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मदहोशी के आलम में डूबी मायानगरी!

अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत से बॉलीवुड के लिए मुसीबतों का महाद्वार खुल गया है. इंडस्ट्री में ड्रग्स के चलन और कारोबार पर एनसीबी जल्द कड़ी कार्रवाई कर सकती है

निशाने पर 8 सितंबर को एनसीबी के दफ्तर में रिया चक्रवर्ती निशाने पर 8 सितंबर को एनसीबी के दफ्तर में रिया चक्रवर्ती

सुशांत सिंह राजूपत की मौत से जुड़े मामले में आखिरकार गिरफ्तारियां हो ही गईं. तीन महीने पहले यह अदाकार अपने कमरे में मृत पाया गया था और तभी से पूरा देश इस मामले में डूबा और बंटा हुआ है. सुशांत की गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती को 8 सितंबर को गिरफ्तार कर लिया गया, लेकिन गिरफ्तारी कथित आत्महत्या के लिए उकसाने या धन शोधन के लिए नहीं की गई.

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने अभिनेत्री को नशीले पदार्थ खरीदने और उनसे जुड़े लेनदेन के इंतजाम के लिए गिरफ्तार किया. हालांकि अदाकारा ने खुद नशीले पदार्थ लेने से इनकार किया और एनसीबी को उनके कब्जे से भी ऐसे कोई पदार्थ नहीं मिले. बताया जाता है कि एनसीबी और केंद्रीय जांच एजेंसी को दिए अपने बयान में रिया ने कुबूल किया कि उन्होंने सुशांत को नशे की दवाइयां दी लेकिन खुद दिवंगत अभिनेता के जोर देने पर ही दी थी.

उन्होंने कहा कि अभिनेता ने उन्हें रोकने की उनकी तमाम कोशिशों को अनदेखा कर दिया. बयान दर्ज करवाते वक्त रोती हुई रिया ने एनसीबी के अफसरों से कहा, ‘‘मैंने जो कुछ किया, सुशांत के लिए किया.’’ रिया के वकील सतीश मानशिंदे ने जमानत की अर्जी में दावा किया कि रिया पर दबाव डालकर उनसे बयान लिया गया. अर्जी कहती है, ''एनसीबी के अनेक पुरुष अफसरों ने उनसे पूछताछ की. एक भी महिला अधिकारी ने पूछताछ नहीं की.’’

रिया के अलावा उनके भाई शौविक, सुशांत के पूर्व हाउस मैनेजर सैमुअल मिरांडा, उनके घरेलू स्टाफ के सदस्य दीपेश सावंत और छह ड्रग विक्रेताओं पर भी अभिनेता को गांजा, चरस, हशीश सरीखे नशीले पदार्थों की कथित सप्लाइ करने का आरोप लगाया गया है. सुशांत की बहन श्वेता सिंह कीर्ति ने रिया की गिरक्रतारी का स्वागत किया और ट्वीट किया, 'गॉडइजविदअस’ (ईश्वर हमारे साथ है), वहीं मानशिंदे ने इसे 'इंसाफ का उपहास’ करार दिया.

नारकोटिक्स ड्रग्स ऐंड साइकोट्रॉपिक सब्स्टेंस (संशोधन) कानून या एनडीपीएस ऐक्ट 1985 के तहत नशीले पदार्थों के मामले की जांच कर रही एनसीबी ने तेजी से कार्रवाई की. इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रिया के दो मोबाइल फोनों की क्लोनिंग करने के बाद एक रिपोर्ट एनसीबी के साथ साझा की थी, जिसमें कहा गया था कि वह एक ऐसे व्हाट्सऐप ग्रुप का हिस्सा थीं जिस पर नशीले पदार्थों की चर्चा की गई थी.

हालांकि उसके बाद एजेंसी तीन संदिग्धों से महज 59 ग्राम गांजा और 5 ग्राम गहरा भूरा पदार्थ यानी कथित हशीश/चरस बरामद कर पाई है. एनसीबी की मानें तो रिया को 'ड्रग सप्लायर्स के साथ जुड़े ड्रग सिंडिकेट का सक्रिय सदस्य’ बताने के लिए इतना सबूत काफी था.

अंदरखाने की खास खबर
फिल्म जगत में नशीले पदार्थों का इस्तेमाल खुला रहस्य है. बहुत कम लोग इसके बारे में बात करते हैं. बेशक जब तक कि आप कंगना रनौत न हों, जिन्होंने ट्वीटर पर दावा किया कि ''99 फीसद सुपरस्टार हार्ड ड्रग्स का तजुर्बा कर चुके हैं और मैं इसकी गारंटी देती हूं.’’

हालांकि फिलहाल रनौत खुद हमले की जद में आ गईं जब उनके पूर्व बॉयफ्रेंड अध्ययन सुमन का 2016 का एक इंटरव्यू सामने आया जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि रनौत ने 2008 में अपनी सालगिरह की पार्टी के दौरान उनसे कोकीन लेने के लिए कहा था.

इस वीडियो में सुमन कहते हैं कि उन्होंने कोकीन लेने से तो इनकार कर दिया, लेकिन 'चार या पांच बार उनके साथ हशीश’ ली थी. रनौत का अगर नशीले पदार्थों के साथ कोई रिश्ता रहा है तो मुंबई पुलिस अब उसकी जांच करेगी.

पिछले साल फिल्मकार करण जौहर ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो साझा किया था, जिसने फिर नशीले पदार्थों के कथित इस्तेमाल की छानबीन को न्योता दिया. यह एक हाउस पार्टी का वीडियो था जिसमें ए-लिस्ट सितारों ने हिस्सा लिया था. इसमें अभिनेता विकी कौशल अपनी नाक घिसते देखे गए.

जौहर और कौशल ने पुरजोर इनकार किया कि पार्टी में नशीले पदार्थ लिए गए थे. जौहर ने मुंबई में इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2019 में कहा था, ''जाहिर है, अगर बॉलीवुड (के अभिनेताओं) का एक समूह एक कमरे में है तो आप शायद ड्रग्स ही ले रहे होंगे.

अगर कोई नशीले पदार्थों का सेवन (किया जा रहा) था, ...तो क्या मैं बेवकूफ हूं जो दिनदहाड़े उसका वीडियो निकाल दूंगा. मेरी मां उस खास ड्राइंग रूम के तल पर ही रहती हैं.’’ हालांकि ऐसे इनकार से बॉलीवुड की अटकलें भला कब थमी हैं.

अलबत्ता कोई भी दूसरा अदाकार नशीले पदार्थों के खतरे का संजय दत्त से ज्यादा बड़ा प्रतीक नहीं रहा है. कभी कोकीन और हेरोइन के लती रहे दत्त इन्हें अपने पास रखने के कारण 1982 में जेल गए थे. उन्होंने 2017 में कहा था, ‘‘दुनिया में ऐसी कोई ड्रग नहीं जो मैंने नहीं ली है.’’

अभिनेता की जिंदगी पर 2018 की सुपरहिट बायोपिक संजू में दत्त को 1980 के दशक में अमेरिका में रिहैबिलिटैशन में दिखाया गया था. इस फिल्म में दत्त का किरदार निभाने वाले अदाकार रणबीर कपूर ने कुबूल किया था कि उन्होंने न्यूयॉर्क में ऐक्टिंग की पढ़ाई करते वक्त और बाद में भी प्रदर्शन बढिय़ा करने के लिए चरस पी थी.

इंडिया टुडे  से 2013 में उन्होंने कहा था, ‘‘मैंने रॉकस्टार (के निर्माण) के दौरान फिर इसका इस्तेमाल किया. इस बार अभिनय के साधन के तौर पर. जब 300 ऊबे हुए जूनियर आर्टिस्ट असली दर्शक बनकर बैठे हों तब उस लम्हे को जी पाना मुश्किल था. गांजे ने उन लम्हों को असल सरीखा बना दिया.’’

अभिनेता प्रतीक के लिए, जैसा कि उन्होंने 2017 में मुंबई मिरर से कहा था, नशीले पदार्थ 'हकीकत से भागने’ के साधन थे. उन्होंने कहा था, ''लोग अब भी सोचते हैं कि मैं नशे के शिकंजे में इसलिए था क्योंकि मनोरंजक ड्रग्स में लिप्त होना सेलेब्रिटी के लिए 'कूल’ था. मेरा बचपन उलझा हुआ था और ढेरों सवाल मन में थे जिनका जवाब मेरे पास नहीं था, लिहाजा मैंने दूसरी जगहों पर तसल्ली खोजी.’’

इनसानी संज्ञान भावना और व्यवहार से जुड़े इलाज में प्रशिक्षित मनोवैज्ञानिक और मनोचिकित्सक श्रद्धा सिधवानी के मुताबिक, फिल्म जगत में नशीले पदार्थों की लत महज जीवनशैली से जुड़ा चुनाव नहीं है. अस्थिर पेशे में जहां अभिनेताओं की किस्मत शुक्रवार के नतीजों से बनती-बिगड़ती है, नशीले पदार्थ उनके लिए उद्दीपकों का काम करते हैं.

सिधवानी कहती हैं, ‘‘जब भी आप मायूसी महसूस करते हैं, आप फिर इसी का सहारा लेते हैं और व्यसन का यह चक्र चलता रहता है.’’ वे यह भी कहती हैं कि उन लोगों के लिए जिन्हें उद्योग के दबाव झेलने पड़ते हैं, नशीले पदार्थों की लत सामाजिक वैधता हासिल करने का साधन या इससे मुकाबले का तंत्र भी हो सकती है, खासकर अगर उन्हें 'मूड डिसऑर्डर, इंपल्स कंट्रोल डिसऑर्डर, बायपोलर डिसऑर्डर सरीखी भीतरी परेशानी’ हो.

गांजा दूसरे नशीले पदार्थों के मुकाबले हानिरहित है, इसे खारिज करते हुए वे कहती हैं कि यह इसलिए गलत है क्योंकि इससे 'व्यन्न्तित्व और विश्वास की परेशानियां’ (पैदा होती हैं) और पैरेनॉइया एवं एंग्जाइटी के दौरों की तरफ ले जाती हैं.’’

आरोप है कि डिप्रेशन, एंग्जाइटी और बायपोलर डिसऑर्डर से जूझ रहे सुशांत ने नशीले पदार्थों का जोखिम उठाया था. रसोइये नीरज सिंह ने सीबीआइ से कहा कि उसने मौत से कुछ दिन पहले अभिनेता के लिए जॉइंट रोल किए थे. सावंत ने एनसीबी तो बताया कि उसने सुशांत को 2018 से ही गांजे के कश खींचते देखा था.

एनसीबी को उम्मीद है कि रिया की गिरक्रतारी ड्रग माफिया के साथ बॉलीवुड के दबे-छिपे गैरकानूनी लेनदेन का पर्दाफाश कर देगी. एजेंसी ने पहले भी 2001 में कोशिश की थी जब कोकीन खरीदने का जुगाड़ करते फरदीन खान को गिरफ्तार किया गया था. एनसीबी 9 ग्राम कोकीन रखने के लिए उन पर मुकदमा चलाना चाहती थी, लेकिन 2010 में बॉम्बे हाइकोर्ट ने फैसला दिया कि उन पर केवल 1 ग्राम कोकीन खरीदने की कोशिश का आरोप बनता है.
ड्रग की संस्कृति को लेकर बॉलीवुड में हर कोई खामोश नहीं है. एनसीबी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, बॉलीवुड की तीन जानी-मानी शख्सियतों ने फिल्म जगत की साफ-सफाई करना ठान लिया है और इसी तिकड़ी ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से गुजारिश की कि वह कड़ी कार्रवाई के लिए एनसीबी को इस मामले में लाए. एजेंसी का दावा है कि रिया ने नशीले पदार्थों का इस्तेमाल करने वाली 25 सेलेब्रिटी के नाम दिए हैं और मुंबई की उन जगहों के नाम भी बताए हैं जहां नियमित तौर पर ड्रग पार्टियां आयोजित की जाती हैं.

धुएं की लकीर
सुशांत के मामले से जुड़े कथित ड्रग विक्रेताओं के खिलाफ एनसीबी का अभियान 28 अगस्त को शुरू हुआ जब उन्होंने कुर्ला से 46 ग्राम गांजे के साथ अब्बास रमजान अली लखानी को पकड़ा. उसने विक्रेता के तौर पर करण अरोड़ा की पहचान बताई. अरोड़ा को 13 ग्राम गांजे के साथ चांदीवली से उठा लिया गया. लखानी और अरोड़ा से मिली जानकारी के आधार पर 1 सितंबर को एक और सप्लायर जैद विलात्रा के ठिकानों पर छापेमारी की गई. विलात्रा ने अब्दुल बासित परिहार का नाम बताया जिसके पास ड्रग पहुंचाई गई थी.

सावंत की हिरासत की मांग करते हुए अदालत के सामने 6 सितंबर को दाखिल रिमांड की अर्जी में एनसीबी ने परिहार और शौविक के बीच रिश्ता बताने की कोशिश की है. उनके मुताबिक, शौविक के निर्देश पर परिहार, विलात्रा और एक कैजन इब्राहिम से ड्रग खरीदता था, जो मिरांडा और सावंत को दे दी जाती थी. इब्राहिम के कब्जे से 5 ग्राम हशीश/चरस बरामद की गई थी.

एनसीबी ने 7 सितंबर को अनुज केशवानी को भी गिरफ्तार किया, उसे इब्राहिम ने सप्लायर बताया था. एनसीबी ने इब्राहिम को हिरासत में लेने की मांग नहीं की और उसे जमानत मिल गई. एनसीबी ने सावंत को 5 सितंबर को गिरफ्तार किया. अर्जी में कहा गया, ''सावंत के बयान और एनसीबी के जुटाए इलेक्ट्रॉनिक सबूतों से साफ है कि वह ड्रग सप्लायरों और शख्सियतों से जुड़े ड्रग सिंडिकेट का सक्रिय सदस्य है.’’

एनसीबी के डिप्टी डायरेक्टर मुथा अशोक जैन कहते हैं कि वे अभियुक्तों को आमने-सामने बिठाकर और ज्यादा ब्योरे उगलवाएंगे. वे कहते हैं, ‘‘छोटे मामलों में आरोपपत्र दाखिल करने के लिए 60 दिन और बड़े केस में छह महीने मिलते हैं. हम मामले को तार्किक नतीजे पर पहुंचाएंगे.’’

अब तक कहां पहुंचा मामला
नारकोटिक्स के मामलों से निपट चुके एक बड़े पुलिस अफसर के मुताबिक, जब तक शौविक या रिया के कब्जे से नशीले पदार्थ नहीं मिलते, ड्रग मामले में दोनों की लिप्तता साबित कर पाना मुश्किल होगा. हालांकि एनसीबी को अब तक बनाए अपने मामले पर पूरा भरोसा है.

उसका यह भरोसा एनडीपीएस कानून के उस प्रावधान पर टिका है जो कहता है कि नारकोटिक्स ड्रग्स या साइकोट्रॉपिक पदार्थों के उत्पादन, निर्माण, रखने, बेचने, खरीदने, लाने-ले जाने, इकट्ठा करके रखने, छिपाने, इस्तेमाल या सेवन करने, अंतर-राज्य आयात-निर्यात, भारत में आयात, भारत से निर्यात या एक से दूसरे जहाज पर चढ़ाने में लिप्त होना अपराध है. 

मामले में 7 सितंबर को उस वक्त दिलचस्प मोड़ आ गया जब रिया ने बांद्रा पुलिस थाने में सुशांत की बहन प्रियंका तंवर और दिल्ली के राममनोहर लोहिया अस्पताल के डॉ. तरुण कुमार के खिलाफ एफआइआर दर्ज करवाई. इसमें आरोप लगाया गया कि उन्होंने जालसाजी करके एक फर्जी मेडिकल नुस्खा भेजा जिसमें सुशांत को बाह्यरोगी विभाग में डॉक्टर से सलाह लेते दिखाया गया था जबकि वह मुंबई में था.

एफआइआर कहती है कि नुस्खे में एनडीपीएस कानून के तहत प्रतिबंधित दवाइयां लिखी गई थीं, जिन्हें अगर उचित देखरेख के बगैर दिया जाए तो एंग्जाइटी का बेहद गंभीर दौरा पड़ सकता है. मानशिंदे का कहना है कि रिया ने 8 जून को सुशांत का घर छोड़ा, उसी दिन उन्होंने दवाइयां लेने से पहले डॉक्टर को दिखा लेने की रिया की सलाह ठुकरा दी थी.

रिया के वकील कहते हैं, ''हो सकता है गैरकानूनी ढंग से दी दवाइयों और नशीले पदार्थों का मिश्रण 14 जून को सुशांत की आत्महत्या का कारण बना हो. उनकी बहनों को जांचकर्ताओं और ईश्वर के प्रति जवाबदेह होना होगा.’’

सुशांत की मौत का मामला 19 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मुंबई पुलिस से लेकर सीबीआइ को सौंपा गया था. इसको देखते हुए, सुशांत के परिवार के वकील विकास सिंह के मुताबिक, रिया की एफआइआर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन है. वे कहते हैं, ''अगर उसके इरादे नेक होते तो उसे सीबीआइ को दिए बयान में इसका जिक्र करना चाहिए था कि उसने एफआइआर में क्या कहा है.’’

जांचकर्ता मानते हैं कि सुशांत को नशीले पदार्थ देने का कबूलनामा आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में रिया पर मुकदमा चलाने के लिए काफी नहीं होगा. सीबीआइ को साबित करना होगा कि नशीले पदार्थों ने सुशांत की मानसिक बीमारी को बिगाड़ दिया. सुशांत के विसरा की जांच से जुड़ी एक्वस के डॉक्टरों की रिपोर्ट का इंतजार है.

अगर रिपोर्ट से उसके विसरा में नशीले पदार्थों की वजह से उत्पन्न किन्हीं विषैले पदार्थों की मौजूदगी पाई जाती है, तो रिया की मुश्किलें बढ़ जाएंगी. अगर ऐसे जहर के अवशेष मिलते हैं जिनका नशीले पदार्थों से कोई लेना-देना नहीं था, तो वे अपने निर्दोष होने का दावा कर सकती हैं क्योंकि वे उनसे मिलने वाली आखिरी शख्स नहीं थीं.

अगर विसरा रिपोर्ट में जहर देने का कोई जिक्र नहीं होता है, तो सुशांत की हत्या की थ्योरी धराशायी हो जाएगी. तब तक रिया भायखला जेल में अपने मुकद्दर की बाट जोह रही हैं. अपनी मासूमियत साबित करने की यह लड़ाई 28 वर्षीया अदाकारा के लिए और भी विकट हो गई है. 

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एनसीबी के सूत्र के अनुसार, बॉलीवुड की तीन हस्तियों ने गृह मंत्रालय से मांग की थी कि इंडस्ट्री पर कड़ी कार्रवाई के लिए एनसीबी को लगाया जाए अपराध.

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