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सिनेमाः दक्षिण की धुन पर थिरकता उत्तर भारत

उत्तर के सिनेमाघरों के बाजार में दूसरे और तीसरे पायदान के केंद्रों के एकल सिनेमाघरों में पुष्पा की कामयाबी बताती है कि दक्षिण की फिल्में हिंदी फिल्मों का सिनेमाघरों का हिस्से धीरे-धीरे कुतर रही हैं

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बड़ी कामयाबी पुष्पा: द राइज-पार्ट 1 में तेलुगु फिल्म स्टार अल्लू अर्जुन बड़ी कामयाबी पुष्पा: द राइज-पार्ट 1 में तेलुगु फिल्म स्टार अल्लू अर्जुन

तेलुगु फिल्म पुष्पा: द राइज—पार्ट 1 के हिंदी संस्करण को सैटेलाइट तथा डिजिटल माध्यमों और सिनेमाघरों में दिखाने के अधिकार मिलते ही निर्देशक और गोल्डमाइंस टेलीफिल्म्स के चेयरमैन मनीष शाह जानते थे कि उनके हाथ तुरुप का पत्ता लग गया है. वे कहते हैं कि पुष्पा की कामयाबी के बीज सात साल पहले बोए गए थे. मुंबई में रहने वाले ये प्रोड्यूसर स्टार गोल्ड और सोनी मैक्स सरीखे चैनलों पर तमिल और तेलुगु फिल्मों के हिंदी में डब संस्करणों को कामयाब होते देख चुके थे. उन्होंने डिजिटल पर अल्लू अर्जुन की बढ़ती लोकप्रियता भी देखी थी. यह गोल्डमाइंस फिल्म्स के यूट्यूब चैनल पर भी जाहिर था, जहां इस तेलुगु सितारे की फिल्मों ने सब मिलाकर 1.2 अरब व्यू जुटाए. पुष्पा के हिंदी में डब संस्करण—जो 100 करोड़ रुपए के क्लब में शामिल हो चुका है—के सिनेमाघरों में कामयाब होने का रास्ता काफी पहले तैयार हो गया था.

बीते 14 साल से दक्षिण की फिल्मों के सैटेलाइट प्रदर्शन के अधिकार हासिल करते आ रहे शाह के अनुसार, देश भर में पुष्पा की कामयाबी की एक वजह दर्शकों का मनोरंजन करने में हिंदी सिनेमा की नाकामी भी है. वे कहते हैं, ''विशाल दर्शक वर्ग के लिए हिंदी में हम ऐक्शन फिल्में बना ही नहीं रहे.'' उनका कहना है कि एक रोहित शेट्टी की फिल्म काफी नहीं है और सलमान खान की फिल्मों से 'कंटेट' नदारद है. वे कहते हैं, ''ऐक्शन का मतलब 10 लोगों को पीटता हीरो भर नहीं है. उसे मनोरंजक होना चाहिए, अच्छे डायलॉग और गाने होने चाहिए.'' उनके मुताबिक तमिल और तेलुगु के फिल्मकार ''ज्यादा ऐक्शन और भव्यता'' पेश करते हैं, जबकि हिंदी फिल्मकार महानगर से बाहर रहने वाले दर्शकों को दूर कर रहे हैं. तंज कसते हुए वे कहते हैं, ''हिंदी के फिल्म डायरेक्टर अंधेरी और बांद्रा (मुंबई के उपनगर) के बीच रहते हैं और उनके लिए दुनिया इन्हीं इलाकों के इर्दगिर्द घूमती है. वे इंग्लिश फिल्में और नेटफ्लिक्स देखते बड़े हुए और उन्हें लगता है, फिल्म बनाना यही है. पर ऐसा है नहीं.''

प्रमुख बाजार मुंबई के सिनेमाघर 2021 में छह माह बंद रहे. ऐसे में मुंबई के फिल्म निर्माताओं ने अपनी फिल्मों का प्रदर्शन रोक लिया या ओटीटी का रुख किया. बॉक्स ऑफिस पर हिंदी फिल्मों की कमाई 2021 में महज 500 करोड़ रुपए का आंकड़ा छू पाई. ऐसा तब हुआ जब 2019 में घरेलू बॉक्स ऑफिस पर उद्योग की 11,500 करोड़ रुपए की कमाई 2020 में घटकर 2,500 करोड़ रुपए पर आ गई, जो ईवाइ ऐंड फिक्की मीडिया ऐंड एंटरटेनमेंट की मार्च 2021में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, 78 फीसद की गिरावट थी. उधर, 2021 में तमिलनाडु, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में सिनेमाघर कम दिन बंद रहे और फिल्में नियमित आती रहीं. इसका खालिस नतीजा यह था कि तेलुगु और तमिल फिल्मों ने सालाना क्रमश: करीब 1,300 करोड़ रुपए और 700 करोड़ रुपए बटोरे.

हिंदी फिल्मों के लिए नए साल की राह आसान नहीं दिख रही है. एस.एस. राजमौलि की बेहतरीन फिल्म आरआरआर, कन्नड़ फिल्म केसीएफ का दूसरा भाग और प्रभास की राधे श्याम उन कुछ फिल्मों में हैं जो देश भर में पहुंचने की होड़ में हैं. खुद शाह एक और तेलुगु फिल्म, महेश बाबू की सरकारू वारी पाटा रिलीज करने की उम्मीद लगाए हैं.

बीते दो साल में ओटीटी की लोकप्रियता बढ़ने के साथ दक्षिण के सिनेमा ने बढ़-चढ़कर अपना दम दिखाया है. अमेजन प्राइम और नेटफ्लिक्स दोनों ने तमिल, तेलुगु और मलयालम फिल्में सबटाइटल के साथ या कुछ मामलों में हिंदी में डब किए संस्करण लगातार दिखाए. 

रीमेक एक्सप्रेस

मुंबई के फिल्मकार 1970 के दशक से ही प्रेरणा के लिए दक्षिण का रुख करते रहे हैं. जितेंद्र, मिथुन चक्रवर्ती, अनिल कपूर, गोविंदा, सलमान खान, अजय देवगन और अक्षय कुमार सरीखे अदाकारों की कामयाबी में दक्षिण का योगदान रहा. यह रुझान अलबत्ता बीते कुछ वर्षों में तेजी से परवान चढ़ा है. तेलुगु फिल्म अर्जुन रेड्डी के रीमेक कबीर सिंह के साथ शाहिद कपूर की किस्मत चमकी. उनकी अगली फिल्म जर्सी भी तेलुगु फिल्म की रीमेक है.

अगले कुछ वर्षों में बॉलीवुड करीब 24 तमिल, तेलुगु और मलयालम फिल्मों के रीमेक बनते देख रहा है. इनमें से कुछ में अक्षय कुमार (ड्राइविंग लाइसेंस, मलयालम) और सलमान खान (मास्टर, तमिल) सरीखे अदाकार हैं. सिनेमा मालिक और प्रदर्शक अक्षय राठी कहते हैं कि इन्हें फिर से बनाने की अच्छी वजह भी है, क्योंकि वे ''कॉमेडी, ऐक्शन, ड्रामा और फैमिली इमोशन का थोड़ा तड़का लगाकर बेधड़क और बेलौस ढंग से दिल बहलाते हैं. हिंदी में हम अक्सर इकहरी किस्म की फिल्में बनाने लगे हैं...(और) जज्बात तथा किस्सागोई का तरीका शहराती और बहुत विशिष्ट हो गया है.''

इस बार हिंदी फिल्म उद्योग भी फॉर्मूला फिल्मों से आगे जाने की ठोस कोशिश कर रहा है. अप्लॉज एंटरटेनमेंट समीक्षकों की सराही गई तमिल फिल्म अरुवि का रीमैक बना रहा है, तो आनंद एल. राय ने गुड लक जेरी बनाई है, जो नयनतारा के अभिनय से सजी कोलामावु कोकिला जाह्नवी कपूर की मुख्य भूमिका के साथ पंजाब की पृष्ठभूमि में पेश करती है. एबंडंटिया एंटरटेनमेंट के संस्थापक और सीईओ विक्रम मल्होत्रा ने केवल अमेजन प्राइम पर 2020 में सबसे ज्यादा देखी गई फिल्म सोरारइ पोटरु (तमिल) के अधिकार खरीदे बल्कि दो खासी सराही गई मलयालम फिल्मों—अंगमाली डायरीज और #होम—के भी. मल्होत्रा कहते हैं, ''अच्छी फिल्मों के रूपांतरण किए ही जाएंगे क्योंकि वे अपनी जज्बाती और सांदर्भिक प्रासंगिकता गंवाए बगैर हर जगह के दर्शक से जुड़ पाती हैं.''

उन्हें लगता है कि दक्षिण के रचनाकार जोखिम और तकलीफ उठाने और ''अपने गहरे विश्वासों के दम पर दांव लगाने को ज्यादा तैयार'' हैं. वे कहते हैं कि खासकर मलयाली सिनेमा की ''जोखिम उठाने की क्षमता कहीं ज्यादा है और इसलिए नई अवधारणाएं और उथलपुथल मचाने वाली कहानियां गढ़ने की क्षमता भी ज्यादा है.'' मल्होत्रा ''रीमेक'' के बजाए ''रूपांतरण'' शब्द को तरजीह देते हैं. वे कहते हैं, ''यह मेरे लिए फिल्म दोबारा बनाने का कम और उसकी आत्मा को लेकर पुनर्कल्पना करने का मामला ज्यादा है.'' डायरेक्टर जगन शक्ति (मिशन मंगल से मशहूर), जो हिट मलयाली ड्रामा फिल्म अय्यप्पनम कोशियम के हिंदी रीमेक का निर्देशन करेंगे, उनकी बात से इत्तेफाक रखते हैं. वे कहते हैं, ''वह जिस परिवेश में रची-बसी है, उसका रूपांतरण जरूरी है. मेरे लिए सबसे अच्छा तरीका यह है कि मूल फिल्म को बदलें और तानें लेकिन पटकथा की आत्मा से छेड़छाड़ न करें.'' बेंगलुरू के रहने वाले शक्ति मानते हैं कि तमिल, तेलुगु और मलयालम में बात कर पाने की वजह से वे मूल फिल्म से ''उलझने और (उसे) समझने'' की बेहतर स्थिति में हैं.

मूल फिल्म का निर्देशक अगर अपनी फिल्म को नई भाषा में फिर से बनाने के लिए तैयार हो तो यह और भी अच्छा है. विक्रम वेधा और हिट: द फर्स्ट केस के मामले में टी-सीरीज के प्रोड्यूसर भूषण कुमार को यह  मुनासिब लगा कि पुष्कर-गायत्री और शैलेश कोलानु की जोड़ी हिंदी संस्करण का निर्देशन करे क्योंकि ''वे किरदार, कहानी और चित्रण से बखूबी वाकिफ हैं.'' भूषण कुमार हिंदी रीमेक के लिए भी अर्जुन रेड्डी के लेखक-निर्देशक संदीप रेड्डी वंगा को लाए थे. उनके तईं ''हिंदी संस्करण बनाने के लिए दक्षिण भारतीय मूल फिल्म का जबरदस्त हिट होना या उसमें किसी बड़े हीरो का होना जरूरी नहीं.'' कहानी ज्यादा अहम है.

उत्तर में हलचल

उत्तर के सिनेमाघरों के बाजार में दूसरे और तीसरे पायदान के केंद्रों के एकल सिनेमाघरों में पुष्पा की कामयाबी बताती है कि दक्षिण की फिल्में हिंदी फिल्मों का सिनेमाघरों का हिस्से धीरे-धीरे कुतर रही हैं. राठी कहते हैं, ''दक्षिण भारतीय अभिनेताओं की लोकप्रियता और स्टारडम अब क्षेत्रीय परिघटना नहीं रही. अल्लू अर्जुन की फिल्में जितनी लोकप्रिय हैं, उतनी ही महेश बाबू, राम चरण और जूनियर एनटीआर की फिल्में भी. तय है कि दूसरे भी उन्हें आज नहीं तो कल सिनेमाघरों में रिलीज करेंगे.'' या वे उनके साथ उसी तरह काम करना चुन सकते हैं जैसे भूषण कुमार दो फिल्में राधे श्याम और आदिपुरुष प्रभास के साथ प्रोड्यूस कर रहे हैं. दक्षिण के सितारे खुद भी हिंदी संस्करण डब करने को उत्सुक हैं. राम चरण और जूनियर एनटीआर ने आरआरआर के लिए ऐसा किया, तो प्रभास और यश ने क्रमश: राधे श्याम और केजीएफ 2 के लिए किया है.

दक्षिण सिनेमा की बढ़ती हनक ने मुंबई में कइयों को हड़का दिया है. मनीश शाह ने हाल में जब अल्लू अर्जुन की 2020 की हिट फिल्म अला वैकुण्ठपुररामुलू का हिंदी में डब संस्करण सिनेमाघरों में रिलीज करने का ऐलान किया, तो हिंदी संस्करण बनाने वाले दहशत में आ गए. शहजादा नाम से बनाए जा रहे इसके रीमेक में कार्तिक आर्यन और कृति सैनन हैं और इसके इसी साल रिलीज होने की उम्मीद है. शाह को अपनी योजना अंतत: खत्म कर देनी पड़ी क्योंकि बताया जाता है कि शहजादा के प्रोड्यूसरों ने उन्हें ऐसा करने के लिए भारी रकम अदा की.

शाह अब इसे अपने चैनल धिनचक टीवी पर 13 फरवरी को रिलीज करेंगे. कार्तिक को ''असुरक्षित'' बताते हुए शाह कहते हैं, ''अभिनेता में सफलता हासिल करने का आत्मविश्वास होना चाहिए. यदि वे पिक्चर अच्छी बनाते तो उससे कलेक्शन प्रभावित नहीं होता.'' इस बीच शाह अपनी नई कामयाबी का मजा ले रहे हैं. उन्हें अभी पुष्पा—चैप्टर 2 के अधिकार नहीं मिले हैं. वे कहते हैं, ''पुष्पा 2 के लिए जब वे मेरे पास आएंगे, मुझे ऐसी कीमत पर बात खत्म होने की उम्मीद है जो सभी के लिए कारगर हो. मैं यहां पैसा गंवाने के लिए नहीं हूं.'' 

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