जाति में पॉप्युलर हो जाएंगे.  

 आपके ऊपर भी तो भोजपुरी गानों में अश्लीलता फैलाने के आरोप हैं.

आप उसे अश्लीलता नहीं कहें, कहें कि कुछ चुटीले गीत मैंने रचे हैं. वह तो भोजपुरी गीतों की परंपरा का हिस्सा है. मगर मैंने कभी नफरत को बढ़ावा देने वाले गीत नहीं लिखे. मुझे तो अब अफसोस होता है, मैं क्यों राजनीति में आ गया, अगर मैं भोजपुरी इंडस्ट्री में रहता तो कम से कम ऐसे गीत नहीं रचे जाते.

-पुष्यमित्र

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