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अफजल ने कैमरे पर खुद को गुनहगार माना था

वह संसद पर हमले का तीसरा दिन था. दोपहर को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के मेरे सूत्र से मुझे पता चला कि हमले के सिलसिले में अफजल गुरु नाम के एक कश्मीरी को श्रीनगर बस स्टैंड से गिरफ्तार कर लिया गया है और उसे विमान से दिल्ली लाया जा रहा है. अफजल उसी रात दिल्ली आया.

वह संसद पर हमले का तीसरा दिन था. दोपहर को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के मेरे सूत्र से मुझे पता चला कि हमले के सिलसिले में अफजल गुरु नाम के एक कश्मीरी को श्रीनगर बस स्टैंड से गिरफ्तार कर लिया गया है और उसे विमान से दिल्ली लाया जा रहा है. अफजल उसी रात दिल्ली आया.

अगला दिन रविवार था. मैं सुबह से ही एक बार फिर स्पेशल सेल के दफ्तर के बाहर जा कर खड़ा हो गया. मैं फोन पर लगातार स्पेशल सेल के एसीपी राजबीर, डीसीपी अशोक चांद और कमिश्नर अजयराज शर्मा से संपर्क में था. दोपहर को हमें बताया गया कि अफजल और उसके साथ हिरासत में लिए गए उसके बाकी तीन साथियों के विजुअल हमें शूट करने दिए जाएंगे. कुछ देर बाद ही पहली बार अफजल और उसके साथी हमारे सामने थे. तीनों के हाथों मे हथकडिय़ां थीं. तीनों शायद पहली बार कैमरे का सामना कर रहे थे.

मैं इंटरव्यू के लिए लगातार कोशिश कर रहा था. 19 दिसंबर को अचानक एसीपी राजबीर ने मुझसे कहा कि फिक्र मत करो, इंटरव्यू मिल जाएगा. खुद गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी चाहते हैं कि संसद हमले के आरोपी का सच पूरा देश जाने. डीसीपी अशोक चांद ने भी कहा कि एक बार ऊपर से ऑर्डर आने दो, इंटरव्यू हो जाएगा. गुरुवार, 20 दिसंबर को मैं सुबह से स्पेशल सेल के दफ्तर के बाहर खड़ा था. दोपहर करीब एक बजे एसीपी राजबीर ने कैमरे के साथ पहली मंजिल पर अपने दफ्तर में बुलाया. मैं समझ गया कि ऊपर से ऑर्डर आ चुका है.

दफ्तर में राजबीर अपनी कुर्सी पर बैठा था. सामने मुझे बिठाया और फिर बताया कि अफजल गुरु इसी कमरे में आने वाला है, अपना कैमरा सेट कर लो. मैंने पूछा बाकी तीनों? राजबीर ने कहा कि मेन अफजल ही है इसलिए सिर्फ वही बोलेगा. राजबीर ने कहा मैं भी कमरे में ही रहूंगा और जो सवाल या जवाब ठीक नहीं लगेगा, उसे बाद में हटा देना. मैंने हामी भर ली.

इसके बाद दोपहर करीब डेढ़ बजे स्पेशल सेल के जवान अफजल को लेकर आए और उसे मेरे सामने वाली कुर्सी पर बिठाया गया. अफजल के बाल करीने से सजे थे, शेव शायद कुछ देर पहले ही कराया गया था. ऐसा लगता था मानो उसे नहला-धुला कर लाया गया है. राजबीर मेरे ठीक पीछे दाईं तरफ कुछ इस तरह बैठा था कि उसकी नजरें सीधे अफजल पर थीं. अफजल मेरे सामने बैठा था पर वह बार-बार राजबीर की तरफ देखता था.

सवाल-जवाब के दौरान मैंने एस.ए.आर. गिलानी के बारे में पूछा कि संसद हमले में उनका क्या रोल था? उसी वक्त राजबीर के पास किसी का फोन आया था, इसलिए वह मेरा सवाल नहीं सुन सका. लेकिन फोन रखने के बाद इसका जवाब सुन चुका था. इसके बाद अचानक राजबीर ने इशारा कर इंटरव्यू खत्म करने को कहा. इसके बाद जैसे ही हमारा कैमरा बंद हुआ, उसने अफजल को डांटा कि वह गिलानी के बारे में क्यों बोल रहा था. इसके बाद उस एसीपी ने मुझसे कहा कि मैंने अपना वादा निभाया. अब आपकी बारी है. प्लीज, गिलानी वाली लाइन इंटरव्यू से हटा देना.

राजबीर हम सबको खबरें दिया करता था. मैं उस सोर्स को नाराज नहीं करना चाहता था. इसलिए उस शाम जब यह इंटरव्यू आजतक पर टेलीकास्ट हुआ तो मैंने वे लाइनें हटा दीं. मुझे उस वक्ततक सचमुच यह एहसास नहीं था कि इस लाइन की कोई अहमियत भी हो सकती है.

मगर संसद हमले के छह महीने पूरे होने पर आजतक ने अफजल का वही इंटरव्यू फिर से चलाया. तब तक मैं भूल चुका था कि गिलानी की लाइन हटानी है. तब अफजल का पूरा इंटरव्यू चल गया, जिसमें अफजल कह रहा था कि संसद पर हमले के बारे में गिलानी को कोई जानकारी नहीं थी और वह बेकसूर है. फिर एक रोज पटियाला हाउस कोर्ट से जस्टिस एस.एन. ढींगरा का समन मुझे मिला. जिसमें मुझे अफजल के इंटरव्यू का पूरा टेप लेकर अदालत में हाजिर होने को कहा गया था. तय तारीख पर मैं जब अदालत पहुंचा तो वहां पहले से टीवी और वीसीआर रखा हुआ था. एक कटघरे में मैं खड़ा था और सामने के कटघरे में अफजल, गिलानी और शौकत थे. अदालत के अंदर एसीपी राजबीर और स्पेशल सेल की उसकी पूरी टीम थी. साथ में प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के भी काफी लोग थे.

अदालत में पूरा इंटरव्यू देखने के बाद जस्टिस ढींगरा ने मुझसे पूछा कि पहली बार में मैंने गिलानी वाली बात इंटरव्यू से क्यों हटा दी थी. मैंने बताया कि ऐसा मैंने राजबीर के कहने पर किया था. जब मैंने अफजल से पूछा था कि आप लोग जो आतंकवाद फैला रहे हैं उसकी वजह से भारतीय मुसलमानों को शक की निगाह से देखा जाता है तो उसने कहा, ‘‘मुझे एहसास होता है कि हमारे जैसे लोगों की वजह से इंडिया के मुसलमान तकलीफ झेलते हैं.’’

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