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जयदीप अहलावतः सब्र का मिलने लगा फायदा

अपने किरदारों के प्रति अपनाए गए सधे रवैये का जयदीप अहलावत को अब फायदा मिल रहा

अहलावत फिल्म खाली पीली के एक दृश्य में अहलावत फिल्म खाली पीली के एक दृश्य में

जयदीप अहलावत जब भी घर से बाहर निकलते हैं, एक सजग नागरिक की तरह मास्क जरूर पहनते हैं—लेकिन उनके प्रशंसक उन्हें पहचान ही लेते हैं. वे न सिर्फ इस अभिनेता को पहचानते हैं बल्कि उनका अभिवादन भी हाथीराम जी कहकर करते हैं.

हाथीराम अमेजन प्राइम पर आई वेब सीरीज पाताल लोक का नैतिक नजरिए वाले पुलिसकर्मी का उनका किरदार था, जिसे मौजूदा भारत की झलक दिखाने वाले शो के रूप में काफी तारीफ मिली थी. अहलावत कहते हैं, ''एक दिन किसी ने जोर से हाथीराम कहकर मुझे चौंका दिया था.’’

अब अहलावत को इस तरह मिल रही तारीफ की आदत हो रही है, पर साथ ही उन्हें ऐसी केंद्रीय भूमिकाएं मिल रही हैं. वे बताते हैं कि इससे लगता है, अब फिल्मकारों को आखिरकार यह भरोसा होने लगा है कि वे भी किसी प्रोजेक्ट की अगुआई कर सकते हैं. वे कहते हैं, ''बहुत कम ही (अभिनेता) होंगे जो हीरो नहीं बनना चाहते होंगे.’’ लेकिन इसके साथ ही, उन्हें एंटी-हीरो बनने या ऐसे जॉनर में काम करने से भी गुरेज नहीं, जिनसे उनका अभी तक साबका नहीं पड़ा.

उनके शब्दों में, ''अपने तरह की एक्शन और कॉमेडी भी कर लेंगे. अगर कोई रोमांटिक स्टोरी लिखे, तो मैं रोमांटिक शेड भी निभा लूंगा.’’ अपनी आने वाली फिल्म खाली पीली में अहलावत घर से भाग निकले जोड़े (ईशान खट्टर और अनन्या पांडे) की खोज में निकले बुरे आदमी के किरदार में हैं. यह फिल्म जीप्लेक्स पर 2 अक्तूबर को रिलीज हो रही है.

शिक्षकों के घर में जन्मे अहलावत हिंदी साहित्य पढ़ते हुए बड़े हुए हैं जिनमें प्रेमचंद की कहानियां भी थीं. कॉलेज में दो साल के रंगमंच के अनुभव के बाद वे एक्टिंग सीखने पुणे के फिल्म ऐंड टेलिविजन इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (एफटीआइआइ) चले गए. वे कहते हैं, ''उस वक्त तक मेरी पहचान महज कमर्शियल सिनेमा से थी और मुझे विश्व सिनेमा की समझ नहीं थी.

इसने मुझे सिनेमा और जीवन दोनों को लेकर एक नया नजरिया दिया.’’ अहलावत 2008 के उस बैच से ताल्लुक रखते हैं जिसे गोल्डन बैच कहा जाता है, जिसमें राज कुमार राव (शाहिद), विजय वर्मा (गली बॉय) और पीतोबाश त्रिपाठी (शोर इन द सिटी) भी शामिल हैं.

अपने सहपाठियों की ही तरह, जब वे मुंबई आए तो उनके सर पर किसी गॉडफादर का हाथ नहीं था, लेकिन अहलावत अपने सफर को संघर्ष या स्ट्रगल कहने से गुरेज करते हैं. वे मानते हैं कि ''मैं बड़ी किस्मतवाला रहा हूं. मुझे नहीं पता था कि किससे मिलूं, लेकिन मैंने किस्मत को यह तय करने दिया. अपने खर्चों को लेकर भी मुझमें काफी समझदारी थी और वह वक्त नहीं आया कि मैं मुंबई छोडऩे के बारे में सोचने लगूं.

काम मिलता चला गया. इस तरह मैंने खुद को साबित किया.’’ कमांडो और विश्वरूपम एक और दो जैसी फिल्मों में खलनायकों के किरदारों की वजह से वे रडार में बने रहे लेकिन मेघना गुलजार की राजी (2018) में अहलावत नौसिखिया अंडरकवर एजेंट आलिया भट्ट को प्रशिक्षित करने वाले एक निर्दयी रॉ अफसर के रूप में अपनी छाप छोडऩे में सफल रहे.

2020 में रिलीज अधिकतर फिल्मों की तरह खाली पीली भी मोबाइल या लैपटॉप पर देखने के लिहाज से नहीं बनाई गई, पर अहलावत बड़े परदे की चमक पर लहालोट होने के बावजूद ओटीटी फॉर्मेट के सकारात्मक पहलुओं को बहुत अहमियत देते हैं.

पीछा करने वाली थ्रिलर फिल्म का आइडिया 1980-90 के दशक की फिल्मों का बहुत पहचानी हुई फॉर्मूला किस्सागोई रही है, पर वे कहते हैं, इसमें समसामयिकता भी है. ''इसमें डायलॉगबाजी है लेकिन मैंने अपना काम सहज भावना से किया है.’’ यह ऐसी रणनीति है जिसका फल बड़ा मीठा होता है. ''अकेले आए थे, अकेले ही चल रहे हैं. मैं यहां लंबी पारी खेलने आया हूं.’’ सचमुच!

—सुहानी सिंह


जयदीप अहलावत को अब मुख्य/ अहम भूमिकाओं की पेशकश की जा रही. उनके हिसाब से यह उन पर फिल्मकारों के इस भरोसे को जाहिर करता है कि वे अपने कंधे पर किसी फिल्म को लेकर चल सकते हैं
 

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